Advertisement

Loading Ad...
Loading Ad...

जिस 'जन-सुनामी' की तस्वीर से Modi-Shah को घर भेज रही थी Congress, NMF Fact Check में बेनकाब हुआ उसका असली खेल!

दिल्ली के रामलीला मैदान में 1 लाख की भीड़ या AI का खेल? कांग्रेस की 'जन-सुनामी' का NMF News पर सबसे बड़ा फैक्ट-चेक! सामने आया डेटा आपको हैरान कर देगा.

Image Source: X/ @KirenRijiju
Loading Ad...

दिल्ली के रामलीला मैदान में विपक्ष की महारैली हुई. इसका नेतृत्व राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी कर रही थी. इस रैली को लेकर कई दिनों से काफी हाइप बना हुआ था. चूंकि इसमें 20 विपक्षी दल शामिल हुए थे, इसलिए इसमें करीब 1 लाख लोगों के आने का दावा किया गया था. इस महारैली में आने वाली संभावित भीड़ की आशंका को लेकर दिल्ली के व्यापारी भी लगातार राहुल गांधी और सोनिया गांधी से अपील कर रहे थे कि इसे दीपावली के आगे कर दें, क्योंकि इससे हजारों करोड़ रुपये का धंधा चौपट होगा.

ऐसे में, इस रैली में आई भीड़ को लेकर तमाम तरह के दावे किए जा रहे हैं. कांग्रेसी कार्यकर्ताओं, विभिन्न वेबसाइट्स और सोशल मीडिया की ओर से एक तस्वीर लगातार शेयर की जा रही है और इसके जरिए लोगों का मूड बताने की कोशिश की जा रही है कि सरकार के लिए खतरे की घंटी बज चुकी है. कई जगह इस तस्वीर को शेयर कर इसे 'जन-सुनामी' करार दिया जा रहा है.

इन सबके बीच बीजेपी भी सवाल उठा रही है कि क्या हुआ, 1 लाख की भीड़ का दावा किया जा रहा था, लेकिन 50 हजार की भीड़ भी नहीं आई. ऐसे में सोशल मीडिया पर एक तस्वीर के जरिए यह दावा किया जा रहा है कि कांग्रेस-विपक्ष की रैली में लाखों लोगों का जनसैलाब उमड़ पड़ा. विपक्षी हैंडल्स सबूत के तौर पर ड्रोन फुटेज, टॉप एंगल की तस्वीरें और खचाखच भरी भीड़ के विजुअल्स शेयर कर रहे हैं. वहीं, केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू की ओर से इस तस्वीर को फेक और AI जेनरेटेड (AI Generated) करार दिया गया है.

Loading Ad...

ऐसे में यह सवाल उठता है कि क्या रामलीला मैदान में सच में लाखों लोगों की भीड़ आई थी, जैसा कि फोटो में दिख रहा है या दिखाने की कोशिश की जा रही है? क्या है इस तस्वीर की असली सच्चाई? क्या रामलीला मैदान में 10 लाख लोग आ सकते हैं? रामलीला मैदान में असल में कितनी कुर्सियां लगवाईं गई थीं?

Loading Ad...

ऐसे में इस पूरे मामले की पड़ताल करनी जरूरी हो गई थी. NMF News की Fact Check टीम ने इसकी सच्चाई खंगालनी शुरू की. हमने विभिन्न सोशल मीडिया हैंडल्स के दावे देखे. कांग्रेस और विपक्षी नेताओं के हैंडल्स को भी बारीकी से देखा. इसके साथ-साथ NMF News ने जब इन तस्वीरों को खासकर जिसे किरेन रिजिजू ने शेयर कर विपक्ष के दावों पर तंज कसा था अपनी 'फैक्ट-चेक टूलकिट' में डाला, तो जो सच सामने आया...वो आपको हैरान कर देगा!

1. Mapchecking.com का डेटा पर खुला भीड़ के गणित का राज

सबसे पहले हमारी टीम ने Mapchecking.com के डेटा को खंगाला और रामलीला मैदान के स्पेस और बाउंड्री के गणित को परखा. अगर इसके अनुसार कैलकुलेशन निकालें, तो अगर 1 स्क्वायर मीटर में 3 लोग (यानी बेहद सघन भीड़) भी खड़े हों, तो रामलीला मैदान की अधिकतम क्षमता 50 से 60 हज़ार के बीच ही बैठती है. तो फिर 10 लाख लोग कहां खड़े थे? जबकि NMF News के डेटा और हमारे ऑन-ग्राउंड रिपोर्टर ने रैली की शुरुआत में जो देखा और कैमरे में कैप्चर किया, उसमें मैदान में सैकड़ों कुर्सियां खाली ही पड़ी थीं. ऐसे में 1 लाख की भीड़ और 'जन-सुनामी' का पहला दावा यहीं धड़ाम हो गया.

Loading Ad...

2. रिवर्स इमेज सर्च की पड़ताल

इसके बाद हमने इस वायरल तस्वीर को Google Lens पर देखा. जब उसे रिवर्स सर्च करके देखा गया, तो हमें इंटरनेट पर कई तस्वीरें मिलीं. हालांकि, इस दौरान दो खास तस्वीरें 'Chambal Breaking 28' के फेसबुक पेज पर मिलीं, जहां पर यही तस्वीर शेयर कर लिखा गया था कि- "दिल्ली का रामलीला मैदान धीरे-धीरे भरता जा रहा है. इंडिया गठबंधन की अपील के बाद दिल्ली के रामलीला मैदान में देश भर से लाखों लोग इकट्ठा होने लगे हैं. भारी बारिश और मैदान में कीचड़ होने के बावजूद लोगों में जोश भरा हुआ है. लोकतंत्र को बचाने के लिए लाखों लोग इस मैदान में जुटेंगे."

