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अदालतों में अब नहीं पड़ेगी 'तारीख पर तारीख', गृहमंत्री अमित शाह ने बनाया ऐसा एक्शन प्लान; जल्द होगा मुकदमों का निपटारा!
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि गृह मंत्रालय सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के साथ मिलकर लंबित आपराधिक मामलों को कम करने की योजना पर काम कर रहा है. उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि किसी भी आपराधिक मामले की पूरी न्यायिक प्रक्रिया, सुप्रीम कोर्ट तक की अपील सहित, तीन साल के भीतर पूरी हो जाए.
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देश में सालों तक अदालतों में लंबित रहने वाले आपराधिक मामलों को लेकर अक्सर सवाल उठते रहे हैं. कई बार पीड़ितों को न्याय पाने में लंबा इंतजार करना पड़ता है, जबकि आरोपी और उनके परिवार भी कई साल तक कानूनी प्रक्रिया में उलझे रहते हैं. ऐसे में अब केंद्र सरकार इस स्थिति को बदलने की दिशा में बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को एक कार्यक्रम में कहा कि गृह मंत्रालय सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के साथ मिलकर ऐसा खाका तैयार कर रहा है, जिससे लंबित आपराधिक मामलों की संख्या तेजी से कम की जा सके.
दरअसल, नई दिल्ली में आयोजित अखिल भारतीय फिंगरप्रिंट सम्मेलन-2026 को संबोधित करते हुए अमित शाह ने यह स्पष्ट कहा कि देश की आपराधिक न्याय प्रणाली को तेज, वैज्ञानिक और परिणाम आधारित बनाने का समय आ गया है. उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि देश में कहीं भी कोई अपराध दर्ज होने के बाद उसकी पूरी न्यायिक प्रक्रिया, जिसमें सुप्रीम कोर्ट तक की अपील शामिल हो, तीन साल के भीतर पूरी हो जानी चाहिए.
तीन साल में पूरी हो सकती है न्यायिक प्रक्रिया
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अमित शाह ने कहा कि नई आपराधिक न्याय संहिताओं का मुख्य उद्देश्य न्याय मिलने की गति को बढ़ाना है. उनका मानना है कि लंबे समय तक मामलों का लंबित रहना न्याय व्यवस्था की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है. यदि जांच, आरोप-पत्र, अभियोजन और न्यायिक प्रक्रिया तय समय में पूरी हो जाए तो अपराधियों को सजा दिलाना और निर्दोष लोगों को राहत देना दोनों आसान हो जाएगा. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि गृह मंत्रालय किसी भी स्तर पर अनावश्यक देरी को स्वीकार नहीं करेगा. इसके लिए वैज्ञानिक तरीके से जांच, मजबूत आरोप-पत्र और अदालतों के साथ बेहतर समन्वय पर जोर दिया जाएगा.
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शाम की अदालतों पर भी चल रहा विचार
गृह मंत्री ने बताया कि हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में लंबित आपराधिक मामलों के निपटारे के लिए सायंकालीन अदालतों की स्थापना जैसे विकल्पों पर भी विचार किया जा रहा है. इसके अलावा नई व्यवस्थाएं विकसित की जा रही हैं, ताकि पुराने मामलों को तेजी से निपटाया जा सके. जानकारों मानते हैं कि यदि अदालतों के कामकाज का समय बढ़ता है और तकनीक का बेहतर उपयोग होता है, तो लंबित मामलों की संख्या में काफी कमी लाई जा सकती है.
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अपराध जांच में बढ़ेगा विज्ञान और तकनीक का इस्तेमाल
अपने संबोधन में अमित शाह ने कहा कि आधुनिक दौर में केवल पारंपरिक जांच पद्धतियों पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है. अपराधों की प्रकृति तेजी से बदल रही है और इससे निपटने के लिए विज्ञान तथा तकनीक को न्याय व्यवस्था का अभिन्न हिस्सा बनाना होगा. उन्होंने पुलिस और फॉरेंसिक विशेषज्ञों से कहा कि अपराध स्थल से साक्ष्यों को बेहद सावधानी और सटीकता के साथ एकत्र किया जाए. उनका मानना है कि वैज्ञानिक साक्ष्य अपराध के खिलाफ लड़ाई का सबसे शक्तिशाली हथियार हैं. सही साक्ष्य न केवल अपराधियों तक पहुंचने में मदद करते हैं, बल्कि अदालत में दोष सिद्ध करने की संभावना भी बढ़ाते हैं.
एआई और मशीन लर्निंग से मिलेगी मदद
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अमित शाह ने अपराध जांच में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और मशीन लर्निंग के बढ़ते महत्व पर भी जोर दिया. उन्होंने कहा कि अपराध स्थलों से जुटाए गए डेटा का विश्लेषण आधुनिक तकनीकों के माध्यम से किया जाना चाहिए. इससे अपराध के पैटर्न को समझने, भविष्य के अपराधों को रोकने और अपराधियों को तेजी से पकड़ने में सहायता मिलेगी. उनके अनुसार आने वाले समय में डेटा आधारित पुलिसिंग और डिजिटल जांच प्रणाली कानून व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाएगी.
पुराने कानूनों की कमियां हुईं दूर
गृह मंत्री ने बताया कि सरकार ने पुराने आपराधिक कानूनों की कई खामियों की पहचान की थी. उन्होंने दावा किया कि इनमें से लगभग 90 प्रतिशत कानूनी कमियों को दूर कर दिया गया है. यही कारण है कि अब नई आपराधिक न्याय व्यवस्था को अधिक प्रभावी और आधुनिक बनाने की दिशा में तेजी से काम हो रहा है. उन्होंने पुलिस अधिकारियों से समय पर आरोप-पत्र दाखिल करने, अभियोजन पक्ष के साथ बेहतर समन्वय बनाए रखने और अदालतों में प्रभावी पैरवी सुनिश्चित करने की अपील की.
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डिजिटल इंडिया के साथ बदल रही न्याय व्यवस्था
अमित शाह ने राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की भूमिका की भी सराहना की. उन्होंने बताया कि देश के सभी 17,840 पुलिस थानों को सीसीटीएनएस नेटवर्क से जोड़ दिया गया है और करोड़ों एफआईआर का डेटा अब डिजिटल रूप में उपलब्ध है. इसके अलावा 22 हजार से अधिक अदालतों को ई-कोर्ट प्रणाली से जोड़ा जा चुका है. उन्होंने कहा कि भारत की आपराधिक न्याय प्रणाली अब बदलाव के दौर से गुजर रही है. पहले पुलिस थानों को केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने का माध्यम माना जाता था, लेकिन अब तकनीक और वैज्ञानिक जांच की मदद से न्याय प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाया जा रहा है.
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बहरहाल, अमित शाह का यह बयान ऐसे समय आया है जब देश में न्यायिक सुधारों पर लगातार चर्चा हो रही है. यदि सरकार का तीन साल में पूरी न्यायिक प्रक्रिया समाप्त करने का लक्ष्य सफल होता है, तो यह भारतीय न्याय व्यवस्था में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जाएगा. इससे न केवल अदालतों पर बोझ कम होगा, बल्कि आम लोगों का न्याय प्रणाली पर भरोसा भी और मजबूत होगा.