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CM योगी के एक कदम से यूपी सरकार ने बचाए 9700 करोड़, देश में नंबर-1 बना उत्तर प्रदेश
उत्तर प्रदेश सरकार ने GeM पोर्टल से 22,337 करोड़ रुपये की खरीद कर देश में पहला स्थान हासिल किया. साथ ही रिवर्स ऑक्शन के जरिए 9,700 करोड़ रुपये की बचत भी की गई.
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उत्तर प्रदेश ने सरकारी खरीद के क्षेत्र में एक नया इतिहास रच दिया है. डिजिटल सिस्टम की ओर बढ़ते कदम अब साफ तौर पर परिणाम देने लगे हैं. वित्त वर्ष 2025-26 के आंकड़े बताते हैं कि उत्तर प्रदेश अब सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM) पोर्टल के जरिए खरीद करने वाला देश का नंबर एक राज्य बन चुका है.
आंकड़ों के मुताबिक, यूपी सरकार ने इस वित्त वर्ष में GeM पोर्टल के माध्यम से 22,337 करोड़ रुपये की रिकॉर्ड खरीद की है. यह उपलब्धि इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि अन्य बड़े राज्य इससे काफी पीछे हैं. गुजरात 14,009 करोड़ रुपये के साथ दूसरे स्थान पर रहा, जबकि महाराष्ट्र 6,113 करोड़ रुपये के साथ तीसरे और दिल्ली 4,278 करोड़ रुपये की खरीद के साथ चौथे स्थान पर रहा.
नई नीति से आया बड़ा बदलाव
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इस उपलब्धि के पीछे सबसे बड़ा कारण पारदर्शिता और नई नीति को माना जा रहा है. यूपी सरकार ने पारंपरिक टेंडर सिस्टम को लगभग खत्म करते हुए पूरी तरह GeM पोर्टल को अपनाने का बड़ा फैसला लिया. 26 नवंबर 2024 को जारी की गई जेम खरीद नीति के बाद से राज्य में सरकारी खरीद का तरीका ही बदल गया. आदेश जारी होने के बाद 33 से ज्यादा पुरानी खरीद प्रक्रियाओं को रद्द कर दिया गया, जिससे नई व्यवस्था को मजबूती मिली.
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खरीद में उतार-चढ़ाव के बाद बड़ा उछाल
इस नई नीति का असर अब साफ दिखने लगा है. पहले जहां खरीद में उतार-चढ़ाव देखने को मिलता था, वहीं अब एक स्थिर और पारदर्शी सिस्टम तैयार हो गया है. साल 2023-24 में जहां 20,248 करोड़ रुपये की खरीद हुई थी, वहीं 2024-25 में यह घटकर 16,822 करोड़ रह गई. लेकिन 2025-26 में इसमें जबरदस्त उछाल आया और नया रिकॉर्ड बन गया.
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रिवर्स ऑक्शन से भारी बचत
सबसे दिलचस्प बात यह है कि इस प्रक्रिया से सरकार ने भारी बचत भी की है. रिवर्स ऑक्शन यानी उल्टी बोली की व्यवस्था ने लागत को काफी हद तक कम कर दिया. आंकड़ों के अनुसार, 10 लाख रुपये से ज्यादा के करीब 19,962 टेंडर जारी किए गए, जिनमें से 42 फीसदी टेंडर रिवर्स ऑक्शन के जरिए पूरे हुए. इन टेंडरों की अनुमानित लागत 16,284 करोड़ रुपये थी, लेकिन अंतिम खरीद आदेश केवल 6,523 करोड़ रुपये के जारी किए गए. इस तरह औसतन करीब 60 फीसदी लागत में कमी आई और कुल मिलाकर 9,700 करोड़ रुपये की बचत दर्ज की गई.
केंद्र सरकार ने की सराहना
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इस उपलब्धि पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यानाथ ने भी संतोष जताया है. समीक्षा बैठक के दौरान उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने यूपी की इस नीति की सराहना की है और इसे अन्य राज्यों के लिए आदर्श बताया है. उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि सभी विभाग अनिवार्य रूप से GeM पोर्टल के जरिए ही खरीद सुनिश्चित करें, ताकि पारदर्शिता और बचत दोनों को और मजबूत किया जा सके.
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बहरहाल, उत्तर प्रदेश का यह मॉडल न सिर्फ सरकारी खर्च को नियंत्रित करने में सफल रहा है, बल्कि यह भी साबित करता है कि सही नीति और तकनीक के साथ प्रशासनिक व्यवस्था को ज्यादा प्रभावी बनाया जा सकता है. आने वाले समय में यह मॉडल देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक मिसाल बन सकता है.