पाकिस्तान पर मोदी सरकार का एक और वार, चिनाब नदी पर शुरू सावलकोट हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट का काम, समझें मायनें

Sawalkot Hydroelectric Project: भारत ने जम्मू और कश्मीर में चिनाब नदी पर 5,129 करोड़ रुपये की लागत वाली मेगा सावलकोट हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट पर काम शुरू कर दिया है.

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08 Feb 2026
( Updated: 08 Feb 2026
06:16 PM )
पाकिस्तान पर मोदी सरकार का एक और वार, चिनाब नदी पर शुरू सावलकोट हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट का काम, समझें मायनें

पहलगाम हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के साथ तमाम रिश्ते खत्म कर दिए थे. इनमें से एक पाकिस्तान के साथ सिंधू जल संधि को सस्पेंड करना भी था. जिसके बाद पाकिस्तान चिढ़ा हुआ है. अब मोदी सरकार ने इस समझौते से जुड़ा एक और कदम उठाया है. भारत ने जम्मू और कश्मीर में चिनाब नदी पर 5,129 करोड़ रुपये की लागत वाली मेगा सावलकोट हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट पर काम शुरू कर दिया है. 

सावलकोट मेगा प्रोजेक्ट की लागत करीब 5,129 करोड़ रुपये है. सिंधु जल संधि खत्म होने के बाद केंद्र सरकार का यह पहला प्रोजेक्ट है. जो केंद्र सरकार का  'रन ऑफ द रिवर' प्रोजेक्ट कहलाएगा. इसका मतलब, इस परियोजना में पानी का बड़े पैमाने पर भंडारण नहीं किया जाएगा. 

सवालकोट हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट की बड़ी बातें 

  • जम्मू-कश्मीर के उधमपुर और रामबन जिलों में प्रोजेक्ट 
  • दो चरणों में पूरी होगी सावलकोट परियोजना 
  • पहले चरण में 1,406 मेगावाट बिजली उत्पादन प्रोजेक्ट बनेगा
  • दूसरे चरण में 450 मेगावाट बिजली उत्पादन प्रोजेक्ट बनेगा

यह परियोजना चिनाब नदी पर बागलीहार प्रोजेक्ट के नीचे और सलाल डैम के ऊपर स्थित होगी. एक रिपोर्ट में नेशनल हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर कॉर्पोरेशन (NHPC) लिमिटेड के दस्तावेजों के हवाले से प्रोजेक्ट को लेकर बड़ा अपडेट दिया गया है. इन दस्तावेजों में NHPC ने 5 फरवरी को जम्मू और कश्मीर के उधमपुर और रामबन जिलों में इस मेगा प्रोजेक्ट को बनाने के लिए कंपनियों को इनवाइट (टेंडर प्रक्रिया) किया है. वहीं, प्रोजेक्ट को जल्द से जल्द शुरू करने के लिए कंस्ट्रक्शन और इक्विपमेंट सिलेक्शन प्लान किया गया है. 

पिछले साल मिली थी मंजूरी 

पाकिस्तान के साथ सिंधु जल संधि पर स्टे के बाद भारत लगातार चिनाब नदी पर अपने प्रोजेक्ट को बढ़ा रहा है. पर्यावरण मंत्रालय की एक एक्सपर्ट कमेटी ने पिछले साल अक्टूबर में 1,856 MW के प्रोजेक्ट को मंजूरी दी थी. अब, NHPC ने इसे बनाने के लिए टेंडर मंगवाए हैं.

यह भी पढ़े़ं- अमेरिका के साथ ट्रेड डील फाइनल… विदेश मंत्री एस जयशंकर ने समझाया, इस समझौते से भारत को असली फायदा कैसे मिलेगा

NHPC के दस्तावेजों में कहा गया है कि जरूरी शुरुआती तैयारी के बाद बड़े कंस्ट्रक्शन का काम शुरू होगा. सरकार ने अधिकारियों से कहा था कि वे दिसंबर 2026 तक पाकल दुल और किरू प्रोजेक्ट्स को चालू करें. वहीं, मार्च 2028 तक क्वार प्रोजेक्ट को पूरा करें. इसके साथ ही रणनीतिक रूप से संवेदनशील रतले बांध पर कंस्ट्रक्शन में तेज़ी लाएं. इन प्रोजेक्ट्स में सबसे महत्वपूर्ण किश्तवाड़ में पाकल दुल हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट है. 1,000 MW का यह प्रोजेक्ट चिनाब बेसिन का सबसे बड़ा प्रोजेक्ट है. 167 मीटर की ऊंचाई के साथ यह भारत का सबसे ऊंचा बांध है. 

पाकिस्तान की चिंता कैसे बढ़ी? 

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पाकिस्तान की प्यास भारत की नदियां बुझाती हैं. पाकिस्तान में 75 प्रतिशत पानी उन पश्चिमी नदियों से आता है, जो भारत से होकर वहां जाती हैं. पाकिस्तानी की ज्यादातर खेती भी भारतीय नदियों पर ही निर्भर करती है. वहां बांध और नहर प्रणाली भारतीय नदियों के पानी से बनती है. पहलगाम हमले के बाद भारत ने सिंधु जल संधि से जुड़ी सभी बैठकों और प्रक्रियाओं में हिस्सा लेना छोड़ा, फिर अब अपने सभी प्रोजेक्ट को एक्टिव कर दिया. ऐसे में पाकिस्तान की चिंता बढ़ने लगी है. क्योंकि सावलकोट हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट पाकिस्तान में बहने वाली पश्चिमी नदी पर भारत का पहला प्रोजेक्ट है. पहलगाम हमले के बाद जहां ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने जल, थल, नभ से पाकिस्तान को जवाब दिया. वहीं, सिंधु जल समझौता सस्पेंड कर वाटर स्ट्राइक भी की. 

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