बहराइच में मगरमच्छ के हमले से बच्चे की मौत पर सीएम ने जताया दुख, बोले-घटना का वीडियो बनाने के बजाय बचाव पर दें ध्यान
मुख्यमंत्री ने सहारनपुर में शिवालिक पहाड़ियों में रात में अचानक आई बारिश की घटना का भी वृतांत बताया. कहा कि उस समय शाकुंभरी मंदिर में हजारों लोग जागरण व भंडारा कार्यक्रम में थे. ऊपर से देखते ही देखते चार-पांच फुट पानी तेजी से नदियों में बढ़ गया, लेकिन इससे पहले अलर्ट आते ही प्रशासन ने सभी लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया.
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एसडीएमए) मुख्यालय के नवीन भवन का लोकार्पण किया. यह भवन 200 करोड़ से अधिक की लागत से बनाया गया है. मुख्यमंत्री ने प्राधिकरण की वेबसाइट का भी शुभारंभ किया और यहां लगाई गई प्रदर्शनी व भवन का अवलोकन कर कार्यों के बारे में भी विस्तृत जानकारी ली. मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारा संकल्प है कि हर आपदा से निपटने के लिए उत्तर प्रदेश को ऐसा राज्य बनाना है, जहां प्रत्येक नागरिक यह विश्वास लेकर जीवन जी सके कि संकट की खड़ी में सरकार के साथ वह भी तैयार है. यह नागरिक व राष्ट्रीय कर्तव्य का हिस्सा होना चाहिए. सीएम ने उम्मीद जताई कि यह केंद्र हर नागरिक के मन में नए विश्वास का जागरण करेगा.
सतर्कता, तैयारी व जागरूकता आपदा में जन-धन की हानि को न्यूनतम स्तर पर ला सकती है
सीएम ने कहा कि प्रायः आपदा व जनधन की व्यापक हानि के बाद हम लोग सक्रिय होते हैं औऱ संवेदना व्यक्त करते हैं लेकिन आपदा के प्रति पहले से सतर्कता, तैयारी व जागरूकता जनधन की हानि को न्यूनतम स्तर पर ला सकती है. दैनिक जीवन, स्कूली पाठ्यक्रम व परिवार में संवाद के जरिए इसके बचाव के बारे में बताने की आवश्यकता है. सीएम ने बचपन का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय स्कूल व परिवारों में चर्चा होती थी कि आग, भूकंप, बाढ़ के दौरान क्या सावधानी बरतनी चाहिए क्योंकि इन घटनाओं में असामान्य आचरण नुकसान पहुंचाता है, लेकिन जागरूकता के जरिए इसे दिनचर्या का हिस्सा बनाया जाए तो जनधन की हानि को नियंत्रित किया जा सकता है.
घटनाओं को नजरअंदाज करने की प्रवृत्ति खतरनाक
मुख्यमंत्री ने घटनाओं को नजरअंदाज करने की प्रवृत्ति को खतरनाक बताया. उन्होंने प्रशिक्षण पर जोर देते हुए कहा कि 45 हजार होमगार्ड की भर्ती प्रक्रिया को पूरा किया जा रहा है. जिन आपदा मित्रों को प्रशिक्षण दिया गया है, उन्हें इस भर्ती में प्राथमिकता देंगे. होमगार्ड को भी आपदा मित्र का प्रशिक्षण अनिवार्य रूप से दिया जाएगा. यह फर्स्ट रिस्पांडर हैं. सरकार इन्हें अच्छी सुविधा, मानदेय, पांच लाख रुपये की कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा, घटना-दुर्घटना होने पर परिजनों को लगभग 35-40 लाख रुपये तथा मुख्यमंत्री राहत कोष से पांच लाख रुपये अतिरिक्त सहायता उपलब्ध कराती है. सीएम ने उम्मीद जताई कि सुविधाएं बोझ नहीं बननी चाहिए, बल्कि अपनी सेवा का बेहतर उपयोग समाज के लिए करना चाहिए.
