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मतदाता सूची विवाद के बीच EC का बड़ा कदम, जजों की 3 मांगें मानीं; जानें क्या बदलेगा
पश्चिम बंगाल SIR ट्रिब्यूनल के जज अब आधार ई-साइन की जगह डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट (DSC) से पोर्टल पर लॉगिन कर सकेंगे. चुनाव आयोग ने जजों की दो अन्य मांगें भी स्वीकार कर ली हैं, जिससे आदेश अपलोड करने की प्रक्रिया आसान और तेज होगी.
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पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े मामलों की सुनवाई कर रहे ट्रिब्यूनल के जजों के लिए चुनाव आयोग कई अहम तकनीकी बदलाव करने जा रहा है. अब जज आधार आधारित ई-साइन के बजाय डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट (DSC) के जरिए पोर्टल पर लॉगिन कर सकेंगे. आयोग इसी सप्ताह के अंत तक इस व्यवस्था को लागू करने की तैयारी में है.
चुनाव आयोग के इन बदलावों का मकसद सुनवाई के बाद आदेश जारी करने और उन्हें पोर्टल पर अपलोड करने की प्रक्रिया को आसान बनाना है. खास बात यह है कि जजों की लंबे समय से चली आ रही कुछ तकनीकी समस्याओं को भी दूर करने की दिशा में कदम उठाए गए हैं.
अब एक साथ अपलोड होंगे कई आदेश
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टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयोग ने ECINET पोर्टल में ऐसा बदलाव किया है, जिससे जज अब एक-एक करके आदेश अपलोड करने के बजाय एक साथ कई आदेश अपलोड कर सकेंगे. दरअसल, बीते एक महीने से अधिक समय में ट्रिब्यूनल ने बड़ी संख्या में आदेश जारी किए थे, लेकिन तकनीकी परेशानियों के कारण कई आदेश पोर्टल पर अपलोड नहीं हो पाए थे. हिंदुस्तान की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, आधार आधारित प्रमाणीकरण को लेकर भी जजों ने आपत्ति जताई थी. ऐसे में नई सुविधा से लंबित आदेशों को अपलोड करने में समय और मेहनत दोनों की बचत होने की उम्मीद है.
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आदेश को अंतिम रूप देने से पहले कर सकेंगे बदलाव
पोर्टल में दूसरा बड़ा बदलाव ड्राफ्ट सेव करने की सुविधा है. अब जज तैयार किए गए आदेश को सीधे अंतिम रूप देने के बजाय पहले ड्राफ्ट के रूप में सुरक्षित रख सकेंगे. इससे जरूरत पड़ने पर आदेश में संशोधन करना आसान होगा. यानी अंतिम आदेश जारी करने से पहले उसकी दोबारा समीक्षा और जरूरी सुधार किए जा सकेंगे.
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दस्तावेजों की सूची में जोड़ी गई 14वीं श्रेणी
SIR से जुड़े मामलों में दस्तावेजों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है. पहले चुनाव आयोग ने पात्रता की जांच के लिए 13 तरह के दस्तावेजों की सूची निर्धारित की थी. करीब दो सप्ताह पहले इसमें 14वीं श्रेणी के रूप में 'कोई अन्य दस्तावेज' भी जोड़ दी गई. इसका मतलब है कि जज जरूरत के अनुसार सूची में शामिल नहीं होने वाले दूसरे उपयुक्त दस्तावेजों पर भी विचार कर सकेंगे. इन्हें मतदाता, चुनावी पंजीकरण अधिकारी (ERO) और जजों के कार्यालय के माध्यम से पोर्टल पर अपलोड किया जा सकता है.
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जजों के कार्यालयों की जगह बदलने पर भी विचार
आयोग के एक अधिकारी के मुताबिक, डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट से लॉगिन की व्यवस्था को इसी सप्ताह मंजूरी मिलने की संभावना है. इसके लिए जरूरी पेन ड्राइव की प्रक्रिया भी चल रही है. इसके अलावा जजों ने अपने कार्यालयों को अधिक सुविधाजनक और केंद्रीय स्थान पर स्थानांतरित करने की मांग की थी. चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) को इस दिशा में आवश्यक प्रक्रिया आगे बढ़ाने का निर्देश दिया है.
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बहरहाल, इन बदलावों से SIR मामलों की सुनवाई के बाद आदेशों को दर्ज करने और उन पर आगे की कार्रवाई करने की प्रक्रिया अधिक सुगम होने की उम्मीद है. हालांकि, नई डिजिटल व्यवस्था लागू होने के बाद इसका वास्तविक असर सामने आएगा.