Advertisement

Loading Ad...

ईरान के हमलों में कतर का गैस मार्केट धराशायी, इस देश ने पूरी की भारत की जरूरत, खोल दिया LNG का खजाना

दरअसल, भारत अपनी LNG जरूरत का 40% कतर से लेता था, लेकिन ‘रास लफ्फान’ एनर्जी हब पर ईरान के मिसाइल हमले के बाद कतर कमजोर पड़ गया.

Source- IANS/File Photo
Loading Ad...

ईरान-अमेरिका की जंग ने वैश्विक उथल पुथल को तेज कर दिया. इस युद्ध में ग्लोबल एनर्जी मार्केट डगमगा गया. जो देश भारत की तेल और गैस सप्लाई का सबसे बड़ा सप्लायर था वहां ईरान के हमलों से गैस और तेल सप्लाई ठप पड़ गई. बात कतर की हो रही है. कतर के इस बड़े नुकसान का फायदा उठाते हुए ओमान भारत का बड़ा एनर्जी सप्लायर बन गया. 

दरअसल, भारत अपनी LNG जरूरत का 40% कतर से लेता था, लेकिन ‘रास लफ्फान’ एनर्जी हब पर ईरान के मिसाइल हमले के बाद कतर कमजोर पड़ गया. गैस फैक्ट्रियां बंद हो गईं और कतर को गैस देने की कानूनी गारंटी से पीछे हटना पड़ा. 

ओमान बना भारत का एनर्जी सप्लायर पार्टनर

Loading Ad...

कतर से सप्लाई प्रभावित होने के बाद भारत ने जिस देश की ओर सबसे पहले रुख किया वह ओमान है. ओमान ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ के युद्ध क्षेत्र से बाहर और बिल्कुल सुरक्षित इलाके में हैं. 

Loading Ad...

भारत ने 1.63 मिलियन टन LNG इंपोर्ट की, इसमें से करीब 489,000 टन अकेले ओमान से आई. इस तरह से ओमान भारत का नंबर वन गैस सप्लायर बन गया. ओमान की कुल गैस सप्लाई 30% तक पहुंच गई है. 

ईरान हमलों के बाद सप्लाई मार्केट पर बुरा असर 

Loading Ad...

रेटिंग एजेंसी इक्रा (ICRA) के आंकड़ों के मुताबिक, कतर की भारतीय बाजार में 41% हिस्सेदारी थी. जो गिरकर 8% के करीब हो गई. ओमान के साथ-साथ UAE, कांगो, नाइजीरिया, मॉरिटानिया और सेनेगल जैसे नए अफ्रीकी देशों से भी भारत को फायदा मिला है. भारत में गैस किल्लत को दूर करने के लिे इन देशों ने बड़ी भूमिका अदा की है. 

भारत-ओमान द्विपक्षीय व्यापार समझौता लागू

इस बीच ओमान भारत के साथ बड़ी साझेदारी की ओर भी बढ़ा. भारत-ओमान व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (सीईपीए) या द्विपक्षीय व्यापार समझौता लागू हो गया. इससे भारत के किसानों समेत छोटे व्यापारियों के लिए मौके बढ़ेंगे. 

Loading Ad...

यह भी पढ़ें- हिजबुल्लाह पर बैन, पायलट जोन… अमेरिका का दखल, कड़ी शर्तें, आखिरकार थम गई इजरायल-लेबनान जंग

यह भी पढ़ें

सीईपीए के लागू होने से ओमान में भारत के 99.38 प्रतिशत निर्यात को कवर करने वाली 98 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर तुरंत 100 प्रतिशत शुल्क-मुक्त बाजार पहुंच प्राप्त हो जाती है, जबकि सीईपीए से पहले की प्रणाली में केवल 15.3 प्रतिशत निर्यात पर शून्य शुल्क पहुंच थी. इस समझौते के बाद, लौह और इस्पात, वस्त्र, चमड़ा, ऑटो कंपोनेंट्स और औद्योगिक उपकरण जैसे छोटे व्यवसायों के प्रभुत्व वाले क्षेत्रों में बड़े अंतरराष्ट्रीय ऑर्डर मिलने की संभावना है. 

LIVE
अधिक →

Advertisement

Loading Ad...
Loading Ad...
Loading Ad...
अधिक →

Advertisement

Loading Ad...