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‘जुर्म साबित नहीं हुआ तो जमानत मिलने का अधिकार’ उमर खालिद के सवाल पर पूर्व CJI चंद्रचू़ड़ का बड़ा बयान

पूर्व CJI ने उमर खालिद की जमानत पर जुड़े एक सवाल का जवाब दिया. इस दौरान उन्होंने कहा, बिना मुकदमे के लंबी जेल की सजा संवैधानिक न्याय को कमजोर करती है और जमानत की मांग करती है.

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19 Jan 2026
( Updated: 19 Jan 2026
11:46 AM )
‘जुर्म साबित नहीं हुआ तो जमानत मिलने का अधिकार’ उमर खालिद के सवाल पर पूर्व CJI चंद्रचू़ड़ का बड़ा बयान

दिल्ली दंगों (Delhi Riots) के आरोपी उमर खालिद (Umar Khalid) को सुप्रीम कोर्ट से भी जमानत नहीं मिली. पिछले 5 साल से जेल में बंद खालिद अब एक साल तक को जमानत अर्जी भी नहीं लगा पाएंगे. इस बीच देश के पूर्व चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ (DY Chandrachud) ने इस मामले पर बड़ी टिप्पणी की है. 

पूर्व CJI ने उमर खालिद की जमानत पर जुड़े एक सवाल का जवाब दिया. इस दौरान उन्होंने कहा, बिना मुकदमे के लंबी जेल की सजा संवैधानिक न्याय को कमजोर करती है और जमानत की मांग करती है. दोष साबित होने से पहले जमानत हर आरोपी का अधिकार होना चाहिए. हालांकि उन्होंने यह भी कहा, जो मामले राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े हों, उनमें इस प्रकार की राहत देने से पहले मामले की गहराई पड़ताल की जानी चाहिए. 

‘उमर खालिद को जल्द सुनवाई का अधिकार’

दरअसल, देश के पूर्व CJI डी. वाय. चंद्रचूड़ जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में शामिल हुए थे. यहां उन्होंने पत्रकार वीर सांघवी के सवाल के जवाब में उमर खालिद की जमानत पर टिप्पणी की. पूर्व CJI चंद्रचूड़ ने कहा, 'वे (उमर खालिद) पांच साल से जेल में हैं. मैं अपने न्यायालय की आलोचना नहीं कर रहा हूं, जमानत की शर्तों का दुरुपयोग रोकने के लिए आप शर्तें लगा सकते हैं, लेकिन आपको यह जरूर ध्यान में रखना चाहिए कि उन्हें जल्द सुनवाई का अधिकार है. अगर वर्तमान परिस्थितियों में शीघ्र सुनवाई संभव नहीं है, तो जमानत अपवाद नहीं बल्कि नियम होना चाहिए.’

’24 महीनों के कार्यकाल में, हमने 21 हजार जमानत याचिकाओं का निपटारा किया है. ऐसे कई मामले होते हैं जिनके बारे में लोग सुप्रीम कोर्ट की किसी विशेष मामले में जमानत न देने के लिए आलोचना करते समय नहीं सोचते.’

किन मामलों में जमानत से कर कर सकते हैं इंकार? 

पूर्व CJI ने कई मामलों का उदाहरण देते हुए कहा, अगर आरोपी के समाज में लौट कर फिर से अपराध को अंजाम देने, सबूतों से छेड़छाड़ करने या जमानत का फायदा कानून के शिकंजे से भाग निकलने के लिए किए जाने की आशंका है तो आरोपी को जमानत देने से इंकार किया जा सकता है. 

उन्होंने कहा कि अगर ये तीनों आधार नहीं हैं, तो जमानत देनी ही होगी. पूर्व CJI ने अपनी बात को साफ करते हुए कहा कि 'मुझे लगता है कि जहां राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला है, वहां अदालत का कर्तव्य है कि वह मामले की गहराई से पड़ताल करें. नहीं तो लोग कई साल तक जेल में बंद रहते हैं. 

देरी से निपटारे पर जताई चिंता 

पूर्व CJI ने सुस्त न्यायिक प्रक्रिया और मामलों के देरी से निपटारे पर चिंता जताई. उन्होंने कहा, देश का संविधान सर्वोच्च कानून है और मामले में कोई ठोस अपवाद नहीं है और तुरंत सुनवाई में देरी है तो आरोपी जमानत का अधिकार है. 

उन्होंने सत्र और जिला अदालतों में सुनवाई में देरी और लंबे समय तक जमानत न दिए जाने पर भी चिंता जाहिर की. पूर्व CJI चंद्रचूड़ ने कहा कि इससे संस्था के लिए अविश्वास बढ़ा है और न्यायाधीशों को यह डर सताता है कि कहीं उनकी निष्ठा पर सवाल तो नहीं उठाया जाएगा. यही कारण है कि जमानतों के मामले सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचते हैं. 

उमर खालिद की जमानत पर पूर्व CJI ने पहले क्या कहा था? 

उमर खालिद और शरजील इमाम का मामला हाई कोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया, लेकिन जमानत याचिका हर बार खारिज हो गई. आखिरी बार 5 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई हुई थी. जहां दिल्ली दंगों के 5 आरोपियों को सशर्त जमानत दे दी गई थी, लेकिन उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत नामंजूर कर दी गई. 

इसके बाद समाज के कुछ खास वर्गों (जिसमें कई नेता भी शामिल थे) ने सवाल उठाए थे. हर बार उमर खालिद की जमानत पर खास वर्ग नैरेटिव सेट करता है. जिस पर पहले भी पूर्व CJI डी वाय चंद्रचूड ने प्रतिक्रिया दी थी. उन्होंने कहा था, 'मैं केस की मेरिट पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता, लेकिन मैं आपको एक चीज जरूर बताऊंगा, जिस पर बहुत लोग ध्यान नहीं दे पाते, जब उमर खालिद केस की बात होती है. क्या आप सोच सकते हैं कि केस मुल्तवी किया गया था. ज्यादा नहीं तो कम से कम सात बार उमर खालिद की ओर से पेश होने वाले वकीलों ने आगे की तारीखें मांगी थीं और आखिरकार जमानत याचिका वापस ले ली गई. 

जस्टिस चंद्रचूड़ ने आरोपी के वकीलों की ओर से याचिका वापस लेने की बात कही, वकील जज से खुद ही तारीख पर तारीख मानते हैं और फिर केस ही वापस ले लेते हैं. यह एक ऐसा केस था, जहां आरोपी की ओर से पेश होने वालों ने कोर्ट से बार-बार समय मांगा. किसी केस में बहस से इतनी हिचकिचाहट क्यों? या तो आप पहले दिन ही बहस कर सकते हैं, या आप कह सकते हैं कि आप बेल के लिए अपनी याचिका नहीं देना चाहते. 

क्या है दिल्ली दंगा मामला? 

फरवरी 2020 में दिल्ली के उत्तर-पूर्वी इलाके में दंगे भड़क गए थे. CAA-NRC विरोधी प्रदर्शनों के बीच ये हिंसा भड़की थी. जिसमें 53 लोग मारे गए. जबकि कई घायल हो गए. हिंसा में कई वाहनों, घर और दुकानों को भी नुकसान पहुंचाया गया था. सितंबर 2020 में उमर खालिद को हिंसा भड़काने के आरोप में अरेस्ट किया गया था. फिलहाल दोनों ओर से मिलीं दलीलों को सुप्रीम कोर्ट ने गंभीरता सेे लेेते हुए 3 नवंबर के लिए पहले नंबर पर इस मैटर को लिस्टेड कर दिया है. 

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