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'5 दिन के लिए भेजा, 10 दिन हो गए, जिंदा भी', NSA डोभाल ने सुनाया भारत की एक गलती और चीनी हिरासत में पहुंचने का किस्सा
NSA डोभाल ने चीन द्वारा उनके साथियों को पकड़े जाने, उनके छूटने, हेडक्वार्टर से फ़ोन आने और सरकार की एक गलती से खुफिया एजेंटों को चीनी हिरासत नें चले जाने का किस्सा सुनाया है, जो कि काफी वायरल हो रहा है.
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NSA अजित डोभाल का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है जिसमें वो कहते हैं कि जब वो यंग ऑफ़िसर थे तब कैसे उनके साथियों को दुश्मन ने अपने कब्जे में ले लिया था. इतना ही नहीं उन्होंने ये भी बताया कि कैसे जब उनके ऑफिसर्स चीनी कस्टडी में ले लिए गए और कैसे उन्हें हेडक्वार्टर से फ़ोन आया और इसी हवाले से सवाल कर लिया गया.
IIT रुड़की में दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए एनएसए डोभाल ने कहा कि ग्रेजुएट देश के विकास के एक बड़े बदलाव वाले दौर में कदम रख रहे हैं और आने वाले सालों में वे अलग-अलग सेक्टर में बड़े बदलाव देखेंगे. उन्होंने इस दौरान जिंदगी और करियर से सीखने के सवाल पर एक किस्सा सुनाया कि कैसे सिक्किम के भारत में विलय की प्रक्रिया के दौरान एक व्यक्तिगत चुनौती का सामना करना पड़ा
NSA डोभाल ने सुनाया खुफिया मिशन का किस्सा
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उन्होंने किस्सा सुनाते हुए कहा कि जब एक युवा IPS अफसर (20-29 की उम्र) थे. उनकी सिक्किम में इंटेलिजेंस (खुफिया विभाग) के प्रभारी के तौर पर तैनाती थी. उस समय सिक्किम पूरी तरह भारत का हिस्सा नहीं था, बल्कि इसके विलय की प्रक्रिया चल रही थी और मैं उस प्रक्रिया का हिस्सा था. मेरी जिम्मेदारी में सीमावर्ती इलाकों पर नज़र रखना और चीनी सेना (PLA) की गतिविधियों और उनके ठिकानों की खुफिया जानकारी जुटाना शामिल था.
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उन्होंने खुलासा किया कि कैसे उनकी टीम एक इंटेलिजेंस ऑपरेशन कर रही थी. जासूसी का काम बहुत ही गुप्त होता है. हमने कुछ लोगों को सीमा के उस पार भेजा था, लेकिन कुछ ही दिनों में उन्हें भी नहीं पता था कि वे लोग अब कहां हैं.
जब चीन ने पकड़ लिए भारतीय एजेंट!
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उन्होंने आगे स्वीकार किया कि मेरे लिए यह बहुत ही बड़ी चिंता की बात थी. सिर्फ पेशेवर तौर पर ही नहीं, बल्कि मानवीय तौर पर भी मुझे चिंता थी कि हमारे जो लोग वहां गए हैं, वे किस हाल में हैं, जिंदा भी हैं या नहीं. हमें वहां किसी बर्फीले तूफान की कोई खबर भी नहीं मिली थी. वह इलाका समुद्र तल से करीब 14-15,000 फीट की ऊंचाई पर था, इसलिए चिंता और बढ़ रही थी.
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जब NSA डोभाल को आया हेडक्वार्टर से फोन!
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तभी मुझे हेडक्वार्टर से फोन आया. मेरे बॉस ने पूछा, "क्या तुमने कुछ लोगों को उस पार भेजा है?" मैंने कहा, "हां, शायद वे वहां हैं." उन्होंने पूछा, "वे कहां हैं?" मैंने कहा, "मुझे नहीं पता, उन्हें 5-6 दिनों में लौट आना चाहिए था, लेकिन अब 10-11 दिन बीत चुके हैं." तब बॉस ने बताया कि वे लोग अब चीन की हिरासत में हैं.
भारत के मैप में गलती और चीनी हिरासत में पहुंच गए भारतीय एजेंट
NSA ने आगे कहा कि उनसे वहां पूछताछ की गई. खैर, बाद में वे वापस आ गए. शायद वरिष्ठ स्तर पर कोई बातचीत या समझौता हुआ, जिससे चीन ने उन्हें वापस भेज दिया. लेकिन जब वे लौटे, तो पूरी तरह से टूटे हुए और बदहाल थे. इसके बाद मामले की एक जांच (इन्क्वायरी) बिठाई गई. मुझे लगा कि बस, अब मेरे करियर का अंत हो गया. हालांकि मुझे इसकी ज्यादा परवाह नहीं थी क्योंकि मैं अभी जवान था और कोई नया करियर शुरू कर सकता था. लेकिन एक पेशेवर के तौर पर यह मेरे लिए बहुत निराशाजनक था. खैर, जांच पूरी हुई और मेरी कोई गलती नहीं पाई गई. दरअसल, हेडक्वार्टर ने हमें जो नक्शे (Maps) दिए थे, उन्हीं में गलतियां थीं.
