Advertisement

Loading Ad...

कहां है दंतेश्वरी मंदिर, जहां चमत्कारी स्तंभ बताता है कि मनोकामना पूरी होगी या नहीं, जानें क्या करने से मां से मांगी इच्छा होती है पूरी

मां भगवती का शक्तिशाली दंतेश्वरी मंदिर बहुत पुराना है और पूजा-पाठ भी पुरातन तरीके से की जाती है. इस मंदिर में सिले हुए कपड़े पहनकर आना मना होता है. मंदिर में धोती या लुंगी पहनकर ही मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश मिलता है.

Image Credits: FACEBOOK/Maa Danteshwari Temple Dantewada
Loading Ad...

देश के लगभग हर कोने में मां भगवती के कई ऐसे मंदिर हैं, जो सच्ची आस्था और चमत्कार के प्रतीक हैं. कुछ शक्तिपीठ मंदिरों में दर्शन मात्र से ही मनोकामना पूरी होती है, तो कई चमत्कार आस्था पर भारी पड़ते हैं. 

चमत्कारी स्तंभ बताता है कि मनोकामना पूरी होगी या नहीं

ऐसा ही एक मंदिर छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में स्थित है, जहां स्तंभ को पकड़कर पता चलता है कि भक्त की मुराद पूरी होगी या नहीं. ये अंधविश्वास नहीं, बल्कि भक्तों की मां के प्रति आस्था है.

Loading Ad...

क्या करने से मां से मांगी इच्छा होती है पूरी

Loading Ad...

छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में मां भगवती का शक्तिशाली दंतेश्वरी मंदिर है, जहां छह भुजाओं में मां अस्त्र-शस्त्र, शंख और असुर के बाल और कपाल को लिए विराजमान हैं. मां का रूप अत्यंत प्रभावी और मनोकामना को पूर्ण करने वाला है, लेकिन मंदिर में मौजूद स्तंभ मां के प्रति भक्तों के विश्वास को और बढ़ा देता है. स्थानीय मान्यता है कि मंदिर के प्रांगण में मौजूद स्तंभ को अगर दोनों बाहों से समेट लिया जाए तो मां से मांगी इच्छा जरूर पूरी होती है और अगर भक्त ऐसा नहीं कर पाता है, तो उसकी अर्जी पूरी नहीं होती. भक्त दूर-दूर से मां के इसी चमत्कार को देखने के लिए आते हैं.

मंदिर के गर्भगृह में कैसे प्रवेश मिलता है

Loading Ad...

मां भगवती का शक्तिशाली दंतेश्वरी मंदिर बहुत पुराना है और पूजा-पाठ भी पुरातन तरीके से की जाती है. इस मंदिर में सिले हुए कपड़े पहनकर आना मना होता है. मंदिर में धोती या लुंगी पहनकर ही मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश मिलता है. अगर कोई भक्त किसी कारणवश सामान्य कपड़ों में आ जाता है, तो मंदिर प्रशासन की तरफ से धोती दी जाती है, जिससे भक्त मां के दर्शन आराम से कर सके.

मां को दंतेवाड़ा और बस्तर की आराध्य देवी के रूप में पूजा जाता है

यह भी पढ़ें

400 साल से ज्यादा पुराने मंदिर को लेकर कई किंवदंतियां और पौराणिक कथाएं मौजूद हैं. दक्षिण भारतीय शैली में बने मां दंतेश्वरी मंदिर को लेकर कहा जाता है कि यहां मां सती का दांत गिरा, जिसकी वजह से मंदिर का नाम दंतेश्वरी और जगह का नाम दंतेवाड़ा पड़ा. मां को दंतेवाड़ा और बस्तर की आराध्य देवी के रूप में पूजा जाता है. इसके साथ ही मंदिर काकतीय वंश से भी जुड़ा है. माना जाता है कि काकतीय वंश के राजा अन्नमदेव ने मां दंतेश्वरी के दर्शन किए थे और उनकी कृपा से राजा को बड़ा राज्य मिला था. मंदिर के पास नदी के किनारे मां के पदचिह्न भी मौजूद हैं. भक्त मां दंतेश्वरी के दर्शन के बाद पदचिह्नों के दर्शन जरूर करते हैं.

LIVE
अधिक →

Advertisement

Loading Ad...
Loading Ad...
Loading Ad...
अधिक →

Advertisement

Loading Ad...