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कथावाचक को गार्ड ऑफ ऑनर देकर फंसा ये पुलिस अधिकारी! DGP ने किया जवाब तलब, बिफरे अखिलेश-चंद्रशेखर

कथावाचक पुंडरीक गोस्वामी के स्वागत पर सवाल उठ गए. उन्हें बड़े संवैधानिक पद पर आसीन शख्स जैसा राजकीय सम्मान मिला. वीडियो वायरल हुआ और मामला लखनऊ पुलिस मुख्यालय तक पहुंचा DGP ने नाराजगी जताते हुए एक्शन ले लिया.

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19 Dec 2025
( Updated: 19 Dec 2025
06:35 AM )
कथावाचक को गार्ड ऑफ ऑनर देकर फंसा ये पुलिस अधिकारी! DGP ने किया जवाब तलब, बिफरे अखिलेश-चंद्रशेखर
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कथावाचक पुंडरीक गोस्‍वामी को बहराइच के पुलिस ग्राउंड में गार्ड ऑफ ऑनर दिए जाने पर सवाल खड़े हो गए. वीडियो वायरल हुए, विपक्ष ने तीखा हमला किया और मामला लखनऊ पुलिस मुख्यालय तक पहुंच गया. इसके बाद पूरे प्रकरण पर DGP राजीव कृष्ण ने बहराइच पुलिस अधीक्षक से जवाब मांग लिया. 

दरअसल, मामला 17 नवंबर का है. जब वृंदावन के कथावाचक पुंडरीक गोस्वामी पुलिस लाइन के कार्यक्रम बहराइच पहुंचे थे. यहां उनके लिए रेड कार्पेट बिछाया गया और SP आर एन सिंह ने खुद उन्हें सैल्यूट कर सलामी दी. इसके बाद उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया. जो आमतौर पर संवैधानिक पदों पर आसीन व्यक्तियों या विशेष आधिकारिक मौकों पर ही दिया जाता है. एक कथावाचक को ये सम्मान मिला तो नई बहस छिड़ गई. UP पुलिस पर सवाल उठ गए. 

सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने क्या कहा? 

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कथावाचक को सरकारी और सवैंधानिक पदों जैसा सम्मान मिला तो विपक्ष ने सरकार को घेर लिया. समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने X पर पोस्ट कर लिखा, ‘जब पूरा पुलिस महकमा सलामी में व्यस्त रहेगा तो प्रदेश का अपराधी मस्त रहेगा. पुलिस अपने काम में तो नाकाम है, उसका जो काम है वो तो कर नहीं रही है, बल्कि अपनी सीमित क्षमताओं को और जगह व्यर्थ कर रही है. BJP राज में पनप रहे बेतहाशा अपराध और माफिया राज पर लगाम लगाने की बजाय सलाम-सलाम का खेल खेला जा रहा है. इस घटना का संज्ञान लेने वाला कोई है या वो भी परेड में शामिल है. BJ जाए तो पुलिस सही काम में लग पाए.’

वहीं, भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर आजाद ने कथावाचक को राजकीय सम्मान दिए जाने को संविधान पर हमला बताया. उन्होंने X पर पुंडरीक गोस्वामी का वीडियो शेयर करते हुए लिखा, ‘आस्‍था संविधान से ऊपर हो गई है. भारत कोई मठ नहीं, बल्कि एक संवैधानिक गणराज्य है और राज्य किसी धर्म-विशेष की जागीर नहीं. एक कथावाचक को उत्तर प्रदेश पुलिस की ओर से परेड और सलामी दी जाती है. यह सिर्फ एक प्रशासनिक गलती नहीं, बल्कि संविधान पर खुला हमला है. सलामी और परेड राज्य की संप्रभु शक्ति का प्रतीक होती है. यह सम्मान संविधान, राष्ट्र और शहीदों के नाम पर दिया जाता है. किसी कथावाचक, बाबा या धर्मगुरु का रुतबा बढ़ाने के लिए नहीं. 

DGP ने किया लाइन हाजिर

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कथावाचक को गार्ड ऑफ ऑनर दिए जाने पर DGP राजीव कृष्ण ने नाराजगी जताई. उन्होंने SP से स्पष्टीकरण मांगते हुए जवाब तलब किया. इसके साथ ही पुलिस पुलिस मुख्यालय की ओर से यह स्पष्ट किया गया कि पुलिस परेड ग्राउंड का इस्तेमाल केवल पुलिस प्रशिक्षण, अनुशासनात्मक गतिविधियों और निर्धारित आधिकारिक समारोहों के लिए ही किया जा सकता है. इसके अलावा किसी अन्य उद्देश्य से इसका उपयोग नियमों के विरुद्ध माना जाएगा. 

कौन हैं कथावाचक पुंडरीक गोस्वामी? 

पुंडरीक गोस्वामी का जन्म 20 जुलाई, 1988 को वृंदावन में हुआ था. वह सात साल की उम्र से कथा सुना रहे हैं. पढ़ाई की बात करें तो उन्होंने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से हायर स्टडीज की है. पुंडरीक गोस्वामी विदेशों में भी कथा करते हैं. उनके पिता श्रीभूति कृष्ण गोस्वामी और दादा अतुल कृष्ण गोस्वामी प्रसिद्ध कथावाचक थे. गोस्वामी परिवार करीब 38 पीढ़ियों से भागवत कथा करता आ रहा है. पुंडरीक गोस्वामी प्रमुख रूप से श्रीकृष्ण, श्रीमद्भागवतम, चैतन्य चरितामृत, राम कथा और भगवद गीता पर कथा और प्रवचन देते हैं. इसके अलावा वह निमाई पाठशाला और गोपाल क्लब भी चलाते हैं. इसके साथ-साथ वह सामाजिक कार्यक्रम, गरीब बच्चों की शिक्षा और निशुल्क चिकित्सा शिविर भी चलाते हैं.   

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