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सुवेंदु सरकार का एक और तगड़ा एक्शन, बंगाल के 8 हजार मदरसों पर मंडराया बड़ी कार्रवाई का खतरा!

पश्चिम बंगाल सरकार ने अवैध और निजी मदरसों की जांच शुरू करने की तैयारी की है. फंडिंग, पाठ्यक्रम, शिक्षकों की योग्यता और अन्य गतिविधियों की जांच होगी. अनियमितता मिलने पर मदरसों को बंद किया जा सकता है, जबकि अवैध जमीन पर संचालित संस्थानों पर भी कार्रवाई संभव है.

Image Source: IANS
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उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ की सरकार ने जिस तरह से अवैध मदरसों के खिला कार्रवाई की, अब उस मॉडल को देश की अलग-अलग सरकार अपना रही है. इसी क्रम में पश्चिम बंगाल में भी मदरसों की जांच को लेकर हलचल तेज हो गई है. राज्य सरकार ने ऐसे मदरसों की जानकारी जुटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है जो निजी तौर पर संचालित हो रहे हैं या जिनकी कानूनी स्थिति स्पष्ट नहीं है. इस कदम को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस भी शुरू हो गई है.

फंडिंग की होगी जांच

सरकारी सूत्रों के अनुसार, प्रशासन का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि संबंधित मदरसों की फंडिंग कहां से हो रही है, वहां कौन-सा पाठ्यक्रम पढ़ाया जा रहा है, शिक्षकों की योग्यता क्या है और संस्थानों की गतिविधियां निर्धारित नियमों के अनुरूप हैं या नहीं. अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान यदि किसी प्रकार की गंभीर अनियमितता सामने आती है तो संबंधित मदरसों को बंद करने का आदेश भी दिया जा सकता है. जानकारी के मुताबिक सरकार शिक्षा से जुड़े मूलभूत ढांचे की भी समीक्षा करेगी. यह देखा जाएगा कि छात्रों को आवश्यक सुविधाएं मिल रही हैं या नहीं. यदि किसी मदरसे के बारे में यह पाया जाता है कि वह अवैध रूप से कब्जाई गई जमीन पर संचालित हो रहा है, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सकती है.

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अधिकारियों ने बताया संवेदनशील मामला

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सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि पूर्व की सरकारों के समय इस तरह का व्यापक डेटा एकत्र नहीं किया गया था. अधिकारियों ने इसे संवेदनशील विषय बताते हुए अधिक जानकारी देने से परहेज किया है. हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया है कि यदि किसी संस्थान में विदेशी फंडिंग या अन्य संदिग्ध गतिविधियों के प्रमाण मिलते हैं तो कार्रवाई करने में कोई ढील नहीं बरती जाएगी.

जिला प्रशासन को सौंपा गया जिम्मा

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इस मामले में जिला प्रशासन को भी सक्रिय कर दिया गया है. बताया जा रहा है कि पांच जून को जिलाधिकारियों को ऐसे मदरसों की सूची सौंप दी गई थी और उनसे पांच जुलाई तक विस्तृत रिपोर्ट देने के लिए कहा गया है. रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई का रास्ता साफ हो सकता है. साथ ही फंडिंग की जांच के लिए विशेष जांच दल यानी एसआईटी गठित किए जाने की भी चर्चा है. अनुमान है कि राज्य के करीब 8000 मदरसे इस जांच के दायरे में आ सकते हैं.

मदरसों की संख्या को लेकर नहीं हैं स्पष्ट आंकड़े

पश्चिम बंगाल में मदरसों की वास्तविक संख्या को लेकर लंबे समय से स्पष्ट आंकड़े सामने नहीं आए हैं. हालांकि प्रशासनिक सूत्रों का दावा है कि वर्ष 2015 के आसपास राज्य में लगभग 11000 मदरसे मौजूद थे. वर्ष 2014 में खागरागढ़ विस्फोट मामले की जांच के दौरान राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने कुछ खारिजी मदरसों को लेकर चिंता जताई थी. एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि कुछ स्थानों पर कट्टरपंथी विचारधारा के प्रसार की आशंका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.

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सरकारी मान्यता प्राप्त और गैर सहायता प्राप्त मदरसे

राज्य में ऐसे 601 मदरसे भी बताए जाते हैं जिन्हें सरकार से वित्तीय सहायता नहीं मिलती, लेकिन उनका पाठ्यक्रम सरकारी मानकों के अनुरूप स्वीकृत है. इसके अलावा सरकारी सहायता प्राप्त और पंजीकृत अन-ऐडेड मदरसे भी हैं जो पश्चिम बंगाल बोर्ड के नियमों के अनुसार संचालित होते हैं. इनमें सामान्य शिक्षा के साथ अरबी और धार्मिक अध्ययन भी कराया जाता है.

आखिर क्या हैं खारिजी मदरसे?

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खारिजी मदरसे वे संस्थान माने जाते हैं जिनका किसी औपचारिक शिक्षा बोर्ड से सीधा संबंध नहीं होता. इनका संचालन आमतौर पर मस्जिद समितियों, वक्फ संस्थाओं या उलेमा नेटवर्क के माध्यम से किया जाता है. इनका प्रमुख उद्देश्य धार्मिक शिक्षा देना और इस्लामिक विद्वान तैयार करना होता है.

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बताते चलें कि इसको लेकर अल्पसंख्यक संगठनों का आरोप है कि सरकार केवल मुस्लिम समुदाय के संस्थानों को निशाना बना रही है. दूसरी ओर सरकार का कहना है कि यह कार्रवाई किसी धर्म विशेष के खिलाफ नहीं बल्कि नियमों और पारदर्शिता को सुनिश्चित करने के लिए की जा रही है. अब सभी की निगाहें पांच जुलाई के बाद आने वाली रिपोर्ट और उसके आधार पर होने वाले सरकारी फैसलों पर टिकी हैं.

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