Loading Ad...

वहीं, बिल्कुल इसी तरह का एक पोस्ट 'East Northeast Connect' के फेसबुक पेज पर भी मिला, जिसमें सेम (वही) फोटो 1 नवंबर को रात 8:20 बजे पोस्ट हुई थी, जिसका कैप्शन दिया गया था- "Protest at Ramlila Maidan, Delhi, against Chief Election Commissioner (CEC) Gyanesh Kumar".

3. ड्रोन फुटेज की चालाकी

Loading Ad...

वहीं, ड्रोन फुटेज की चालाकी यानी कि 'स्पेशियल एनालिसिस' करने पर, खासकर राहुल गांधी के भाषण के वक्त सेलेक्टिव फ्रेमिंग और क्लोजअप को देखने पर पता चला कि कैमरे के जरिए जानबूझकर आधी भीड़ दिखाई गई. मंच के करीब बैठी भीड़ पर ही ज्यादा फोकस किया गया ताकि वीडियो में भीड़ ज्यादा से ज्यादा दिखे. वीडियो में 'टेलीफोटो लेंस' से टाइट-फ्रेमिंग की गई है, जो सिर्फ मंच के सामने की भीड़ को ही दिखा रहा है. जैसे ही उस फुटेज को हमने NMF News के वीडियो से मैच किया, तो पता लगा कि मैदान के पिछले हिस्से में सैकड़ों कुर्सियां पूरी तरह से खाली पड़ी नजर आ रही थीं.

4. मैनुअल विजुअल चेकिंग

इसके बाद हमने वायरल तस्वीर की मैनुअल विजुअल चेकिंग की. इसमें पहली ही नजर में यह तस्वीर AI क्रिएटेड (AI Created) लग रही है. सबसे पहले तो यह पकड़ में आया कि तस्वीर में जो मंच दिख रहा है वो ओपन (खुला हुआ) है, जबकि 1 नवंबर को जो असली रैली हुई थी, उसमें मंच क्लोज्ड (कवर किया हुआ) था.

Loading Ad...

गलत स्पेलिंग और AI की कमियां: मंच पर लगे मुख्य बैनर को ध्यान से अगर देखें, तो साफ-साफ पता चलता है कि या तो यह तस्वीर फर्जी है या फिर इसके साथ छेड़छाड़ हुई है. इस बैनर पर "रामलीला मैदान, दिल्ली" लिखा होना चाहिए, लेकिन AI ने "दिल्ली" की स्पेलिंग गलत कर दी है, जो देखने में "दिल्ती" या "हिल्ली" जैसा लग रहा है. AI जनरेटेड तस्वीरों में टेक्स्ट की लिखावट अक्सर गलत होती है. वहीं, बैनर पर राहुल गांधी और सोनिया गांधी की तस्वीर भी थोड़ी भारी और अजीब दिख रही है.

यही नहीं, सभी बैनर में सोनिया गांधी और कांग्रेस नेताओं के मेल्टेड फेस (पिघले हुए चेहरे) दिख रहे हैं. झंडों पर कांग्रेस का निशान भी स्पष्ट नहीं है, बल्कि आकृति कटी हुई है. जिन लोगों ने झंडे पकड़े हुए हैं, उनके हाथ भी स्पष्ट नहीं हैं और उंगलियां आपस में मिली हुई (गुंथी हुई) हैं. कुछ झंडे तो ऐसे लग रहे हैं जैसे बिना किसी डंडे के हवा में तैर रहे हों. भीड़ के बीच खंभों पर लगे राहुल गांधी के छोटे पोस्टर भी धुंधले और अजीब भारी-भरकम दिख रहे हैं. इसके अलावा मंच पर खड़े लोगों की तस्वीर भी बैकग्राउंड के साथ पूरी तरह मिक्स हो गई है.

इन सबको बारीकी से देखने के बाद साफ पता चलता है कि यह तस्वीर जानबूझकर AI से बनाई गई है और फिर पोस्ट की गई है. हां, ऐसा भी नहीं है कि असली तस्वीर की थीम, करेक्टनेस और रेज्योलुशन को बढ़ाने के लिए AI का इस्तेमाल किया गया हो, बल्कि इसे बनाया ही पूरी तरह से AI के जरिए गया है.

Loading Ad...

5. आखिरी हथियार: Hive Moderation & Illuminarty
इसके बाद हमने अपने आखिरी हथियार के रूप में Hive Moderation और Illuminarty टूल का इस्तेमाल किया. इन टूल्स में कोई भी तस्वीर अपलोड करने के बाद आपको पता चल जाता है कि तस्वीर कितने प्रतिशत AI से बनी है या फेक है. इसमें इस वायरल तस्वीर को वेरिफाई (Verify) करने के बाद पता चला कि यह तस्वीर 99.6% फेक या AI जनरेटेड है.

यह भी पढ़ें

LIVE
अधिक →

Advertisement

Loading Ad...
Loading Ad...
Loading Ad...
Loading Ad...