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'पाकिस्तान की हरकतों से हम वाकिफ...', बांग्लादेश के PM तारिक रहमान के बयान पर भारत का खुला समर्थन, जानें पूरा मामला
भारत ने 1971 के ‘ऑपरेशन सर्चलाइट’ पर बांग्लादेश PM तारिक रहमान के बयान का समर्थन किया, जिसमें इसे क्रूर नरसंहार बताया था. ऐसे में भारत की प्रतिक्रिया ने कूटनीतिक हलकों में हलचल तेज कर दी है.
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भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में आई दूरी अब कम होती हुई दिखाई दे रही है. यही वजह है कि भारत से अधिकारिक रूप से बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान के उस बयान का समर्थन किया है. जिसमें उन्होंने पाकिस्तान द्वारा साल 1971 में चलाए गए ‘ऑपरेशन सर्चलाइट’ को क्रूरतापूर्ण नरसंहार बताया था. ऐसे में तारिक रहमान के बयान पर भारत की प्रतिक्रिया के बाद कूटनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है.
स्वतंत्रता दिवस पर श्रद्धांजलि
दरअसल, बांग्लादेश में हाल ही में स्वतंत्रता और राष्ट्रीय दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने उन शहीदों को श्रद्धांजलि दी, जिनके बलिदान से देश को आजादी मिली. इसी दौरान उन्होंने 1971 की उस काली रात को याद करते हुए पाकिस्तान की सेना पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि ‘ऑपरेशन सर्चलाइट’ के नाम पर निहत्थे लोगों के खिलाफ बड़े पैमाने पर हिंसा की गई, जिसे इतिहास के सबसे जघन्य नरसंहारों में गिना जाता है.
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भारत का आधिकारिक रुख
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भारत ने इस मुद्दे पर खुलकर बांग्लादेश का साथ दिया है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि भारत बांग्लादेश की न्याय की मांग का समर्थन करता है. उन्होंने यह भी साफ किया कि 1971 में हुए अत्याचारों से पूरी दुनिया वाकिफ है. लाखों निर्दोष लोगों की हत्या और महिलाओं के खिलाफ गंभीर अपराध उस समय की भयावह सच्चाई थे.
1971 में क्या हुआ था?
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इतिहास गवाह है कि 1971 का यह दौर दक्षिण एशिया के लिए बेहद संवेदनशील रहा. उस समय पाकिस्तान के सैन्य शासक जनरल याह्या खान ने पूर्वी पाकिस्तान में राजनीतिक गतिविधियों पर रोक लगा दी थी. इसके बाद हालात तेजी से बिगड़े और दमन की कार्रवाई शुरू हो गई. इसी पृष्ठभूमि में अवामी लीग के नेता शेख मुजीबुर रहमान ने स्वतंत्रता की घोषणा की. इस घोषणा को अगले ही दिन भारत की सीमा के पास स्थित एक रेडियो स्टेशन से मेजर जिया उर रहमान ने पढ़कर सुनाया था. यह क्षण बांग्लादेश के स्वतंत्र राष्ट्र बनने की दिशा में एक निर्णायक कदम साबित हुआ. लंबे संघर्ष और बलिदान के बाद आखिरकार बांग्लादेश एक स्वतंत्र देश के रूप में उभरा.
कैसे शुरू हुई 1971 की चर्चा?
आज, दशकों बाद भी 1971 की घटनाएं न सिर्फ इतिहास का हिस्सा हैं, बल्कि राजनीतिक और कूटनीतिक चर्चाओं का केंद्र बनी हुई हैं. भारत का यह बयान दिखाता है कि वह बांग्लादेश के साथ अपने ऐतिहासिक और मानवीय संबंधों को कितनी गंभीरता से देखता है. वहीं, पाकिस्तान अब भी इन आरोपों से इनकार करता रहा है, जिससे यह मुद्दा समय-समय पर फिर उभर कर सामने आता है. ऐसे में यह देखना अहम होगा कि आने वाले समय में इस मुद्दे पर क्षेत्रीय राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ती है.
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बहरहाल, इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह याद दिला दिया है कि इतिहास की घटनाएं भले पुरानी हो जाएं, लेकिन उनका असर लंबे समय तक बना रहता है.