महादेव के इस अदभुत मंदिर का विश्वकर्मा ने स्वयं किया था निर्माण, देवालय के अंदर है ‘स्वर्ग जाने का मार्ग’

सोफा मंदिर गौनाहा प्रखंड के दोमाठ गांव में स्थित है और भारत-नेपाल सीमा के बहुत निकट है. मंदिर का इतिहास बेहद पुराना माना जाता हैय किंवदंतियों के अनुसार, इस मंदिर का निर्माण स्वयं देवशिल्पी भगवान विश्वकर्मा ने शुरू किया था. कहा जाता है कि विश्वकर्मा ने यहां मंदिर की नींव रखी, लेकिन किसी कारणवश इसे पूरा नहीं कर पाए.

महादेव के इस अदभुत मंदिर का विश्वकर्मा ने स्वयं किया था निर्माण, देवालय के अंदर है ‘स्वर्ग जाने का मार्ग’

भारत को 'मंदिरों का देश' कहा जाता है. देश के हर हिस्से में अद्भुत और चमत्कार से भरे देवालय हैं, जिनकी न केवल वास्तुकला बेहद खूबसूरत है, बल्कि मान्यता है कि यहां भक्तों की हर मनोकामना भी पूरी होती है. ऐसा ही महादेव का एक मंदिर बिहार के चंपारण जिले में स्थित है, जिसे आस्था और पर्यटन का संगम भी कहा जाता है.

कहां है ये अदभुत मंदिर?

बिहार के पश्चिमी चंपारण जिले में स्थित सोफा मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि प्रकृति प्रेमियों और पर्यटकों के लिए भी एक आकर्षण का स्थान है. मंगुराहा रेंज, वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (डिवीजन-1) के अंतर्गत पंडई नदी के तट पर बसा यह मंदिर अपनी प्राचीन मान्यताओं, शांत वातावरण और शानदार संरचना के कारण श्रद्धालुओं के साथ ही पर्यटकों का भी ध्यान खींचता है.

भगवान विश्वकर्मा ने स्वयं किया था मंदिर का निर्माण

सोफा मंदिर गौनाहा प्रखंड के दोमाठ गांव में स्थित है और भारत-नेपाल सीमा के बहुत निकट है. मंदिर का इतिहास बेहद पुराना माना जाता हैय किंवदंतियों के अनुसार, इस मंदिर का निर्माण स्वयं देवशिल्पी भगवान विश्वकर्मा ने शुरू किया था. कहा जाता है कि विश्वकर्मा ने यहां मंदिर की नींव रखी, लेकिन किसी कारणवश इसे पूरा नहीं कर पाए. इसी वजह से मंदिर की संरचना आज भी कुछ अधूरी-सी लगती है, लेकिन इसकी आध्यात्मिक शक्ति और सुंदरता में कोई कमी नहीं है. 

देवालय के अंदर है ‘स्वर्ग जाने का मार्ग’ 

मंदिर के अंदर सबसे खास आकर्षण भूमि की ओर जाती सीढ़ियां हैं, जिन्हें ‘स्वर्ग जाने का मार्ग’ भी कहा जाता है.  ये सीढ़ियां नीचे की ओर जाती हैं और गहराई में जाकर समाप्त होती हैं. मान्यता है कि इन सीढ़ियों से नीचे उतरने पर स्वर्ग लोक का द्वार आता है. कई भक्त इन सीढ़ियों पर चढ़कर या उतरकर अपनी मनोकामनाएं मांगते हैं और विश्वास है कि यहां की पूजा से सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। मंदिर में भगवान शिव के साथ ही अन्य देवी-देवताओं की पूजा होती है।

पर्यटन की दृष्टि से भी खास है सोफा मंदिर

धार्मिक महत्व के साथ-साथ सोफा मंदिर पर्यटन की दृष्टि से भी खास है. यह मंदिर वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के हरे-भरे जंगलों और पंडई नदी के किनारे बसा है. आसपास घने जंगल, पहाड़ियां, नदी का बहता पानी और वन्यजीवों की मौजूदगी इसे एक पिकनिक स्पॉट बनाती है. वाल्मीकि टाइगर रिजर्व भारत के प्रमुख टाइगर रिजर्व में से एक है, जहां बाघ, तेंदुआ, हिरण, जंगली सुअर और विभिन्न पक्षी देखे जा सकते हैं.सोफा मंदिर से निकट होने के कारण पर्यटक एक साथ धार्मिक यात्रा और जंगल सफारी का आनंद ले सकते हैं.

मंदिर के आसपास का इलाका शांत और प्रदूषण मुक्त है. नेपाल सीमा के पास होने से वहां के भक्त भी यहां आते हैं, जिससे यह क्षेत्र सांस्कृतिक आदान-प्रदान का भी केंद्र बन गया है. 

 जंगल सफारी के लिए पहले से अनुमति लेनी पड़ती है

यह भी पढ़ें

पर्यटन विभाग और स्थानीय प्रशासन सोफा मंदिर को बेहतर सुविधाएं देने के लिए प्रयासरत हैं. सड़क मार्ग से पहुंच आसान है और आसपास पार्किंग, छोटे-मोटे भोजनालय और विश्राम स्थल उपलब्ध हैं. हालांकि, जंगल क्षेत्र होने के कारण पर्यटकों को वन विभाग के नियमों का पालन करना जरूरी है और जंगल सफारी के लिए पहले से अनुमति लेनी पड़ती है.

Tags

Advertisement

टिप्पणियाँ 0

LIVE
Advertisement
Podcast video
अल्लाह का नाम लेकर Yogi के लिए दुश्मनों से लड़ गए मौलाना ने सबको धो डाला ! Kaukab Mujtaba
Advertisement
Advertisement
शॉर्ट्स
वेब स्टोरीज़
होम वीडियो खोजें