सीएम का जागरूकता पर रहा जोर
सीएम ने कहा कि सामान्य व्यक्ति को भी जागरूकता के जरिए आपदा में राहत उपलब्ध करा सकें. जब आपदा न रहे, तब भी खुद की ट्रेनिंग के साथ ही स्कूलों-कॉलेजों के छात्रों/शिक्षकों व अवकाश के दिनों में जनपद स्तर पर प्रधानाचार्यों का सम्मेलन कर आपदा की सावधानियों से अवगत कराएंगे तो यह देश की बड़ी सेवा होगी.
सीएम ने मगरमच्छ की चपेट में आने से बच्चे की मौत पर जताया दुख
सीएम ने बाढ़, आकाशीय बिजली, अतिवृष्टि, अग्निकांड, भवन के धराशायी होने संबंधी प्राकृतिक व भौतिक आपदा की भी चर्चा की. उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश पहला राज्य है, जिसने मानव-वन्य जीव द्वंद्व को भी आपदा की श्रेणी में रखकर राहत देने का कार्य किया. सीएम ने दो दिन पहले बहराइच में हुई घटना पर दुख जताया. कहा कि 12 साल के बच्चे को मगरमच्छ ने निगल लिया. सभी लोग मगरमच्छ वाले संवेदनशील क्षेत्र के साथ ही यह भी जानते हैं कि वे पूरे जीवन में चार-पांच किमी. के दायरे में ही रहता है. ऐसे में जीव-जंतु से जबर्दस्ती खिलवाड़ न करें. सीएम ने दुख जताया कि ऐसी घटना के समय लोग वीडियो बनाते रहते हैं, लेकिन बचाव पर ध्यान नहीं देते.
4000 से अधिक लोग मानव-वन्य जीव द्वंद्व, 5000 लोग अन्य प्राकृतिक आपदा की चपेट में आए
सीएम ने बताया कि बिजनौर में दो वर्ष में 80 लैपर्ड रेस्क्यू किए गए हैं. यह गन्ने के खेत में अधिक पाए जा रहे हैं. लोगों ने उसे शुगर लैपर्ड नाम दिया है. जागरूक न होने पर लोग उसकी चपेट में आ जाएंगे. सीएम ने टाइगर व लैपर्ड के स्वभाव का अंतर बताते हुए कहा कि उसके खतरे वाले क्षेत्र को चिह्नित करके लोगों को अवगत कराएंगे तो बड़ी जनहानि रोकी जा सकती है. यूपी में 4000 से अधिक लोग मानव-वन्य जीव द्वंद्व, 5000 लोग अन्य प्राकृतिक आपदा की चपेट में आए हैं.
सीएम ने आकाशीय बिजली से बचाव के तरीके भी बताए
मुख्यमंत्री ने कहा कि आकाशीय बिजली की घटना में भी जान बचाई जा सकती है. इसके लिए उन्होंने तकनीक पर जोर दिया, कहा कि इसका उपयोग करके डेढ़-दो घंटे पहले भी बता सकते हैं कि कि किस एरिया में आकाशीय बिजली गिरने वाली है. उन्होंने कहा कि 40 साल पहले तकनीक नहीं थी, फिर भी बताया जाता था कि बादल नजदीक हों और लगता हो कि आपस में घने व विशेष रंग के हैं तो सावधानी बरतने की आवश्यकता है. ऐसे में खुले स्थान या पेड़ के न खड़ा होना है और न ही लोहे या कोई धातु की वस्तु लेकर चलना है, बल्कि पक्के भवन के नीचे शरण लेनी है.
