योगी सरकार का एक्शन प्लान, UP में 112 पर कॉल करते ही मिलेगी सटीक लोकेशन, मिनटों में पहुंचेगी पुलिस
UP: इस तकनीक के शुरू होने से डायल-112 पर कॉल करने वाले व्यक्ति की सटीक लोकेशन अपने आप पुलिस तक पहुंच जाएगी और पुलिस पहले से कहीं ज्यादा तेजी से मौके पर पहुंच सकेगी.
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UP Police Dial 112 Service: सीएम योगी का प्रदेश उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में यूपी-112 लगातार नए कदम उठा रहा है. अब यूपी-112 की पीआरवी (पुलिस रिस्पॉन्स व्हीकल) के रिस्पांस टाइम को और कम करने के लिए एक नई और आधुनिक तकनीक शुरू की जा रही है. इसके तहत पीआरवी वाहनों में गूगल की मदद से एंड्रॉयड इमरजेंसी लोकेशन सर्विस (ELS) तकनीक को लागू किया जा रहा है. इस तकनीक के शुरू होने से डायल-112 पर कॉल करने वाले व्यक्ति की सटीक लोकेशन अपने आप पुलिस तक पहुंच जाएगी और पुलिस पहले से कहीं ज्यादा तेजी से मौके पर पहुंच सकेगी.
पहले कैसी मिलती थी लोकेशन, अब क्या बदलेगा
अब तक जब कोई व्यक्ति 112 पर कॉल करता था, तो उसकी लोकेशन लगभग एक से डेढ़ किलोमीटर के दायरे में ही मिल पाती थी. इतनी बड़ी दूरी होने के कारण पीआरवी को सही जगह तक पहुंचने में समय लग जाता था. कई बार कॉलर को फोन पर बार-बार समझाना पड़ता था कि वह किस जगह है. लेकिन अब नई ELS तकनीक के आने से कॉल करने वाले की लोकेशन सिर्फ 10 से 20 मीटर के दायरे में मिल सकेगी. यानी पुलिस को लगभग बिल्कुल सही जगह की जानकारी मिल जाएगी, जिससे समय की बचत होगी और मदद जल्दी पहुंचेगी.
कॉलर भी कर सकेगा पीआरवी को ट्रैक
इस नई व्यवस्था की एक खास बात यह भी है कि अब कॉल करने वाला व्यक्ति खुद भी पीआरवी वाहन को ट्रैक कर सकेगा. यानी उसे यह पता रहेगा कि पुलिस उसकी मदद के लिए कहां तक पहुंची है. इससे पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी और जवाबदेही भी बढ़ेगी. आम लोगों का भरोसा पुलिस व्यवस्था पर और मजबूत होगा क्योंकि उन्हें यह एहसास रहेगा कि उनकी शिकायत को गंभीरता से लिया जा रहा है.
कानून व्यवस्था में यूपी-112 की अहम भूमिका
उत्तर प्रदेश में किसी भी आपात स्थिति में आम लोग सबसे पहले डायल-112 पर ही कॉल करते हैं. चाहे दुर्घटना हो, झगड़ा हो, चोरी-डकैती की घटना हो या कोई अन्य परेशानी, यूपी-112 तुरंत सक्रिय हो जाता है. कॉल मिलते ही नजदीकी पीआरवी वाहन को सूचना दी जाती है और वह मौके पर पहुंचकर पीड़ित की मदद करता है। यही वजह है कि यूपी-112 आज राज्य की कानून-व्यवस्था का एक मजबूत आधार बन चुका है.
शहर और गांव में पीआरवी की तैनाती
जनपद के अलग-अलग इलाकों में करीब 36 पीआरवी वाहन संचालित किए जा रहे हैं. इन वाहनों के लिए पहले से ही प्वाइंट और क्षेत्र तय किए गए हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर वे जल्दी पहुंच सकें.शहरी क्षेत्रों में आमतौर पर पीआरवी वाहन 5 से 7 मिनट के अंदर मदद के लिए पहुंच जाते हैं, जबकि ग्रामीण इलाकों में यह समय लगभग 6 से 7 मिनट रहता है. नई तकनीक के लागू होने के बाद यह समय और कम होने की उम्मीद है.
तकनीक के सहारे बेहतर पुलिसिंग
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पुलिस अधीक्षक मोहम्मद मुश्ताक ने बताया कि यूपी-112 के रिस्पांस टाइम को कम करने के लिए समय-समय पर पीआरवी कर्मियों को दिशा-निर्देश दिए जाते हैं. अब इसके साथ-साथ आधुनिक तकनीक का भी सहारा लिया जा रहा है. एंड्रॉयड इमरजेंसी लोकेशन सर्विस जैसी तकनीक से पुलिस को कॉलर की सटीक लोकेशन तुरंत मिल जाएगी और सहायता बिना किसी देरी के पहुंचाई जा सकेगी.यूपी-112 को और तेज़, स्मार्ट और भरोसेमंद बनाने की यह पहल आम जनता की सुरक्षा के लिए एक बड़ा और सकारात्मक कदम साबित होगी.
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