खुद वाइन बेच रहे हैं और बातें शराब बैन की...,लद्दाख में सोनम वांगचुक के खिलाफ खुला मोर्चा, परिवार पर लगा अवैध वाइन के कारोबार का आरोप
Sonam Wangchuk: ऑल लद्दाख होटल्स एंड बार्स एसोसिएशन का आरोप है कि वांगचुक एक तरफ शराब पर रोक लगाने की बात करते हैं, वहीं दूसरी तरफ उनके परिवार से जुड़ा कारोबार कथित तौर पर एपल वाइन यानी 'उले टोपो' बनाने और बेचने का काम कर रहा है.
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Sonam Wangchuk: लद्दाख में शराबबंदी को लेकर चल रही बहस अब एक नए विवाद में बदलती नजर आ रही है. पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने लद्दाख को शराब मुक्त क्षेत्र बनाने की मांग का समर्थन किया था....इस मांग को लेकर स्थानीय महिलाओं ने भी विरोध प्रदर्शन किया था.....लेकिन अब लद्दाख के शराब कारोबारियों ने वांगचुक के रुख पर सवाल खड़े कर दिए हैं. ऑल लद्दाख होटल्स एंड बार्स एसोसिएशन का आरोप है कि वांगचुक एक तरफ शराब पर रोक लगाने की बात करते हैं, वहीं दूसरी तरफ उनके परिवार से जुड़ा कारोबार कथित तौर पर एपल वाइन यानी 'उले टोपो' बनाने और बेचने का काम कर रहा है. कारोबारियों का कहना है कि इसके लिए जरूरी कमर्शियल लाइसेंस भी नहीं लिया गया है. हालांकि, ये सभी आरोप कारोबारी संगठन की तरफ से लगाए गए हैं....
शराबबंदी की मांग पर कारोबारियों ने उठाए सवाल
शराब व्यापारियों का कहना है कि अगर शराब समाज के लिए गलत है तो यह नियम सभी पर बराबर लागू होना चाहिए... संगठन ने वांगचुक पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया है. कारोबारियों ने यह भी सवाल उठाया कि जब वह शराबबंदी की मांग कर रहे हैं तो पारंपरिक पेय 'चांग' को लेकर सकारात्मक बातें क्यों करते हैं? उनका कहना है कि शराब की दुकानों और बार से कई परिवारों की रोजी-रोटी जुड़ी हुई है. ऐसे में किसी एक कारोबार को निशाना बनाना ठीक नहीं है....व्यापारियों ने कहा कि अगर मांस खाने, धूम्रपान और दूसरे नशीले पदार्थों पर भी इसी तरह के नियम लागू किए जाते हैं तो वे पूरी शराबबंदी का समर्थन करने के लिए तैयार हैं....
नई आबकारी नीति से शुरू हुआ पूरा विवाद
दरअसल, इस विवाद की शुरुआत लद्दाख की नई आबकारी नीति से हुई थी... 1 जून 2026 को लागू हुई नई नीति में शराब की दुकानों की संख्या दो से बढ़ाकर 20 करने का प्रस्ताव रखा गया था.... इस फैसले के खिलाफ लद्दाख की महिलाओं ने विरोध शुरू कर दिया... उनका मानना था कि शराब की दुकानें बढ़ने से समाज और परिवारों पर गलत असर पड़ सकता है..सोनम वांगचुक ने भी महिलाओं के इस आंदोलन को अपना समर्थन दिया... बाद में प्रशासन के आश्वासन के बाद प्रदर्शन रोक दिया गया...वांगचुक ने सोशल मीडिया पर बताया था कि प्रशासन ने महिलाओं की मांगों पर विचार करने और उन्हें पूरा करने के लिए एक सप्ताह का समय मांगा है.
प्रशासन ने भी सोनम वांगचुक के दावों को नकारा
इस मामले में प्रशासन और वांगचुक के बीच भी बयानबाजी देखने को मिली.. वांगचुक ने आरोप लगाया था कि प्रशासन मोहल्लों और स्कूलों के आसपास शराब की दुकानें खोलना चाहता है... हालांकि, प्रशासन ने इन दावों को गलत और बेबुनियाद बताया.. प्रशासन के मुताबिक, नई आबकारी नीति को लोगों और सामाजिक संगठनों की राय मिलने के बाद 26 अगस्त को वापस ले लिया गया था.. इसके बाद पुरानी 2025-26 की नीति फिर से लागू कर दी गई.
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प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि लेह के वार्ड नंबर 4 और 6 में दो दुकानों की अनुमति थी, लेकिन नीलामी के बाद सिर्फ वार्ड नंबर 6 में ही दुकान शुरू हो सकी... पूरे लद्दाख में होटल और बार से जुड़ी 50 शराब की दुकानें पहले से चल रही थीं.. प्रशासन का कहना है कि किसी भी नए होटल या बार को लाइसेंस देने के लिए तय नियमों का पालन करना जरूरी है... खासतौर पर स्कूलों, धार्मिक स्थलों और हाईवे से उचित दूरी बनाए रखना अनिवार्य है.
फिलहाल लद्दाख में शराबबंदी का मुद्दा सिर्फ सरकारी नीति तक सीमित नहीं रह गया है.. इसमें महिलाओं की चिंता, कारोबारियों की आजीविका और सोनम वांगचुक के बयानों को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है.