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उत्तराखंड का सिद्धबली धाम: जहां कोई भक्त खाली हाथ नहीं लौटता, CM धामी भी हुए नतमस्तक

खोह नदी तट पर स्थित यह मंदिर 84 सिद्धपीठों में से एक है. मंदिर को लेकर पौराणिक कहानियां भी हैं, जिसके अनुसार, एक बार गुरु गोरखनाथ (कलयुग में शिव के अवतार) अपने गुरु मछेंद्रनाथ को मुक्त कराने के लिए जा रहे थे. इसी स्थान पर बजरंगबली ने रूप बदलकर उनका रास्ता रोक लिया, जिसके बाद दोनों के बीच भयंकर युद्ध हुआ.

उत्तराखंड का सिद्धबली धाम: जहां कोई भक्त खाली हाथ नहीं लौटता, CM धामी भी हुए नतमस्तक
Image Credits: Video Grab
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उत्तराखंड की पावन धरती को यूं ही 'देवभूमि' नहीं कहा जाता. यहां के कण-कण में देवताओं का वास है और हर पर्वत शिखर किसी न किसी दिव्य शक्ति की कहानी बयां करता है. देवभूमि के कोटद्वार में, श्री सिद्धबली हनुमान जी विराजमान है. 

बाबा सिद्धबली झोली को भरते है खुशियों से

यह एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि लाखों भक्तों की अटूट आस्था, मौन साधना और चमत्कारी कल्पवृक्ष का केंद्र है. मान्यता है कि यहां आने वाला कोई भी भक्त खाली हाथ नहीं लौटता और बाबा सिद्धबली झोली को खुशियों से भरते हैं.

CM धामी ने शेयर किया सिद्धबली हनुमान से जुड़ा अनुभव

मंगलवार को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी श्री सिद्धबली हनुमान जी मंदिर पर प्रकाश डाला. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मंदिर के लिए वीडियो पोस्ट किया, जिसके साथ उन्होंने लिखा, "पौड़ी गढ़वाल जिले के कोटद्वार में स्थित प्रसिद्ध सिद्धबली मंदिर भगवान श्री हनुमान जी की आस्था, भक्ति और कृपा का पवित्र संगम है. प्राकृतिक सुंदरता के बीच बना यह मंदिर भक्तों को शांति और सकारात्मक ऊर्जा से भर देता है. यहां हर दिन दूर-दूर से श्रद्धालु बजरंगबली के दर्शन और आशीर्वाद लेने आते हैं. अगर आप उत्तराखंड आएं, तो इस पवित्र और दिव्य मंदिर के दर्शन जरूर करें और यहां की आध्यात्मिक शांति का अनुभव करें."

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84 सिद्धपीठों में से एक है खोह नदी तट पर स्थित सिद्धबली धाम

खोह नदी तट पर स्थित यह मंदिर 84 सिद्धपीठों में से एक है. मंदिर को लेकर पौराणिक कहानियां भी हैं, जिसके अनुसार, एक बार गुरु गोरखनाथ (कलयुग में शिव के अवतार) अपने गुरु मछेंद्रनाथ को मुक्त कराने के लिए जा रहे थे. इसी स्थान पर बजरंगबली ने रूप बदलकर उनका रास्ता रोक लिया, जिसके बाद दोनों के बीच भयंकर युद्ध हुआ.

जब युद्ध में कोई पराजित नहीं हुआ, तब हनुमान जी अपने वास्तविक रूप में आए और वचन दिया कि वे इस स्थान पर सदैव प्रहरी के रूप में विराजमान रहेंगे.

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इसी स्थान पर तपस्या के बाद सिद्ध बाबा नामक पूजनीय संत को हनुमान जी के साक्षात दर्शन हुए थे और उनकी सिद्धियां प्राप्त हुई थीं. उन्हीं सिद्ध संत (सिद्ध बाबा) और हनुमान जी के सम्मिलित रूप को 'सिद्धबली' कहा गया.

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