Advertisement

Loading Ad...
Loading Ad...

‘तेल की एक बूंद गुजरने नहीं देंगे…’, ट्रंप की धमकी पर ईरान का पलटवार, भारत पर होगा आर्थिक असर!

अमेरिका के साथ-साथ ईरान ने पड़ोसी देशों को चेतावनी दी कि वे उनके देश के खिलाफ अमेरिका के 'आर्थिक दबाव अभियान' में शामिल न हों.

Image Source- IANS
Loading Ad...

ईरान और अमेरिका के बीच के तनाव ने दुनिया के कई देशों में तेल आपूर्ति को बाधित कर दिया है. होर्मुज पर चल रही जंग के कारण एक बार फिर तेल के दाम आसमान छू सकते हैं. क्योंकि ईरान ने अमेरिका को खुली धमकी दी है कि अगर वो अमेरिका का आर्थिक युद्ध जारी रहा तो होर्मुज स्ट्रेट के साथ साथ फारस की खाड़ी और मध्य पूर्व के दूसरे इलाकों से तेल के निर्यात को पूरी तरह से ठप कर दिया जाएगा. 

अमेरिका के साथ-साथ ईरान ने पड़ोसी देशों को चेतावनी दी कि वे उनके देश के खिलाफ अमेरिका के 'आर्थिक दबाव अभियान' में शामिल न हों. ईरान के एक अधिकारी ने साफ किया कि तेहरान ऐसे देशों को 'दुश्मन' मानेगा. 

तो तेल की आवाजाही रोक देगा ईरान...

Loading Ad...

ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सेक्रेटरी मोहसेन रेजाई ने सरकारी आईआरआईबी टीवी को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि ईरान सबसे पहले उन देशों से बातचीत करेगा जो इसमें शामिल हैं और उनसे अपील करेगा कि वे ईरान के खिलाफ अमेरिका की 'आर्थिक जंग' में हिस्सा न लें. 

Loading Ad...

उन्होंने कहा कि अगर वे देश ऐसा करना जारी रखते हैं, तो ईरान उनके हितों को निशाना बनाएगा. उन्होंने यह भी कहा कि अगर क्षेत्रीय देश अमेरिका के 'दबाव अभियान' का समर्थन करते हैं तो तेहरान होर्मुज और फारस की खाड़ी से तेल के निर्यात की इजाजत नहीं देगा. 

कब तक बंद रहेगा होर्मुज? 

Loading Ad...

सिन्हुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, रेजाई ने यह भी कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज तब तक बंद रहेगा जब तक अमेरिका जून में तेहरान और वाशिंगटन के बीच हुए शांति समझौते (एमओयू) के तहत अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा नहीं कर लेता.

उनका ये बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस घोषणा के बाद आया. जिसमें उन्होंने ईरान को जीवन रेखा (लाइफलाइन) देने वाले किसी भी देश के खिलाफ 'अब तक का सबसे कठोर आर्थिक अभियान' चलाने की बात कही थी. 

ट्रंप ने क्या धमकी दी थी? 

Loading Ad...

ट्रंप ने 'ट्रुथ सोशल' पर पोस्ट किया था, ‘यह अभूतपूर्व स्तर पर आर्थिक युद्ध और अलगाव होगा.’ इस बीच, ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कहा कि ईरान के खिलाफ अमेरिका का आर्थिक अभियान भी देश के खिलाफ उसके अन्य जबरदस्ती वाले कदमों की तरह ही विफल होगा. 

अराघची का ट्रंप को जवाब 

अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट किया, ’14 साल पहले 'इतिहास के सबसे कठोर प्रतिबंध' विफल रहे, 8 साल पहले 'अधिकतम दबाव' विफल रहा, 5 महीने पहले 'बिना शर्त आत्मसमर्पण' विफल रहा, आज 'अब तक का सबसे कठोर आर्थिक अभियान' का विफल होना तय है.’

Loading Ad...

इससे पहले, कानूनी और अंतरराष्ट्रीय मामलों के लिए ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने कहा था कि अमेरिका अब 'आर्थिक युद्ध' के नाम पर ईरान पर और दबाव डाल रहा है. जिसे वह वाशिंगटन की पिछली विफलता को छिपाने की कोशिश के तौर पर देखते हैं. 

ईरान की आधिकारिक समाचार एजेंसी आईआरएनए की रिपोर्ट के अनुसार, गरीबाबादी ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि जहां अमेरिका दावा करता है कि ईरान 'पतन के कगार पर है', वहीं वह मदद के लिए अपने सभी सहयोगियों से संपर्क कर रहा है.

भारत पर क्या होगा असर? 

Loading Ad...

होर्मुज पर तनाव के चलते कई देशों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है. अब ईरान की नई धमकी के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी खतरा मंडरा सकता है, क्योंकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण अहम तेल मार्ग है और इस रास्ते से भारत अपनी जरूरत का लगभग 45% कच्चा तेल आयात करता है. 

यह भी पढ़ें- चीनी के दाम क्यों बढ़े? इथेनॉल नहीं, ये 2 वजहें जिम्मेदार; विपक्ष के आरोप पर सरकार ने दिया जवाब

यह भी पढ़ें

28 फरवरी को जंग शुरू होने के बाद होर्मुज बंद रहा. जिसका सीधा असर भारत समेत कई देशों में तेल और गैस आपूर्ति पर पड़ा. LPG के लिए लोग लाइन में लगे दिखे. कई देशों में तो तेल और गैस के दाम तीन गुना तक बढ़े. हालांकि ईरान ने भारत जैसे मित्र देशों को होर्मुज से निकलने की छूट दी है, लेकिन अमेरिका के बढ़ते दबाव और धमकियों के बीच भारत के लिए भी आर्थिक राह जोखिम भरी हो सकती है. 

LIVE
अधिक →

Advertisement

Loading Ad...
Loading Ad...
Loading Ad...
Loading Ad...
अधिक →

Advertisement

Loading Ad...
Loading Ad...