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कांग्रेस शासित हिमाचल में लहराया भगवा, BJP का 4 में से 3 नगर निगमों पर कब्जा, सेमीफाइनल माना जा रहा था ये चुनाव

हिमाचल प्रदेश में सत्ताधारी कांग्रेस को बीजेपी ने जोरदार पटखनी दे दी और चार में से तीन नगर निगमों में भगवा लहरा दिया. कांग्रेस किसी तरह पालमपुर में जीत से अपनी लाज बचा पाई है.

Photo source: X/@jairamthakurbjp
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हिमाचल प्रदेश में सत्ताधारी कांग्रेस को मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने जोरदार पटखनी देते हुए चार में से तीन नगर निगमों मंडी, धर्मशाला और सोलन में अपना भगवा झंडा लहरा दिया है, जबकि कांग्रेस किसी तरह केवल पालमपुर में जीत दर्ज कर अपनी लाज बचाने में सफल रही है. कांग्रेस शासित राज्य में चारों नगर निगमों के लिए 17 मई को पार्टी चिह्नों पर मतदान हुआ था, जिसमें भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला था. इस चुनाव को आगामी विधानसभा चुनाव से पहले का सेमीफाइनल माना जा रहा था.

हिमाचल प्रदेश नगर निगम में बीजेपी की प्रचंड जीत

इस प्रचंड जीत पर हिमाचल प्रदेश भाजपा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट करते हुए लिखा कि नगर निगम चुनावों में 4 में से 3 नगर निगमों में मिली यह सफलता भाजपा के कर्मठ कार्यकर्ताओं की मेहनत और जनता के आशीर्वाद का प्रतिफल है. भाजपा ने इसे विकास और सुशासन की जीत बताते हुए कहा कि हिमाचल की जनता ने कांग्रेस सरकार की राजनीति को नकारते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व पर एक बार फिर अटूट विश्वास जताया है.

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हिमाचल स्थानीय चुनाव में कांग्रेस का सफाया!

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प्रदेश में कुल 63 वार्डों पर चुनाव हुए, जिनमें से 37 में भाजपा ने जबरदस्त जीत हासिल की, जबकि कांग्रेस को 23 सीटों पर जीत मिली. कांग्रेस को इन 23 में से 11 सीटें तो अकेले पालमपुर में ही मिली हैं, वहीं तीन वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशी भी जीते हैं. मंडी नगर निगम की बात करें तो यहां कांग्रेस का पूरी तरह से सूपड़ा साफ हो गया है. मंडी में कुल 15 वार्ड हैं, लेकिन एक वार्ड में नागरिक मुद्दों के हल न होने के कारण मतदाताओं ने वोटिंग का पूर्ण बहिष्कार किया. शेष 14 सीटों पर हुए चुनाव में से 12 पर भाजपा ने शानदार जीत हासिल की, जबकि कांग्रेस की झोली में मात्र 1 सीट आई और एक सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार विजयी हुआ. यह चुनाव पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर के लिए एक बड़ी साख की लड़ाई थी, क्योंकि मंडी उनका गृह जिला है. इससे पहले 2021 के चुनावों में जब वे मुख्यमंत्री थे, तब भाजपा ने 11 वार्ड जीते थे, जबकि कांग्रेस को चार वार्ड मिले थे. वहीं, सोलन नगर निगम में 17 वार्डों में चुनाव हुए थे, जिसमें से 10 पर भाजपा ने कब्जा किया, 6 पर कांग्रेस जीती और एक सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार विजयी हुआ. इससे पहले सोलन के शुरुआती आठ वार्डों के नतीजों में भी भाजपा ने छह वार्ड जीते थे, जबकि कांग्रेस और निर्दलीय ने एक-एक सीट जीती थी.

पालमपुर जीत से किसी तरह बची कांग्रेस की लाज!

