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कहां है देवी गायत्री को समर्पित एकमात्र मंदिर, त्रिदेवियों के दिव्य दर्शन और आध्यात्मिक अनुभव का स्थान

मां गायत्री को समस्त वेदों की जननी माना जाता है. इस कारण यहां आने वाले श्रद्धालु गहरी आस्था के साथ पूजा-अर्चना करते हैं. मंदिर परिसर में भक्तों के लिए धर्मशाला भी उपलब्ध है, जिससे दूर-दूर से आने वाले तीर्थयात्रियों को सुविधा मिलती है.

कहां है देवी गायत्री को समर्पित एकमात्र मंदिर, त्रिदेवियों के दिव्य दर्शन और आध्यात्मिक अनुभव का स्थान
Image Credits:Gujrat shantipeeth/ Incredible india
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भारत को मंदिरों का देश भी कहा जाता है. देश-दुनिया में अद्भुत ऐसे कई मंदिर हैं, जो भक्ति के साथ भव्यता को समेटे हुए हैं. ऐसा ही एक शक्ति को समर्पित मंदिर गुजरात के द्वारका में स्थित है. 

 कहां है देवी गायत्री को समर्पित एकमात्र मंदिर

द्वारका से सिर्फ 5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित गायत्री शक्तिपीठ आध्यात्मिक शांति और भक्ति का एक पावन धाम है. वर्ष 1983 में स्थापित यह मंदिर द्वारका क्षेत्र में देवी गायत्री को समर्पित एकमात्र मंदिर है. यहां भक्त बड़ी श्रद्धा से मां गायत्री के दर्शन करने आते हैं. यह स्थान द्वारका तीर्थयात्रा के दौरान भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है.

मां गायत्री को समस्त वेदों की जननी माना जाता है

मां गायत्री को समस्त वेदों की जननी माना जाता है. इस कारण यहां आने वाले श्रद्धालु गहरी आस्था के साथ पूजा-अर्चना करते हैं. मंदिर परिसर में भक्तों के लिए धर्मशाला भी उपलब्ध है, जिससे दूर-दूर से आने वाले तीर्थयात्रियों को सुविधा मिलती है. हर साल मंदिर के स्थापना दिवस पर भव्य अन्नकूट का आयोजन किया जाता है, जिसमें विभिन्न प्रकार की मिठाइयां बनाई जाती हैं और देवी को भोग लगाया जाता है.

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एक ही स्थान पर तीनों देवियों के दिव्य दर्शन होते हैं

खास बात है कि मंदिर में प्रवेश करते ही भक्तों की नजर सबसे पहले मां गायत्री की शांत और सुंदर मूर्ति पर पड़ती है. मां गायत्री सफेद हंस पर विराजमान हैं. उनकी बाईं ओर मां सावित्री और दाईं ओर मां कुंडलिनी की मूर्तियां स्थापित हैं. इस प्रकार एक ही स्थान पर तीनों देवियों के दिव्य दर्शन होते हैं. मंदिर की छत पर बनी त्रिमूर्ति की सुंदर पेंटिंग देखकर हर कोई मंत्रमुग्ध हो जाता है. इसमें भगवान ब्रह्मा, विष्णु और महेश को तारों और आकाशगंगाओं के बीच दर्शाया गया है. शक्तिपीठों का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है.

भक्त यहां शांति और आशीर्वाद लेने आते हैं

पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान ब्रह्मा ने यज्ञ कर देवी शक्ति से ब्रह्मांड की रचना में सहायता मांगी. देवी शक्ति ने भगवान शिव के साथ मिलकर ब्रह्मांड के संचालन में योगदान दिया. मान्यता है कि देवी शक्ति का मानव रूप सती के रूप में हुआ और उनका विवाह भगवान शिव से हुआ. यह मंदिर भक्ति और आध्यात्मिक शांति का केंद्र है. यहां विशेष आरती और अन्य धार्मिक अनुष्ठान बड़े ही श्रद्धापूर्वक किए जाते हैं. भक्त यहां शांति और आशीर्वाद लेने आते हैं.

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गायत्री शक्तिपीठ घूमने का सबसे अच्छा समय कौनसा है

मंदिर गायत्री परिवार के सदस्यों के लिए भी एक पसंदीदा मिलन स्थल बना हुआ है. गायत्री शक्तिपीठ घूमने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर-नवंबर का महीना है, जब द्वारका में धाम यात्रा का भव्य उत्सव मनाया जाता है. इसके अलावा जन्माष्टमी के अवसर पर भी यहां भक्तों की भारी भीड़ होती है. इस दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रम, उपवास और धार्मिक जुलूस आयोजित किए जाते हैं. अपनी आध्यात्मिक यात्रा को और समृद्ध बनाने के लिए भक्त आस-पास के प्रसिद्ध स्थलों का भी भ्रमण करते हैं. द्वारकाधीश मंदिर, रुक्मिणी देवी मंदिर और नागेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर यहां से निकट हैं. जो लोग प्रकृति का आनंद लेना चाहते हैं, वे शिवराजपुर बीच जा सकते हैं.

द्वारका की पवित्र यात्रा को पूरा करने वाले भक्त यहां अवश्य आते हैं 

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मंदिर के आस-पास की दुकानों में मूर्तियां, मालाएं, अगरबत्तियां और अन्य धार्मिक सामग्री आसानी से उपलब्ध होती है. स्थानीय बाजारों में गुजरात की पारंपरिक हस्तकला और कपड़ों की खरीदारी भी की जा सकती है. गायत्री शक्तिपीठ न सिर्फ धार्मिक महत्व का स्थान है, बल्कि आंतरिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा पाने का भी एक अनुपम केंद्र है. द्वारका की पवित्र यात्रा को पूरा करने वाले भक्त यहां अवश्य आते हैं और मां गायत्री का आशीर्वाद लेकर लौटते हैं.

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