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योगी की पाती: एजुकेशन, एनफोर्समेंट, इंजीनियरिंग & इमरजेंसी केयर...रोड सेफ्टी के लिए मुख्यमंत्री ने दिया 4E मॉडल, ट्रैफिक रूल्स के अनुपालन की अपील

Yogi Ki Paati: CM योगी ने प्रदेश की जनता के नाम 'योगी की पाती' लिखी है. इसमें सीएम ने सड़क दुर्घटनाओं में हो रही जनहानि पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए आमजन से यातायात नियमों का सख्ती से पालन करने की अपील की है. उन्होंने इस दौरान रोड सेफ्टी और एक्सीडेंट्स को रोकने को लेकर किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी है.

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12 Jan 2026
( Updated: 12 Jan 2026
11:25 AM )
योगी की पाती: एजुकेशन, एनफोर्समेंट, इंजीनियरिंग & इमरजेंसी केयर...रोड सेफ्टी के लिए मुख्यमंत्री ने दिया 4E मॉडल, ट्रैफिक रूल्स के अनुपालन की अपील
उत्तर प्रदेश की जनता के नाम आई 'योगी की पाती'

यूपी में सीएम योगी के नेतृत्व में योगी सरकार रोड सेफ्टी पर विशेष ध्यान रहा है. चाहे वो सड़क के गड्डों को तय समय के अंदर भरना हो, अच्छी सड़कों का जाल हो, यातायात नियमों का अनुपालन हो या फिर जन जागरुकता अभियान चलाना हो. सरकार पूरी कोशिश कर रही है कि रोड एक्सीडेंट में जाने वाली जानों को हर कीमत पर बचाया जाए. इसी को देखते हुए योगी सरकार प्रदेश में 01 से 31 जनवरी, 2026 तक प्रदेशव्यापी सड़क सुरक्षा अभियान चला रही है. इसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का 4-E मॉडल यानी एजुकेशन, एनफोर्समेंट, इंजीनियरिंग और इमरजेंसी केयर पर विशेष फोकस किया जा रहा है. इसी को लेकर मुख्यमंत्री ने अपनी योगी की पाती लिखी है और आम लोगों से बड़ी अपील की है.

सड़क दुर्घटनाओं को रोकने लेकर आई सीएम योगी की पाती!

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों को संबोधित करते हुए पत्र में लिखा, "सड़क दुर्घटनाओं से होने वाली जनहानि देख मुझे अत्यंत दुख होता है. लापरवाही से वाहन चलाने और यातायात नियमों की अनदेखी के कारण हम हर वर्ष हजारों लोगों को खो देते हैं. ऐसी दुर्घटनाओं में स्वस्थ लोगों की अकाल मृत्यु अपने पीछे शोक संतप्त परिवार छोड़ जाती है. सामूहिक दायित्व एवं सजगता से इस स्थिति को बदला जा सकता है."

 31 जनवरी तक 'सड़क सुरक्षा माह

सीएम योगी ने कहा कि 31 जनवरी तक हम प्रदेश भर में 'सड़क सुरक्षा माह आयोजित कर रहे हैं. यह हमारे परिवारों और भविष्य की रक्षा का संकल्प है. हमारा लक्ष्य वाहन चालकों और पैदल यात्रियों के सड़क-व्यवहार में परिवर्तन लाना है. सड़क दुर्घटनाओं से होने वाली मृत्यु दर को शून्य स्तर पर लाने के लिए प्रदेश के 20 दुर्घटना-संवेदनशील जनपदों में विशेष अभियान चलाया जा रहा है. राज्य भर की सड़कों पर 3 हजार से अधिक ऐसे स्थानों को चिह्नित किया गया है, जहां दुर्घटना की आशंका बनी रहती है. इस अभियान को 5 बिंदुओं के आधार पर संचालित किया जा रहा है- शिक्षा, प्रवर्तन, इंजीनियरिंग और आपात देखभाल.

यातायात नियमों के पालन की अपील

उन्होंने कहा कि प्रदेश की सड़कें सभी के लिए सुगम-सुरक्षित हों, इसके लिए पुलिस तो नियमों को कड़ाई से लागू करेगी ही, परंतु सभी का सहयोग भी अपेक्षित है. वाहन चलाते समय मोबाइल फोन का उपयोग आपके साथ-साथ किसी और के जीवन पर भी भारी पड़ सकता है. गति सीमा का पालन करें. तीव्र गति और नशे में गाड़ी चलाना घातक दुर्घटनाओं के सबसे प्रमुख कारणों में सम्मिलित है. हेलमेट और सीट बेल्ट दिखावे की वस्तुएं नहीं हैं.

उन्होंने आगे कहा कि ये आपकी और आपके परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करती हैं. माता-पिता का दायित्व है कि नाबालिग बच्चे वाहन न चलाएं. पैदल चलने वालों का अत्यधिक ध्यान रखें और उनके प्रति संवेदनशील रहें. स्मरण रहे, सड़क पर उनका भी उतना ही अधिकार है. सीएम योगी ने पत्र के अंत में कहा कि मुझे पूरा विश्वास है कि प्रदेश की सड़कों को सुगम-सुरक्षित बनाने के लिए आप यातायात नियमों का पालन करेंगे.

आपको बताएं कि योगी सरकार रोड सेफ्टी और सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए विशेष उपाय और नीतियां अपना रही है. इसके लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का 4-E मॉडल यानी एजुकेशन, एनफोर्समेंट, इंजीनियरिंग और इमरजेंसी केयर पर विशेष फोकस है. पूरी सरकार और प्रशासन इन मानकों के तहत आम लोगों की यातायात सुरक्षा सुनिश्चित कर रही है.

