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अफगानिस्तान पर पाक फौज़ का बर्बर हमला, 34 से ज्यादा निर्दोष लोगों की ली जान, कराची रेंजर्स पर अटैक से बौखलाया PAK

पाकिस्तान ने एक बार फिर अफगानिस्तान पर हमला कर बेगुनाह लोगों की जान ले ली है. पाक फौज के हवाई हमलों में अब तक 34 आम लोगों की मौत हो गई है. अफगान तालिबान ने पाकिस्तान की इस कार्रवाई को कायराना हरकत करार दिया है.

अफगानिस्तान पर पाकिस्तान का हमला/ तस्वीर: @Zabehulah_M33
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कराची ब्लास्ट में कई जवानों की मौत से बौखलाए पाकिस्तान ने एक बार फिर अफगानिस्तान पर बम के गोले बरसाए हैं, जिसमें करीब 34 से ज्यादा निर्दोष लोगों की मौत हो गई है. अफगान तालिबान सरकार ने पाकिस्तान पर पूर्वी अफ़गानिस्तान में हवाई हमले के आरोप लगाए हैं, जिसमें नागरिकों (सिविलियंस) की मौत होने के साथ-साथ दर्जनों लोग जख़्मी हो गए हैं.

तालिबान सरकार के प्रवक्ता ज़बीहुल्लाह मुजाहिद ने इस हमले की आलोचना करते हुए कहा कि इस एयरस्ट्राइक में पक्तिका, पक्तिया और कुनार प्रांतों को निशाना बनाया गया. मुजाहिद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में इस सैन्य कार्रवाई की निंदा करते हुए इसे "आक्रामकता का कायरतापूर्ण कृत्य" करार दिया.

पाकिस्तान ने अफगान सीमा पर भी की ज़मीनी कार्रवाई

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वहीं, पाकिस्तान ने इसे कैलिबेरेटेड स्ट्राइक यानी कि सोचा-समझा हमला कहा है. इससे पहले पाकिस्तान के सुरक्षा बलों ने रविवार को अफ़गानिस्तान सीमा से सटे इलाकों में ज़मीनी कार्रवाई शुरू की थी. इसके बाद उन्होंने चरमपंथियों के ठिकानों और सुरक्षित पनाहगाहों पर हमले किए. पाकिस्तान ने इस कार्रवाई में 29 चरमपंथियों के मारे जाने का दावा किया है. पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने X पर एक पोस्ट में कहा कि यह कार्रवाई पाकिस्तान भर में चरमपंथियों के कई हमलों के जवाब में शुरू की गई थी.

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पाकिस्तान में हो रहे हमलों में आई तेजी

आपको बता दें कि हाल के वर्षों में पाकिस्तान में पुलिस और सुरक्षा कर्मियों को निशाना बनाकर किए जाने वाले हमलों में अचानक से तेज़ी आई है. इस्लामाबाद इस हिंसा के लिए कथित तौर पर अफगानिस्तान में पनाह लिए हुए तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) और उससे जुड़े चरमपंथी समूहों को ज़िम्मेदार ठहराता है.

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कराची रेंजर्स पर हमले से बौखलाया पाक

पाकिस्तान ने अफगानिस्तान पर ये हमले उस वक्त किए हैं जब भारी हथियारों से लैस चरमपंथियों ने दक्षिणी बंदरगाह शहर कराची में अर्धसैनिक बल 'रेंजर्स' के क्षेत्रीय मुख्यालय पर हमला किया और तीन सैनिकों की हत्या कर दी. इसके बाद हुई जवाबी कार्रवाई में सुरक्षाबलों ने तीन हमलावरों को मार गिराया और एक घायल हमलावर को पकड़ लिया; सेना ने उसकी पहचान कथित तौर पर अफ़गान नागरिक के रूप में की. शनिवार रात एक बयान में पाकिस्तानी तालिबान के एक अलग हुए गुट, 'जमात-उल-अहरार' ने कराची हमले की ज़िम्मेदारी ली थी.

मालूम हो कि पाकिस्तान ने अफ़गानिस्तान के भीतर चरमपंथियों के ठिकानों पर ये बमबारी और हवाई हमले तीन हफ़्ते के अंदर किए हैं. इन हमलों ने लगभग एक महीने की शांति (सीजफायर) को खत्म कर दिया है. इससे पहले इस्लामाबाद ने दोनों पड़ोसी देशों के बीच टकराव को 'खुला युद्ध' करार दिया था. इस दौरान बैकडोर टॉक्स (पर्दे के पीछे की बातचीत) जारी थे और तुर्की तथा चीन की ओर से शांति स्थापित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रयास भी किए जा रहे थे.

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क्यों है पाकिस्तान और अफगानिस्तान में तनाव?

ज्ञात हो कि ये वही पाकिस्तान है जहां अफगानिस्तान में तालिबान की वापसी का जश्न मनाया गया था. तत्कालीन पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान ने इसे गुलामी की जंजीरों को तोड़ने वाली घटना करार दिया था. इतना ही नहीं, पाकिस्तान के तब के DG ISI लेफ्टिनेंट जनरल फैज हमीद काबुल गए और हंसते हुए ऐसे इशारा किया मानो जैसे कोई किला फतह कर लिया हो. उन्होंने कहा था कि 'एवरीथिंग इज़ ऑल राइट' (सब ठीक है). मालूम हो कि पाक फौज और पाकिस्तान के हुक्मरान अफगानिस्तान को अपना पांचवा सूबा बनाने का ख्वाब देखते थे और काबुल को 'स्ट्रैटेजिक डेप्थ' माना जाता था.

हालांकि, डूरंड लाइन को लेकर दोनों देशों में दशकों से दुश्मनी, तनातनी और खूनी संघर्ष बरकरार है. अफगानिस्तान दोनों देशों के पख्तूनों को विभाजित करने वाली ब्रिटिश काल की डूरंड लाइन को काल्पनिक मानते हुए इसे अस्वीकार करता रहा है. वहीं पाकिस्तान, TTP (वो तालिबान जो अफगानिस्तान में रहते हुए पाकिस्तान पर कथित तौर पर हमले करता है) पर कार्रवाई करने का दबाव बनाता रहा है, जबकि तालिबान से लेकर पहले की सरकारों ने कहा है कि उनके यहां कोई TTP या आतंकी-चरमपंथी गुट नहीं है.

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इसी बीच, पाकिस्तान ने बीते साल अक्टूबर में भी अफगानिस्तान के अंदर हवाई हमले किए थे. उसने TTP और उसके सहयोगियों के ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया था. पाकिस्तान इन गुटों को अपनी जमीन पर हिंसा फैलाने का जिम्मेदार मानता है. पाकिस्तान का आरोप है कि अफगानिस्तान की तालिबान सरकार इनको पनाह देती है.

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