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‘कुछ बेरोजगार कॉकरोच की तरह…’ सुप्रीम कोर्ट में क्यों भड़क गए CJI सूर्यकांत, मीडिया और एक्टिविस्ट को भी घेरा
सुप्रीम कोर्ट में सीनियर एडवोकेट की नियुक्ति से जुड़ी एक याचिका दायर की गई थी. जिसमें दलीलें सुनकर चीफ जस्टिस सूर्यकांत भड़क गए.
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देश की शीर्ष अदालत में हजारों मामले पेंडिंग हैं, एक दिन में कई मामलों का निपटारा होता है. दूसरी ओर सुप्रीम कोर्ट को फर्जी याचिका दायर करने वालों से भी निपटना होता है जो अपने मनगढ़त दावों के साथ याचिका लेकर कोर्ट पहुंच जाते हैं. चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने ऐसे RTI एक्टिविस्ट की तुलना कॉकरोच से की है.
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा, कुछ बेरोजगार युवा आगे चलकर मीडिया, सोशल मीडिया और RTI एक्टिविस्ट बन जाते हैं वे फिर सिस्टम पर हमला भी करना शुरू कर देते हैं. CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने कहा, समाज में पहले से ही ऐसे परजीवी मौजूद हैं जो सिस्टम पर हमला करते हैं.
क्यों भड़के CJI सूर्यकांत?
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CJI की ये टिप्पणी ऐसे समय में आईं बेंच ने एक वकील को सीनियर एडवोकेट का दर्जा पाने की कोशिश करने के लिए कड़ी फटकार लगाई थी. जिसमें वकीलों की डिग्री, योग्यता पर भी सवाल उठाते हुए चीफ जस्टिस ने CBI जांच की बात तक कह दी थी. CJI और जॉयमाल्या बागची की बेंच ने याचिकाकर्ता वकील से कहा, ‘पूरी दुनिया शायद सीनियर (एडवोकेट) बनने के योग्य हो, लेकिन कम से कम आप इसके हकदार नहीं हैं.’
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दरअसल, एक वकील ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी. इस याचिका में आरोप लगाया गया कि दिल्ली हाई कोर्ट ने सीनियर एडवोकेट बनाने से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के पुराने निर्देशों को सही तरीके से लागू नहीं किया. वकील का कहना था कि वह तीसरी बार इस मुद्दे को उठा रहे हैं, लेकिन अब तक नियमों का पालन नहीं हुआ. CJI ने कहा, अगर दिल्ली हाई कोर्ट याचिकाकर्ता को सीनियर एडवोकेट का दर्जा देता है, तो सुप्रीम कोर्ट उसके पेशेवर आचरण को देखते हुए उस फैसले को रद्द कर देगा. चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने याचिकाकर्ता की फेसबुक पर की गई पोस्ट में इस्तेमाल भाषा का जिक्र किया. उन्होंने कहा,
‘समाज में पहले से ही ऐसे परजीवी मौजूद हैं जो व्यवस्था पर हमला करते हैं, और क्या आप उनके साथ हाथ मिलाना चाहते हैं? कुछ युवा कॉकरोच की तरह होते हैं, जिन्हें न तो कोई रोजगार मिलता है और न ही किसी पेशे में कोई जगह. उनमें से कुछ मीडिया में चले जाते हैं, कुछ सोशल मीडिया में, कुछ RTI कार्यकर्ता बन जाते हैं और कुछ अन्य तरह के कार्यकर्ता बनकर हर किसी पर हमला करना शुरू कर देते हैं.’
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सीनियर एडवोकेट के तौर पर क्या योग्यता है- CJI
चीफ जस्टिस वाली बेंच ने याचिकाकर्ता से यह भी पूछा कि क्या उनके पास कोई और मुकदमा नहीं है. उन्होंने कहा, ‘क्या यह उस व्यक्ति का आचरण है जो सीनियर एडवोकेट के तौर पर नामित होना चाहता है?’
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बेंच ने साफ किया कि सीनियर एडवोकेट का दर्जा मिलता है न कि उसे पाने के लिए इस तरह की कोशिश की जाती है. उन्होंने याचिकाकर्ता से कहा, आप इसका पीछा कर रहे हैं. क्या यह सही लगता है?’ बेंच ने याचिकाकर्ता से यह भी पूछा कि क्या सीनियर एडवोकेट का दर्जा सिर्फ एक स्टेटस सिंबल है जिसे सजावट के तौर पर रखा जाए?
क्या था मामला?
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दरअसल, एक वकील ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी. इस याचिका में आरोप लगाया गया कि दिल्ली हाई कोर्ट ने सीनियर एडवोकेट बनाने से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के पुराने निर्देशों को सही तरीके से लागू नहीं किया. वकील का कहना था कि वह तीसरी बार इस मुद्दे को उठा रहे हैं, लेकिन अब तक नियमों का पालन नहीं हुआ. जब यह मामला कोर्ट में आया, तो मुख्य न्यायाधीश इस बात से काफी नाराज दिखाई दिए. सुनवाई के दौरान उन्होंने याचिकाकर्ता वकील के व्यवहार और उसकी दलीलों पर भी सवाल उठाए.