एक ही घंटे में यूपी में हुई 111 मौत का दर्द भी झलका
सीएम के संबोधन में पिछले दिनों यूपी में एक ही एक घंटे में हुई 111 मौत का दर्द भी झलका. उन्होंने बताया कि फतेहपुर, प्रयागराज, कौशांबी, मीरजापुर, भदोही, जौनपुर, आजमगढ़, सुल्तानपुर, अंबेडकरनगर आदि जनपदों में कुल मिलाकर 111 लोगों की मौत हुई थी. प्राधिकरण की बैठक में चिंता व नाराजगी व्यक्त करते हुए सीएम ने कहा था कि इन मौतों को न्यूनतम करने में सहायता की जा सकती है. उन्होंने अर्ली वार्निंग सिस्टम को प्रभावी बनाने पर भी जोर दिया गया था. बैठक के ठीक तीसरे दिन एनडीआरएफ/एफडीआरएफ व राष्ट्रीय/राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने समन्वय से उस प्रक्रिया को आगे बढ़ाया.
अर्ली वार्निंग सिस्टम के कारण सहारनपुर में रोकी गई बड़ी जन-धनहानि
मुख्यमंत्री ने सहारनपुर में शिवालिक पहाड़ियों में रात में अचानक आई बारिश की घटना का भी वृतांत बताया. कहा कि उस समय शाकुंभरी मंदिर में हजारों लोग जागरण व भंडारा कार्यक्रम में थे. ऊपर से देखते ही देखते चार-पांच फुट पानी तेजी से नदियों में बढ़ गया, लेकिन इससे पहले अलर्ट आते ही प्रशासन ने सभी लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया. यदि इन लोगों को हटाया नहीं गया होता तो सैकड़ों जानें जा सकती थीं, लेकिन अर्ली वार्निंग सिस्टम के कारण मोबाइल घनघनाने लगे और सभी लोग जागरूक हो गए, जिससे बड़ी जन-धनहानि रोकी गई.
आपदा प्रबंधन से जुड़े बेहतरीन संस्थानों से समन्वय आवश्यक
सीएम ने कहा कि प्राधिकरण आपदा प्रबंधन से जुड़े बेहतरीन संस्थानों से समन्वय और एमओयू करे. हर तबके के लोगों को प्रशिक्षण से जोड़े. मीडिया के सभी प्लेटफॉर्म के जरिए भी जागरूकता फैलाए और सावधानी/सतर्कता के बारे में बताएं. सीएम ने जनपद, तहसील, थाना, विकास खंड, नगर निकायों में भी मॉकड्रिल को बढ़ाने पर जोर दिया, उन्होंने कहा कि सभी 17 नगर निगम एसडीएमए के उपकेंद्र के रूप में आपदा प्रबंधन के कार्यक्रम को बढ़ाएं. लगभग पांच लाख की आबादी वाली 200 से अधिक नगर पालिका परिषद में भी पहुंचें.
सीएम ने विभिन्न तकनीकों को प्रभावी बनाने पर दिया जोर
सीएम ने कहा कि आने वाले समय में तकनीक डे-वन डिजास्टर मैनेजमेंट को कैसे प्रभावी बनाने के लिए सेटेलाइट व रिमोट सेंसिंग मॉनीटरिंग, एआई पर आधारित रिस्क मैपिंग, प्रीडेक्टिव एनालिटिक्स आधारित अर्ली वार्निंग सिस्टम, मोबाइल बेस्ड सिटीजन अलर्ट सिस्टम, जीआईएस आधारित डिसिजन मेकिंग एंड डिजिटल कंट्रोल रूम, ड्रोन आधारित सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन का और अधिक इंटीग्रेट यूज बताया.
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इस अवसर पर वित्त व संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना, राजस्व राज्यमंत्री सुरेंद्र दिलेर, महापौर सुषमा खर्कवाल, सरोजिनी नगर क्षेत्र के विधायक राजेश्वर सिंह, प्राधिकरण के उपाध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल योगेंद्र डिमरी, प्रमुख सचिव (राजस्व) अपर्णा यू, पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्णा आदि मौजूद रहे.