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क्या है ‘हरामी नाला’? BSF के लिए सबसे चुनौतीपूर्ण इलाकों में से एक, अमित शाह करेंगे दौरा
दुश्मन देश भारत में घुसपैठ की कोशिश के लिए इस मार्ग को इसलिए चुनता है, क्योंकि यहां रास्ता बदलता रहता है, जिस कारण यहां नेविगेट करना बेहद जोखिम भरा हो जाता है. पानी की गहराई और दिशा ज्वार-भाटा के कारण लगातार बदलती रहती है.
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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह अपने दो दिवसीय गुजरात दौरे में एक दर्जन से ज्यादा कार्यक्रमों में शामिल होने वाले हैं, लेकिन खास चर्चा पाकिस्तान के साथ अंतरराष्ट्रीय सीमा पर स्थित 'हरामी नाला' बॉर्डर आउटपोस्ट की हो रही है. आखिर क्या है 'हरामी नाला' और यहां गृह मंत्री का दौरा क्यों महत्वपूर्ण है? आइए जानते हैं...
28-29 मई को अपने गुजरात दौरे पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह
अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, 28-29 मई को अपने गुजरात दौरे के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह यहां का निरीक्षण करने आ रहे हैं. इस दौरान शाह यहां के कंट्रोल रूम में खास तरह के सर्विलांस कैमरों की फुटेज की समीक्षा भी करेंगे.
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पाकिस्तानी इसी रास्ते से भारत में आतंकवाद फैलाने के मौके ढूंढ़ते है
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अमित शाह का यह दौरा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह एक बेहद संवेदनशील खाड़ी (क्रीक) क्षेत्र है. यह भारत-पाकिस्तान सीमा के बेहद संवेदनशील इलाके में आता है. यह कच्छ जिले में भुज के पास स्थित है. यह उथला और दलदली क्षेत्र है, जिसकी निगरानी करना काफी मुश्किल है. इसी का फायदा उठाकर दुश्मन देश पाकिस्तान यहां अपनी नापाक हरकतों को अंजाम देने के प्रयास में रहता है. पाकिस्तानी इसी रास्ते से भारत में आतंकवाद फैलाने के मौके तलाशता रहता है. साथ ही, यह इलाका तस्करों के लिए भारतीय सीमा में प्रवेश करने का एक आसान मार्ग माना जाता है.
बीएसएफ के जवान यहाँ घुसपैठ को रोकने के लिए 24 घंटे करते है गश्त
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यह क्षेत्र 96 किलोमीटर लंबी विवादित सरक्रीक समुद्री सीमा का एक प्रमुख हिस्सा है. अपनी भौगोलिक स्थिति, सुरक्षा जोखिमों और समुद्री पहुंच के कारण सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के लिए रणनीतिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण है. सीमा सुरक्षा बल के जवान यहां घुसपैठ को रोकने के लिए 24 घंटे कड़ी गश्त करते रहते हैं. बीएसएफ ने कई बार यहां संदिग्ध पाकिस्तानी मछली पकड़ने वाली नावों को जब्त किया है. पहले भी कई बार यहां पाकिस्तानी घुसपैठ और आतंकी गतिविधियों की खुफिया जानकारी मिलती रही है. 26/11 मुंबई हमले में भी इसका जिक्र आया था.
दुश्मन देश भारत में घुसपैठ की कोशिश के लिए इस मार्ग को इसलिए चुनता है, क्योंकि यहां रास्ता बदलता रहता है, जिस कारण यहां नेविगेट करना बेहद जोखिम भरा हो जाता है. पानी की गहराई और दिशा ज्वार-भाटा के कारण लगातार बदलती रहती है. अपनी इसी खतरनाक स्थिति के कारण इसे 'हरामी नाला' कहा जाता है.
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