इससे पहले भी CM योगी ने सड़क सुरक्षा को लेकर सख्त दिशा निर्देश दिए थे. मुख्यमंत्री ने सड़क पर खुद की और दूसरों की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के आदेश दिए थे. उन्होंने दो टूक कह रखा है कि ट्रैफिक रूल्स के उल्लंघन पर केवल चालान कर देना समस्या का समाधान नहीं है, बल्कि आदतन नियम तोड़ने वालों के लाइसेंस जब्त करने और वाहन सीज करने की सख्त नीति लागू की जाए. मुख्यमंत्री ने इस दौरान कहा कि वर्ष 2025 में 46 हजार से अधिक दुर्घटनाएं और 24 हजार से ज्यादा मौतें गंभीर चेतावनी की ओर संकेत कर रही हैं. उन्होंने आगे कहा कि एक भी मृत्यु पूरे परिवार के लिए आजीवन पीड़ा है.

नवंबर 2025 तक सड़क दुर्घटनाओं में गई 24,776 लोगों की जान

आपको बता दें कि वर्ष 2025 में नवंबर तक प्रदेश में कुल 46,223 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गई हैं, जिनमें 24,776 लोगों की मृत्यु हुई है. मुख्यमंत्री ने इन आंकड़ों को अत्यंत गंभीर बताते हुए कहा कि सड़क दुर्घटनाएं केवल प्रशासनिक या तकनीकी समस्या नहीं हैं, बल्कि यह एक बड़ी सामाजिक चुनौती है. उन्होंने कहा कि एक भी दुर्घटना में किसी व्यक्ति की मृत्यु पूरे परिवार को जीवन भर का दर्द दे जाती है और इस पीड़ा को वही परिवार समझ सकता है. इसी दृष्टिकोण से सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए संवेदनशीलता के साथ-साथ कठोर निर्णय लेना भी आवश्यक है.

चालान काटने के अलावा हो स्थायी समाधान: CM योगी

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को दो टूक कहा है कि केवल चालान करना सड़क दुर्घटनाओं का स्थायी समाधान नहीं है. बीते दिनों उन्होंने निर्देश दिए कि जो लोग आदतन यातायात नियमों का उल्लंघन करते हैं, उनके विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए. ऐसे मामलों में ड्राइविंग लाइसेंस जब्त करने और वाहन सीज करने की स्पष्ट नियमावली तैयार कर उसका सख्ती से पालन कराया जाए. CM योगी का मानना है कि सड़क सुरक्षा के मामलों में कठोरता अनिवार्य है, क्योंकि यह सीधे तौर पर लोगों की जान से जुड़ा विषय है.

रोड एक्सीडेंट के कारकों पर करें फोकस: CM योगी

मुख्यमंत्री ने बीते महीने सड़क दुर्घटनाओं के प्रमुख कारकों पर विस्तार से चर्चा करते हुए ब्लैक स्पॉट और क्रिटिकल पॉइंट की पहचान कर उनके त्वरित और स्थायी सुधार के निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि सड़क इंजीनियरिंग की कमियां, खराब साइनज, अव्यवस्थित कट, अंधे मोड़ और अनुचित स्पीड ब्रेकर दुर्घटनाओं को बढ़ाते हैं. लोक निर्माण विभाग तथा अन्य रोड-ओनिंग एजेंसियां समयबद्ध ढंग से सुधार कार्य सुनिश्चित करें. उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल टेबल-टॉप स्पीड ब्रेकर ही बनाए जाएं और सभी सड़कों का नियमित रोड सेफ्टी ऑडिट कराया जाए.

एम्बुलेंस और स्कूल वाहनों की फिटनेस जांच के निर्देश

इतना ही नहीं मुख्यमंत्री ने एम्बुलेंस सेवाओं और स्कूल वाहनों की फिटनेस की विशेष जांच कराने के निर्देश दिए हुए हैं. उनका साफ निर्देश है कि किसी भी स्थिति में अनफिट वाहन सड़क पर न चलें. इसके साथ ही 300 किलोमीटर से अधिक दूरी की यात्रा करने वाले बड़े यात्री वाहनों में एकल चालक की व्यवस्था समाप्त कर अनिवार्य रूप से दो चालकों की तैनाती सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि चालक की थकान से होने वाली दुर्घटनाओं को रोका जा सके. उन्होंने ओवर-स्पीडिंग रोकने के साथ-साथ लेन ड्राइविंग के प्रति भी आमजन को जागरूक करने पर बल दिया तथा एक्सप्रेसवे पर पेट्रोलिंग, एम्बुलेंस और क्रेन की संख्या बढ़ाने के निर्देश दिए.

गोल्डन ऑवर में उपचार सुनिश्चित करने पर CM योगी का जोर

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मुख्यमंत्री ने दिसंबर में सड़क सुरक्षा माह को लेकर कई गई बैठक में आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं को और सुदृढ़ करने पर विशेष बल देते हुए कहा था कि सड़क दुर्घटना में जितनी जल्दी घायल को चिकित्सकीय सहायता मिलती है, क्षति की संभावना उतनी ही कम होती है. उन्होंने गोल्डन ऑवर की महत्ता को रेखांकित करते हुए निर्देश दिए कि ट्रॉमा सेंटर की सुविधा वाले निजी अस्पतालों को भी सड़क दुर्घटना पीड़ितों के उपचार से जोड़ा जाए. गृह, परिवहन, लोक निर्माण, एक्सप्रेसवे प्राधिकरण, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य तथा चिकित्सा शिक्षा विभाग आपसी समन्वय से ऐसा प्रभावी नेटवर्क तैयार करें, जिससे घायल व्यक्ति को शीघ्र उपचार मिल सके. उन्होंने निर्देश दिए कि 108 और एएलएस एम्बुलेंस सेवाओं का रिस्पॉन्स टाइम और कम किया जाए.

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