जिस पर देशकरता है भरोसा
Advertisement

हरिद्वार की नारायणी शिला क्यों है पितृ कर्म के लिए खास? जानिए इसकी प्राचीन मान्यता और कथा

गंगा के पवित्र तट पर स्थित नारायणी शिला इसलिए पितृ पक्ष के दौरान खास आकर्षण का केंद्र बन जाती है. आस्था रखने वालों के लिए यह वह स्थान है, जहां वे अपने पूर्वजों का स्मरण करते हुए उनकी शांति की कामना करते हैं.

हरिद्वार की नारायणी शिला क्यों है पितृ कर्म के लिए खास? जानिए इसकी प्राचीन मान्यता और कथा
Image Credit: AI Generated
Advertisement

धर्मनगरी हरिद्वार को गंगा स्नान और मोक्ष की नगरी कहा जाता है, लेकिन यहां की एक शिला ऐसी भी है जो पितरों की मुक्ति का द्वार मानी जाती है. वह है नारायणी शिला. हरिद्वार में गंगा तट पर स्थित यह प्राचीन तीर्थस्थल पिंडदान, तर्पण और श्राद्ध कर्म के लिए पूरे भारत में प्रसिद्ध है. गया जी के बाद इसे पितृ कर्म के लिए सर्वोच्च स्थान माना जाता है. खासकर पितृ पक्ष में यहां देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु अपने पूर्वजों की शांति के लिए पहुंचते हैं.

पितृ पक्ष में उज्जैन का सिद्धवट क्यों है खास? यहां होती है पिंडदान और तर्पण की परंपरा

भगवान विष्णु को समर्पित है नारायणी शिला

नारायणी शिला मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है. धार्मिक मान्यताओं और स्कंद पुराण के अनुसार यह शिला भगवान विष्णु के श्रीविग्रह का हृदय स्थल है. मान्यता है कि यहां की गई प्रार्थना सीधे भगवान विष्णु तक पहुंचती है और यहां पिंडदान करने से पितरों को मोक्ष मिलता है.

Advertisement

गयासुर से जुड़ी है प्राचीन पौराणिक कथा

वायु पुराण और स्कंद पुराण के केदारखंड में गयासुर की कथा का उल्लेख मिलता है. कथा के अनुसार, गयासुर ने नारद जी से अपने पापों से मुक्ति का उपाय पूछा. नारद जी ने कहा कि कठोर तप से या भगवान से युद्ध कर उनके हाथों मोक्ष प्राप्त किया जा सकता है. असुर बुद्धि से गयासुर बद्रीधाम में भगवान बदरीनाथ के दर्शन करने गया, लेकिन मंदिर के कपाट बंद होने पर क्रोधित होकर वह भगवान के कमलासन को उठाकर ले जाने लगा.

भगवान विष्णु और गयासुर के बीच हुआ युद्ध

Advertisement

तभी भगवान विष्णु ने केस-लोचन तीर्थ में उसे रोका. दोनों में घोर युद्ध हुआ. युद्ध के दौरान भगवान ने गदा से प्रहार किया और गयासुर ने कमलासन को ढाल बनाकर बचाव किया. इस प्रहार से कमलासन तीन भागों में टूट गया. इसका एक भाग हरिद्वार में गिरा, जहां नारायणी शिला मंदिर स्थापित हुआ, दूसरा भाग बद्रीनाथ के ब्रह्मकपाल में और तीसरा भाग गया जी में गिरा.

पितृ पक्ष में कौवों को ही क्यों खिलाया जाता है श्राद्ध का भोजन? जानें धार्मिक मान्यता और पौराणिक कथा

आस्था, परंपरा और गंगा का संगम

यह भी पढ़ें

गंगा के पवित्र तट पर स्थित नारायणी शिला इसलिए पितृ पक्ष के दौरान खास आकर्षण का केंद्र बन जाती है. आस्था रखने वालों के लिए यह वह स्थान है, जहां वे अपने पूर्वजों का स्मरण करते हुए उनकी शांति की कामना करते हैं.

Tags

Advertisement
टिप्पणियाँ 0
G
Guest (अतिथि)
LIVE
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
शॉर्ट्स
वेब स्टोरीज़
होम वीडियो खोजें