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धर्मशाला नगर निगम में भी भाजपा का ही दबदबा रहा. यहां 17 वार्डों पर चुनाव हुए, जिनमें से 17 सीटों में से भाजपा ने 11 सीटों पर आसानी से जीत हासिल की, जबकि कांग्रेस सिर्फ पांच सीटों तक ही सिमट गई और एक सीट पर निर्दलीय प्रत्याशी ने कब्जा किया. 17 सदस्यों वाले इस नगर निकाय में जीतने वाले प्रमुख उम्मीदवारों में निवर्तमान कांग्रेस मेयर नीनू शर्मा भी शामिल थीं, जिन्होंने अपना वार्ड बरकरार रखा, हालांकि अन्य वार्डों में कांग्रेस को भारी झटका लगा. दूसरी ओर, पालमपुर एकमात्र ऐसा नगर निगम रहा जहां कांग्रेस अपना परचम फहराने में कामयाब रही. यहां 15 सीटों पर चुनाव हुए, जिसमें से 11 सीटों पर कब्जा कर कांग्रेस ने नगर निगम को अपने नाम किया, वहीं भाजपा को यहां मात्र 4 सीटें ही मिलीं. चुनाव परिणाम के दौरान पालमपुर में जिन 10 वार्डों के नतीजे सबसे पहले घोषित हुए थे, उनमें से ही कांग्रेस ने नौ वार्ड जीत लिए थे.

इस चुनावी जीत के बाद मतदाताओं का आभार व्यक्त करते हुए धर्मशाला से भाजपा विधायक सुधीर शर्मा (जो पहले कांग्रेस में थे) ने मीडिया से कहा कि ये नतीजे कांग्रेस सरकार के प्रति जनता की नाराजगी और भाजपा में उनके बढ़ते भरोसे का साफ सबूत हैं. सुधीर शर्मा ने आईएएनएस से ​​कहा कि ये नतीजे साफ दिखाते हैं कि जनता ने भाजपा के पक्ष में और कांग्रेस के खिलाफ अपना फैसला सुनाया है. 

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उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सुक्खू के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने पिछले चार सालों में राज्य के लोगों के बीच असंतोष पैदा करने के अलावा और कुछ नहीं किया है. शर्मा के अनुसार, सरकार कर्मचारियों, युवाओं, महिलाओं, व्यापारियों और आम लोगों की शिकायतों को दूर करने में पूरी तरह नाकाम रही है और जनता का यही असंतोष अब आज के चुनावी नतीजों में साफ तौर पर झलक रहा है. उन्होंने कहा कि धर्मशाला के लोगों ने विकास, सुशासन और जन कल्याण पर केंद्रित राजनीति में अपना भरोसा जताया है तथा यह जीत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में पूरे देश में चल रही पहलों, गरीबों के लिए कल्याणकारी योजनाओं और मजबूत नेतृत्व का जनता द्वारा किया गया खुला समर्थन है. उन्होंने दोहराया कि जनता ने एक बार फिर प्रधानमंत्री मोदी की नीतियों और भाजपा के काम करने के तरीके पर अपना अटूट भरोसा जताया है.

कैसा रहा ये चुनाव?

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मतदान के आंकड़ों पर नजर डालें तो 17 मई को हुए नगर निगम चुनावों में कुल मिलाकर 63.44 प्रतिशत मतदान हुआ, जो कि पिछले चुनावों के मुकाबले कम था. चारों निगमों में कुल 1,31,369 मतदाताओं में से 83,342 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया. इनमें मंडी नगर निगम में सबसे ज्यादा 68.78 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जबकि कांगड़ा में 63.72 प्रतिशत, धर्मशाला में 60 प्रतिशत और सोलन में सबसे कम 58.32 प्रतिशत मतदान हुआ. इन चारों नगर निगमों के नतीजों के अलावा, प्रदेश भर में 250 जिला परिषद वार्डों और 1,769 पंचायत समिति सदस्यों में से 1,684 सदस्यों के लिए भी वोटों की गिनती का कार्य लगातार चल रहा है.

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