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इस घटना के बाद मैं बहुत उदास रहने लगा. मेरा अब तक का करियर बहुत शानदार रहा था. मैं 'इंडियन पुलिस मेडल' पाने वाले सबसे युवा अफसरों में से एक था. मुझे वह मेडल अपनी 20-22 साल की उम्र में ही मिल गया था (मुझे लगता है कि यह रिकॉर्ड आज भी कायम है). सब कुछ बहुत अच्छा चल रहा था, इसलिए इस नाकामी ने मुझे अंदर से तोड़ दिया था और मैं इस नकारात्मक भावना के साथ नहीं रहना चाहता था.
अजित डोभाल को एक IB अफसर ने दी जिंदगी भर की सीख!
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तभी मेरे एक सहकर्मी, जो एक बुजुर्ग तिब्बती शेरपा थे और इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के लिए काम करते थे, मेरे पास आए. उनका नाम अंडवा था और वे काफी पढ़े-लिखे इंसान थे. उन्होंने बिना उचित ऑक्सीजन के आठ बार माउंट एवरेस्ट फतह किया था. उन्होंने मुझसे कहा, "सर, जब मैं इस नौकरी में आया था तो बहुत सी उम्मीदें थीं, लेकिन अब लगता है कि सब गलत हो गया."
उन्होंने मुझे समझाते हुए कहा, "सर, नक्शा पढ़ना भी एक कला है. कुछ लोग नक्शा सही पढ़ते हैं, कुछ गलत. मेरे 45 साल के तजुर्बे ने मुझे नक्शा और कंपास पढ़ना सिखाया है." फिर उन्होंने मुझे एक बहुत गहरी बात सिखाई. उन्होंने कहा: "एक नक्शे में सबसे ज़रूरी यह जानना है कि 'आप अभी कहां पर हैं' (In a map, know where you are)."
बाद में जब मैंने इस बात पर गहराई से विचार किया, तो पाया कि दुनिया का पूरा दर्शनशास्त्र (Philosophy) इसी एक सवाल का जवाब ढूंढने पर टिका है.
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शनिवार को कहा कि अगले दो दशकों में भारतीय अर्थव्यवस्था में जबरदस्त बढ़ोतरी होगी. उन्होंने कहा कि देश की जीडीपी मौजूदा स्तर (लगभग 4 ट्रिलियन डॉलर) से बढ़कर 38 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है.
NSA डोभाल ने भारत की इकोनॉमी पर कही बड़ी बात
NSA डोभाल ने कहा कि भारत में बड़े बदलाव हो रहे हैं और देश एक शानदार भविष्य की ओर बढ़ रहा है. उन्होंने आगे बताया कि भारत की मौजूदा जीडीपी 4.015 ट्रिलियन डॉलर है और अगले 20 सालों में इसके 38 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है.
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2047 में भारत की आजादी के 100 साल पूरे होने से पहले के समय के लिए सरकार के विजन का जिक्र करते हुए डोभाल ने कहा कि देश एक शानदार 'अमृत काल' से गुजर रहा है, जिसमें विकास और इनोवेशन के कई मौके हैं.
NSA ने छात्रों से अपनी पर्सनल और प्रोफेशनल जिंदगी में हिम्मत और पक्का इरादा दिखाने की भी अपील की. हिंदू पौराणिक कथाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने भगवान राम का उदाहरण दिया और कहा कि ऋषि विश्वामित्र ने बुराई का सामना करने के लिए उन्हें उनकी हिम्मत और मजबूत चरित्र की वजह से चुना था.
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इससे पहले, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अप्रैल-जून तिमाही में भारत की 7.8 प्रतिशत जीडीपी ग्रोथ का स्वागत किया. उन्होंने इसे वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, भू-राजनीतिक तनाव और सप्लाई चेन में रुकावटों के बावजूद देश की मजबूत आर्थिक बुनियाद और लोगों की सामूहिक कोशिशों का सबूत बताया.
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सरकार ने बार-बार 'अमृत काल' फ्रेमवर्क के तहत अपने लंबे समय के विकास एजेंडे के एक अहम आधार के तौर पर लगातार आर्थिक विस्तार का जिक्र किया है.