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देवभूमि का वो सिद्धपीठ जहां पूरी होती है हर मन्नत, सीएम धामी ने वीडियो शेयर कर दिखाई भव्यता

मां कुटेटी देवी मंदिर न केवल एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है, बल्कि एक ऐसा सिद्धपीठ भी है, जहां का शांत वातावरण और दिव्य ऊर्जा श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभूति कराती है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, मां कुटेटी देवी का इतिहास आदि गुरु शंकराचार्य के काल तथा राजस्थान के कोटा राजघराने की अनन्य भक्ति से जुड़ा हुआ है.

Image Credits: pushkardhami/x
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देवभूमि उत्तराखंड की पावन धरा पर स्थित मां कुटेटी देवी मंदिर न केवल स्थानीय लोगों की अगाध श्रद्धा का केंद्र है, बल्कि यहां आने वाले प्रत्येक श्रद्धालु को मानसिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा की अनुभूति भी कराता है. मान्यता है कि मां कुटेटी देवी से मांगी गई मनोकामनाएं अवश्य पूर्ण होती हैं. 

सीएम धामी ने शेयर किया मंदिर का वीडियो

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी हाल ही में अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर मंदिर की भव्यता और आध्यात्मिक महत्व का उल्लेख करते हुए एक विशेष वीडियो साझा किया. उन्होंने लिखा, "उत्तरकाशी की सुरम्य वादियों और प्राकृतिक सौंदर्य के मध्य स्थित मां कुटेटी देवी मंदिर श्रद्धा, आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा का पावन केंद्र है. मां आदिशक्ति को समर्पित यह सिद्धपीठ अपने दिव्य वातावरण और धार्मिक महत्व के कारण श्रद्धालुओं के बीच विशेष स्थान रखता है. उत्तरकाशी जनपद आगमन पर इस पावन मंदिर के दर्शन अवश्य करें."

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यहां दिव्य ऊर्जा श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभूति कराती है

मां कुटेटी देवी मंदिर न केवल एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है, बल्कि एक ऐसा सिद्धपीठ भी है, जहां का शांत वातावरण और दिव्य ऊर्जा श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभूति कराती है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, मां कुटेटी देवी का इतिहास आदि गुरु शंकराचार्य के काल तथा राजस्थान के कोटा राजघराने की अनन्य भक्ति से जुड़ा हुआ है.

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नवविवाहित दंपति यहां संतान प्राप्ति की कामना लेकर आते हैं

मंदिर से जुड़ी मान्यता के अनुसार, नवविवाहित दंपति यहां संतान प्राप्ति की कामना लेकर आते हैं. माता के यहां विराजमान होने से संबंधित एक पौराणिक कथा भी प्रचलित है. कहा जाता है कि माता अपने एक भक्त की प्रार्थना पर राजस्थान से उत्तरकाशी पहुंचीं और इंद्रावती नदी के समीप स्थित पहाड़ी पर विराजमान हुईं.

मंदिर से जुड़ी ख़ास कहानी

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किंवदंती के अनुसार, राजस्थान के कोटा के एक महाराजा गंगोत्री यात्रा पर आए थे. यात्रा के दौरान उनका धन से भरा बैग खो गया. उन्होंने उत्तरकाशी स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर में प्रार्थना की कि यदि उनका बैग मिल गया तो वे अपनी पुत्री का विवाह स्थानीय युवक से करेंगे. कुछ समय बाद उनका बैग मिल गया और उन्होंने अपनी प्रतिज्ञा के अनुसार पुत्री का विवाह एक स्थानीय युवक से कर दिया.

किस स्थान पर मां कुटेटी देवी मंदिर का निर्माण कराया

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हालांकि, राजकुमारी इस बात से दुखी थीं कि उनकी कुलदेवी मां कुटेटी उनसे दूर रह गई हैं. मान्यता है कि माता ने स्वप्न में राजकुमारी को दर्शन देकर कहा कि वह उनके खेत में मिलेंगी. अगले दिन राजकुमारी को इंद्रावती नदी के समीप स्थित खेत में देवी के बताए अनुसार तीन पत्थर मिले. इसके बाद ग्रामीणों ने उसी स्थान पर मां कुटेटी देवी मंदिर का निर्माण कराया, जो आज श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है.

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