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CM पद छोड़ने को सिद्धारमैया राजी! दिल्ली में बड़ी जिम्मेदारी का ऑफर, क्या कांग्रेस ने सुलझा लिया कर्नाटक विवाद?
कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है. चर्चा है कि सिद्धारमैया जल्द इस्तीफा दे सकते हैं. दिल्ली में कांग्रेस हाईकमान के साथ लंबी बैठक के बाद अटकलें और बढ़ गई हैं, हालांकि पार्टी ने आधिकारिक पुष्टि नहीं की है.
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कर्नाटक की राजनीति इन दिनों बेहद दिलचस्प मोड़ पर खड़ी दिखाई दे रही है. राज्य में कांग्रेस सरकार बनने के करीब ढाई साल बाद अब मुख्यमंत्री पद को लेकर फिर से चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है. राजनीतिक गलियारों में सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या मुख्यमंत्री सिद्धारमैया (Siddaramaiah) अब अपनी कुर्सी छोड़ने जा रहे हैं. दिल्ली में कांग्रेस हाईकमान के साथ हुई लंबी बैठक के बाद इस चर्चा ने और ज्यादा जोर पकड़ लिया है.
सूत्रों के मुताबिक, गुरुवार का दिन कर्नाटक की राजनीति के लिए बेहद अहम साबित हो सकता है. कहा जा रहा है कि सिद्धारमैया अपने पद से इस्तीफा देने का बड़ा फैसला ले सकते हैं. हालांकि पार्टी की ओर से अभी तक किसी भी तरह की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन अंदरखाने चल रही बैठकों और नेताओं की गतिविधियों ने राजनीतिक माहौल को पूरी तरह गरमा दिया है.
ढाई साल वाले फॉर्मूले की फिर चर्चा
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दरअसल, साल 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की शानदार वापसी के बाद ही यह चर्चा शुरू हो गई थी कि मुख्यमंत्री पद को लेकर पार्टी के भीतर एक समझौता हुआ है. माना गया था कि पहले ढाई साल तक सिद्धारमैया मुख्यमंत्री रहेंगे और उसके बाद उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार (D. K. Shivakumar) को मौका दिया जाएगा. हालांकि कांग्रेस नेतृत्व ने कभी भी इस फॉर्मूले को सार्वजनिक रूप से स्वीकार नहीं किया, लेकिन समय-समय पर इसकी चर्चा लगातार होती रही. ऐसे में अब जब ढाई साल का समय लगभग पूरा होने जा रहा है, तब यह मुद्दा फिर से सुर्खियों में आ गया है. दिल्ली में हुई करीब सात घंटे लंबी बैठक ने इन अटकलों को और मजबूत कर दिया. इस बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, डीके शिवकुमार, के.सी. वेणुगोपाल और रणदीप सुरजेवाला मौजूद रहे. इतनी लंबी बैठक के बाद राजनीतिक हलकों में यह माना जाने लगा कि कांग्रेस अब कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन की दिशा में आगे बढ़ सकती है.
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सिद्धारमैया को मिल सकती है राष्ट्रीय जिम्मेदारी
सूत्रों की मानें तो कांग्रेस नेतृत्व ने सिद्धारमैया को राष्ट्रीय राजनीति में बड़ी भूमिका निभाने का प्रस्ताव दिया है. पार्टी चाहती है कि वे दिल्ली की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाएं और कांग्रेस के प्रमुख ओबीसी चेहरों में से एक के तौर पर काम करें. कांग्रेस आने वाले लोकसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए सामाजिक न्याय, जातिगत जनगणना और पिछड़े वर्ग की राजनीति को मजबूत करने की तैयारी में जुटी हुई है. ऐसे में पार्टी को लगता है कि सिद्धारमैया राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी जिम्मेदारी निभा सकते हैं.बताया जा रहा है कि कांग्रेस नेतृत्व ने उन्हें राज्यसभा के जरिए संसद भेजने की भी तैयारी कर ली है. साथ ही बड़ा संगठनात्मक पद देने पर भी विचार किया जा रहा है. पार्टी इस पूरे बदलाव को सम्मानजनक तरीके से करना चाहती है ताकि ऐसा न लगे कि सिद्धारमैया को हटाया जा रहा है. कांग्रेस नेतृत्व ने उन्हें भरोसा दिलाया है कि उनकी राजनीतिक प्रतिष्ठा और क्षेत्रीय हितों का पूरा ध्यान रखा जाएगा.
