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17 सितंबर के बाद अमेरिका को जवाब देंगे मोदी? स्वामी निश्चलानंद की भविष्यवाणी में बड़ा इशारा!

इतिहास गवाह है, ताकतवर अमेरिका कभी किसी का सगा नहीं रहा. तभी तो आज भारत-अमेरिका रिश्तों में भरोसे की दरार है. और इसी दरार के बीच भारत-रूस की सदाबहार दोस्ती पर ट्रंप 500 फ़ीसदी टैरिफ़ का ग्रहण लगाना चाहते हैं. लेकिन क्या वे अपने मंसूबों में कामयाब हो पाएंगे? इसी को लेकर, जन्मदिन से ठीक दो महीने पहले, पुरी पीठ के शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती महाराज ने पीएम मोदी की किस ‘जीत’ की भविष्यवाणी कर डाली है? इसी पर देखिए आज की ये ख़ास रिपोर्ट.

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इतिहास गवाह है कि ताकतवर अमेरिका कभी किसी का स्थायी मित्र नहीं रहा. शायद यही वजह है कि आज भारत-अमेरिका रिश्तों में भरोसे की दरार नजर आ रही है. इसी दरार के बीच अमेरिका, भारत-रूस की सदाबहार दोस्ती पर 500 फीसदी टैरिफ का ग्रहण डालना चाहता है. लेकिन क्या ट्रंप अपने मंसूबों में कामयाब हो पाएंगे? इसी सवाल पर, प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन से ठीक दो महीने पहले, पुरी पीठ के शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती महाराज ने उनकी किस ‘जीत’ की भविष्यवाणी की है? जानिए इस खास रिपोर्ट में.

ताकतवर अमेरिका की नीति ही एक-दूसरे को लड़ाने वाली है और इसका खुलासा करने वाले कोई और नहीं, बल्कि पुरी पीठ के शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती महाराज हैं. लेकिन क्या सच में ऐसा है? अगर अमेरिका के अतीत में झांकें, तो पाएंगे कि 9/11 आतंकी हमले के मास्टरमाइंड ओसामा बिन लादेन को अमेरिका पूरी दुनिया में खोजता रहा, लेकिन उसे वही आतंकी पाकिस्तान में मिला. पूरी दुनिया जानती है कि लादेन पाकिस्तान की सरकार और सेना के संरक्षण के बिना वहां छिपा नहीं रह सकता था, लेकिन अमेरिका सब कुछ जानकर भी चुप रहा. अपने हित साधने की रणनीति में आतंक की इसी फ़ैक्ट्री पर अमेरिका की खामोशी आज तक बरकरार है. भारत की स्वायत्त नीति हमेशा अमेरिका की आंखों में खटकती रही. भारत ने खुद को कभी किसी खेमे में नहीं बांधा और हमेशा अपने राष्ट्रीय हितों के अनुसार निर्णय लिए. यही कारण है कि समय-समय पर अमेरिका द्वारा भारत के साथ विश्वासघात भी देखा गया है.

ताज़ा उदाहरण भारत-पाकिस्तान के बीच हुए युद्धविराम को ले लीजिए. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने दोनों मुल्कों के बीच सीज़फायर कराने का क्रेडिट लिया, जबकि मोदी सरकार ने उनके इसी दावे को खारिज करते हुए पाकिस्तान की पोल खोल दी. यह बताया गया कि पाकिस्तान की गुहार पर ही संघर्ष विराम रेखा खिंची गई है, न कि युद्ध समाप्त हुआ है. इससे पहले अमेरिका ने अपने प्रतिबंधों का डर उस वक्त दिखाया था, जब भारत ने सबके सामने रूस से एस-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम खरीदा, जिसका इस्तेमाल हाल ही के 'ऑपरेशन सिंदूर' में हुआ. अब एक बार फिर अमेरिका टैरिफ का डर दिखा रहा है. रूस से भारत सस्ता कच्चा तेल न खरीद सके, इसके लिए अमेरिकी सीनेट में एक बिल लाने की तैयारी हो रही है, ताकि अमेरिका आने वाले भारतीय उत्पादों पर 500 फ़ीसदी टैरिफ लगाया जा सके. ये सारे वे सबूत हैं, जो अमेरिका की दोहरी नीति और दोस्त बनकर दगाबाज़ी को दिखाते हैं लेकिन क्या 17 सितंबर के बाद अमेरिका की यही चालाकियाँ चल पाएंगी? आज यह सवाल इसलिए अहम है क्योंकि अमेरिका का असली चेहरा दिखाकर शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती महाराज ने प्रधानमंत्री मोदी की जीत की भविष्यवाणी की है."

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बीते दिनों स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने हिंदू राष्ट्र के प्रभाव को लेकर आयोजित एक संगोष्ठी को संबोधित किया। यहां उन्होंने हिंदू राष्ट्र को देश की ज़रूरत बताया.  इस बात पर ज़ोर दिया कि सिर्फ अपनी पेट-पूजा तक सीमित रहने से काम नहीं चलेगा. हर सनातनी को स्वयं के बजाय राष्ट्र और धर्म हित पर चिंतन करते हुए उसके लिए योगदान देना चाहिए. कुछ लोग पाश्चात्य संस्कृति को अपनाकर अपने को गौरवान्वित महसूस करते हैं. अब हिंदू राष्ट्र बनाने के लिए हिंदुओं को आगे आना ही होगा। इसी कड़ी में शंकराचार्य ने जब अमेरिका का असली चेहरा दिखाया, तो पीएम मोदी की भी तारीफ़ की. शंकराचार्य ने इस बात का खुलासा किया कि अमेरिका में जनकल्याण का भाव नहीं है. हालांकि भारत के ख़िलाफ़ वह कितनी भी कूटनीति कर ले, वह कभी सफल नहीं होगा, क्योंकि पीएम मोदी कूटनीति के माहिर खिलाड़ी हैं। वह हर दांव का जवाब देने में सक्षम हैं. इसका मतलब साफ है कि अमेरिका के हर वार पर भारत के पलटवार में पीएम मोदी की जीत होगी. पीएम मोदी की जीत को लेकर शंकराचार्य की यही भविष्यवाणी ऐसे वक़्त में सामने आई है, जब दो महीने बाद, सितंबर में पीएम मोदी का जन्मदिवस मनाया जाएगा. 

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