Indian Railways: कोटा सिस्टम खत्म, भीड़ होगी कम, स्टेशन होंगे दोगुने, जानिए क्या है 2026 का महाप्लान?
Indian Railway: रेलवे के इन फैसलों का सीधा फायदा आम यात्रियों को मिलेगा. स्टेशन कम भीड़भाड़ वाले होंगे, ट्रेनों की उपलब्धता बढ़ेगी, टिकट सिस्टम ज्यादा पारदर्शी बनेगा और सुविधाएं बेहतर होंगी. कुल मिलाकर रेलवे का यह कदम यात्रियों के लिए सुविधाजनक, समान और आधुनिक रेल सेवा की ओर एक बड़ा कदम माना जा रहा है.
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Indian Railway New Rules: देश में लगातार बढ़ रही यात्रियों की संख्या को देखते हुए भारतीय रेलवे ने एक बड़ा और अहम फैसला लिया है. रेलवे ने तय किया है कि 2030 तक देश के 48 बड़े शहरों में रेलवे स्टेशनों की क्षमता को दोगुना किया जाएगा. इनमें दिल्ली, मुंबई, लखनऊ जैसे प्रमुख शहर भी शामिल हैं. यह फैसला रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव की अध्यक्षता में हुई रेलवे बोर्ड की अहम बैठक में लिया गया. बैठक में सभी रेलवे जोन के जनरल मैनेजर और वरिष्ठ अधिकारियों को इस योजना पर रिपोर्ट देने और तेजी से काम शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं.
तीन चरणों में होगा काम
रेलवे ने साफ किया है कि यह काम सिर्फ 2030 तक सीमित नहीं रहेगा. इसे तीन हिस्सों शॉर्ट टर्म, मिड टर्म और लॉन्ग टर्म में बांटा गया है. जहां भी संभव होगा, वहां पहले ही काम पूरा कर लिया जाएगा. यानी जिन स्टेशनों पर जल्दी सुधार हो सकता है, वहां इंतजार नहीं किया जाएगा. इसका मकसद यात्रियों को जल्द से जल्द राहत देना है.
प्लेटफॉर्म ही नहीं, पूरी व्यवस्था मजबूत होगी
रेलवे सिर्फ प्लेटफॉर्म की संख्या नहीं बढ़ाएगा, बल्कि टर्मिनल, पिट लाइन और स्टेबलिंग लाइन भी बढ़ाई जाएंगी. इससे ट्रेनों की आवाजाही आसान होगी और ट्रेनों को खड़ा करने व रखरखाव में भी सुविधा मिलेगी. इससे समय की बचत होगी और ट्रेनें ज्यादा बेहतर तरीके से चलाई जा सकेंगी.
भीड़ कम करने पर खास फोकस
रेलवे का लक्ष्य है कि बड़े रेलवे स्टेशनों पर अत्यधिक भीड़ न हो. इसके लिए बड़े स्टेशनों के आसपास मौजूद छोटे और नजदीकी रेलवे स्टेशनों की क्षमता भी बढ़ाई जाएगी. इससे यात्रियों का दबाव एक ही स्टेशन पर नहीं पड़ेगा. यह योजना उपनगरीय (सबअर्बन) और गैर-उपनगरीय दोनों तरह के ट्रैफिक को ध्यान में रखकर बनाई जा रही है.
बढ़ती मांग के अनुसार ट्रेन सेवाएं
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि रेलवे बढ़ती यात्री मांग को देखते हुए कोचिंग टर्मिनलों का विस्तार कर रहा है और उनकी संचालन क्षमता भी बढ़ा रहा है. उन्होंने कहा कि इससे रेलवे नेटवर्क आधुनिक होगा और देशभर में कनेक्टिविटी बेहतर बनेगी. इसी का नतीजा है कि इस साल रेलवे ने त्योहारों और अधिक भीड़ वाले दिनों में 43 हजार से ज्यादा स्पेशल ट्रेन ट्रिप चलाईं, जबकि पिछले साल यह संख्या लगभग 22 हजार थी.
रेलवे में VIP कल्चर खत्म करने की तैयारी
रेलवे अब अपने सिस्टम से वीआईपी संस्कृति को खत्म करने की दिशा में भी काम कर रहा है. इसके तहत मंत्री, जीएम, डीआरएम और अन्य बड़े अधिकारियों को मिलने वाले स्पेशल सैलून (एक कोच वाली विशेष ट्रेन सेवा) को बंद किया जा रहा है. इन कोचों को अब यात्रियों के लिए सामान्य कोच में बदला जाएगा.
कोटा सिस्टम और विशेष सुविधाओं पर भी रोक
सूत्रों के अनुसार, रेलवे टिकटों में कोटा सिस्टम को भी खत्म करने पर काम कर रहा है. मेडिकल इमरजेंसी और कुछ खास परिस्थितियों को छोड़कर सामान्य कोटा से टिकट कन्फर्म करने की व्यवस्था बंद की जाएगी. साथ ही बड़े अधिकारियों के यहां जो कर्मचारी सेवा में लगे थे, उन्हें भी हटाकर उनके मूल विभागों में वापस भेजा जा रहा है.
यात्रियों को मिलेगा सीधा फायदा
रेलवे के इन फैसलों का सीधा फायदा आम यात्रियों को मिलेगा. स्टेशन कम भीड़भाड़ वाले होंगे, ट्रेनों की उपलब्धता बढ़ेगी, टिकट सिस्टम ज्यादा पारदर्शी बनेगा और सुविधाएं बेहतर होंगी. कुल मिलाकर रेलवे का यह कदम यात्रियों के लिए सुविधाजनक, समान और आधुनिक रेल सेवा की ओर एक बड़ा कदम माना जा रहा है.
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