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भारत का पानी भारत में ही रहेगा, पाकिस्तान को नहीं मिलेगा एक भी बूंद, जानिए चिनाब नदी को किस ओर मोड़ा जाएगा?
Chenab River: पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान की ओर जाने वाले जल प्रवाह को लेकर अपना रुख ओर सख्त कर दिया है. सरकार अब यह सुनिश्चित करने की दिशा में काम कर रही है कि पश्चिमी नदियों का जो अतिरिक्त पानी भारत से बाहर बह जाता है, उसका ज्यादा से ज्यादा उपयोग देश के भीतर ही हो सके.
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Chenab River: पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान की ओर जाने वाले जल प्रवाह को लेकर अपना रुख ओर सख्त कर दिया है. सरकार अब यह सुनिश्चित करने की दिशा में काम कर रही है कि पश्चिमी नदियों का जो अतिरिक्त पानी भारत से बाहर बह जाता है, उसका ज्यादा से ज्यादा उपयोग देश के भीतर ही हो सके. वहीं इसी योजना के तहत केंद्र सरकार एक बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट पर तेजी से विचार कर रही है, जिससे चिनाब नदी बेसिन के अतिरिक्त पानी को हिमाचल प्रदेश की ओर मोड़ा जा सके...
चिनाब-ब्यास लिंक टनल- पानी को रोकने और जोड़ने की बड़ी योजना
इस पूरी योजना का सबसे अहम हिस्सा है एक लंबी टनल, जो चिनाब की सहायक नदी के पानी को ब्यास नदी प्रणाली से जोड़ने का काम करेगी. यह करीब 8.7 किलोमीटर लंबी टनल होगी, जिसे हिमाचल प्रदेश के लाहौल घाटी क्षेत्र में बनाया जाएगा. इसके साथ ही एक बड़ा बैराज भी प्रस्तावित है, जिससे पानी को नियंत्रित तरीके से आगे भेजा जा सके. इस पूरे प्रोजेक्ट का मकसद साफ है, जो पानी बेकार बह जाता है, उसे देश के इस्तेमाल में लाया जाए.
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दो बड़े प्रोजेक्ट, हजारों करोड़ का निवेश
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सरकार की योजना सिर्फ एक टनल तक सीमित नहीं है. दो बड़े प्रोजेक्ट मिलकर इस पूरे बदलाव की नींव रख सकते हैं.
एक प्रोजेक्ट चिनाब-ब्यास लिंक टनल है, जिसकी लागत हजारों करोड़ रुपये में है. दूसरा प्रोजेक्ट सलाल डैम के पास सेडिमेंट बायपास टनल है, जिसका उद्देश्य जल प्रवाह को बेहतर बनाना और बांध में गाद जमा होने की समस्या को कम करना है. एक तरफ पानी को सही दिशा में मोड़ने की तैयारी है और दूसरी तरफ उसे लंबे समय तक संभालने की व्यवस्था की जा रही है.
क्यों लिया जा रहा है यह फैसला?
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सरकार का संदेश साफ माना जा रहा है ,भारत अपने संसाधनों का पूरा इस्तेमाल करेगा और किसी भी परिस्थिति में पानी को व्यर्थ नहीं जाने देगा. हाल के सुरक्षा हालात और आतंकी घटनाओं के बाद यह मुद्दा और संवेदनशील हो गया है. इसी संदर्भ में सिंधु जल समझौते को लेकर भारत ने पहले ही सख्त कदम उठाए हैं और अब बुनियादी ढांचे के जरिए दीर्घकालिक समाधान की ओर बढ़ रहा है.
उत्तर भारत को क्या मिलेगा फायदा?
अगर यह योजना पूरी तरह लागू होती है तो इसका सीधा असर कई राज्यों पर पड़ेगा. पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली जैसे राज्यों को पानी की उपलब्धता में राहत मिल सकती है. कृषि पर निर्भर इलाकों के लिए यह बदलाव बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि सिंचाई की समस्या काफी हद तक कम हो सकती है. इसके साथ ही हिमाचल प्रदेश में पनबिजली उत्पादन बढ़ने की संभावना भी जताई जा रही है, जिससे ऊर्जा क्षेत्र को भी फायदा मिलेगा.
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यह सिर्फ एक इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि एक बड़ी रणनीतिक सोच का हिस्सा माना जा रहा है. पानी जैसे सीमित संसाधन को बेहतर तरीके से इस्तेमाल करना और उसे देश के भीतर ही उपयोग में लाना इस योजना का मूल उद्देश्य है.यह कदम विकास, ऊर्जा और जल सुरक्षा, तीनों को एक साथ जोड़ने की कोशिश है, जिसका असर आने वाले वर्षों में उत्तर भारत की जिंदगी पर साफ दिखाई दे सकता है.