कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री सुरेश कलमाड़ी का निधन, 82 साल की उम्र में ली अंतिम सांस
भारतीय ओलंपिक संघ के अध्यक्ष के तौर पर सुरेश कलमाड़ी लंबे समय तक भारतीय खेल प्रशासन का नेतृत्व किया. हालांकि इन खेलों से जुड़े विवादों ने उनके राजनीतिक जीवन को प्रभावित किया.
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Suresh Kalmari Passes Away: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री सुरेश कलमाडी का निधन हो गया. उन्होंने 82 साल की उम्र में पुणे के एक हॉस्पिटल में अंतिम सांस ली. जानकारी के मुताबिक, पिछले कुछ दिनों से सुरेश कलमाडी स्वास्थ्य खराब होने के चलते अस्पताल में एडमिट थे.
सुरेश कलमाडी के निधन की खबर मिलते ही कांग्रेस में शोक की लहर दौड़ गई. पुणे और कांग्रेस ने अपने एक ऐसे नेता को खो दिया, जिनका प्रभाव दशकों तक शहर की राजनीति और विकास पर साफ तौर पर दिखाई देता रहा.
पुणे में ही होगा अंतिम संस्कार
जानकारी के अनुसार, सुरेश कलमाड़ी का पार्थिव शरीर मंगलवार दोपहर 2 बजे तक पुणे स्थित उनके निवास पर अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा. इसके बाद शाम 3:30 बजे वैकुंठ स्मशानभूमि में पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा.
सुरेश कलमाडी को केवल एक राजनेता के रूप में नहीं, बल्कि पुणे की राजनीति के 'किंगमेकर' के तौर पर भी जाना जाता था. उनके राजनीतिक जीवन की शुरुआत से पहले उन्होंने भारतीय वायु सेना में पायलट के रूप में देश सेवा की. इसके बाद राजनीति में कदम रखते हुए वे कई बार पुणे से लोकसभा सांसद चुने गए और केंद्र सरकार में मंत्री के रूप में भी अपनी सेवाएं दीं. पुणे के बुनियादी ढांचे, शहरी विकास और विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं में उनका योगदान आज भी शहर में देखा जा सकता है.
दिल्ली कॉमनवेल्थ गेम्स का किया नेतृत्व
खेलों के क्षेत्र में भी सुरेश कलमाडी का योगदान उल्लेखनीय रहा. भारतीय ओलंपिक संघ के अध्यक्ष के तौर पर उन्होंने लंबे समय तक भारतीय खेल प्रशासन का नेतृत्व किया. साल 2010 में आयोजित दिल्ली कॉमनवेल्थ गेम्स उनके करियर का एक अहम अध्याय रहे. हालांकि इन खेलों से जुड़े विवादों ने उनके राजनीतिक जीवन को प्रभावित किया, लेकिन भारत में खेलों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर स्थापित करने और बड़े खेल आयोजनों की मेजबानी की दिशा में उठाए गए कदमों का श्रेय भी उन्हें दिया जाता है.
इसके अलावा, 'पुणे फेस्टिवल' और 'पुणे इंटरनेशनल मैराथन' जैसे प्रतिष्ठित आयोजनों के जरिए उन्होंने पुणे को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाई. इन आयोजनों ने पुणे को सांस्कृतिक और खेल गतिविधियों के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित किया. उनके निधन की खबर मिलते ही कांग्रेस पार्टी समेत विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं, खेल जगत की हस्तियों और सामाजिक संगठनों ने गहरा शोक जताया.
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