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राज्यसभा सीटों से जुड़ी रणनीति
इस पूरे घटनाक्रम की टाइमिंग भी काफी अहम मानी जा रही है. कर्नाटक से राज्यसभा सीटों के लिए नामांकन की अंतिम तारीख 8 जून बताई जा रही है. ऐसे में माना जा रहा है कि अगर सिद्धारमैया दिल्ली की राजनीति में जाने को तैयार होते हैं, तो आने वाले दिनों में बड़ा फैसला सामने आ सकता है. हालांकि सूत्रों के अनुसार, सिद्धारमैया ने अभी अंतिम फैसला नहीं लिया है. जानकारी के अनुसार, उन्होंने कुछ समय मांगा है ताकि वे अपने करीबी मंत्रियों और विश्वस्त सहयोगियों से चर्चा कर सकें. इसी बीच गुरुवार सुबह मुख्यमंत्री आवास पर मंत्रिमंडल की ब्रेकफास्ट मीटिंग बुलाई गई है. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह बैठक बेहद महत्वपूर्ण हो सकती है क्योंकि इसके बाद घटनाक्रम तेजी से बदल सकता है.
क्या डीके शिवकुमार बनेंगे अगले मुख्यमंत्री?
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जानकारी देते चलें कि सिद्धारमैया गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस भी कर सकते हैं. पूरे राज्य की नजर अब इसी बात पर टिकी हुई है कि आखिर मुख्यमंत्री क्या ऐलान करते हैं. अगर वे इस्तीफा देते हैं, तो सबसे बड़ा सवाल यही होगा कि अगला मुख्यमंत्री कौन बनेगा. इस सवाल का सबसे चर्चित जवाब डीके शिवकुमार के रूप में सामने आ रहा है. कांग्रेस संगठन में मजबूत पकड़ रखने वाले शिवकुमार लंबे समय से मुख्यमंत्री पद के बड़े दावेदार माने जाते रहे हैं. उनके समर्थकों का मानना है कि अब उनका इंतजार खत्म हो सकता है. पिछले कुछ दिनों में उनके समर्थकों की सक्रियता भी बढ़ी हुई दिखाई दे रही है. हालांकि कांग्रेस नेतृत्व इस बदलाव को किसी गुट की जीत या हार के रूप में पेश नहीं करना चाहता. पार्टी पूरी सावधानी के साथ इस ट्रांजिशन को संभालने की कोशिश कर रही है ताकि सरकार और संगठन दोनों में संतुलन बना रहे. कांग्रेस यह संदेश देना चाहती है कि यह बदलाव पार्टी की रणनीति का हिस्सा है, न कि अंदरूनी संघर्ष का परिणाम.
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बहरहाल, इससे पहले कांग्रेस के महासचिव केसी वेणुगोपाल ने नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाओं को खारिज करने की कोशिश की है. उन्होंने साफ कहा कि दिल्ली में हुई बैठक का एजेंडा केवल राज्यसभा चुनाव और विधान परिषद सीटों को लेकर था. उनके मुताबिक मीडिया में चल रही कई अटकलों में कोई सच्चाई नहीं है. उन्होंने कहा कि बैठक में मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और पार्टी के वरिष्ठ नेता मौजूद थे तथा चर्चा केवल चुनावी रणनीति पर केंद्रित थी. लेकिन राजनीति में अक्सर वही होता है जिसकी चर्चा सबसे ज्यादा होती है. कर्नाटक की राजनीति में भी अब हर किसी की नजर गुरुवार पर टिकी हुई है. अगर सिद्धारमैया बड़ा फैसला लेते हैं, तो यह सिर्फ राज्य की राजनीति ही नहीं बल्कि कांग्रेस की राष्ट्रीय रणनीति के लिए भी बड़ा बदलाव माना जाएगा. आने वाले कुछ घंटे कर्नाटक की सत्ता की तस्वीर पूरी तरह बदल सकते हैं.