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कालभैरव: भगवान शिव के इस रौद्र रूप की पूजा से मिलते हैं कई लाभ, कृपा पाने के लिए करें ये काम, नोट कर लें शुभ-अशुभ समय
काल भैरव की कृपा पाने के लिए काल भैरव मंदिर में सरसों के तेल का दीपक जलाएं और उन्हें जलेबी व नारियल का भोग लगाएं.काले कुत्ते को मीठी रोटी खिलाना अत्यंत शुभ माना जाता है.
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सनातन धर्म में पंचांग का विशेष महत्व है. इसके पांच अंगों (नक्षत्र, वार, तिथि, करण और योग) के आधार पर ही दिन की शुरुआत और शुभ-अशुभ समय का निर्धारण किया जाता है. शुक्रवार (10 अप्रैल) को बैशाख मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि रहेगी. इस दिन कालभैरव की उपासना का विशेष महत्व है, जिसे मासिक कालाष्टमी भी कहते हैं.
कालाष्टमी के दिन किसी पूजा होती है
इस दिन को काला अष्टमी के नाम से भी जाना जाता है. यह तिथि हर महीने कृष्ण पक्ष की अष्टमी को आती है. कालाष्टमी के दिन कालभैरव के भक्त उनकी विशेष पूजा करते हैं और उपवास भी रखते हैं. इस दिन कालभैरव की कृपा प्राप्त करने के लिए भक्त पूरे दिन व्रत रखकर उनकी आराधना करते हैं.
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कब है कालाष्टमी?
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दृक पंचांग के अनुसार 10 अप्रैल को सूर्योदय सुबह 6 बजकर 1 मिनट पर होगा जबकि सूर्यास्त शाम 6 बजकर 44 मिनट पर होगा. इस दिन तिथि अष्टमी रात 11 बजकर 15 मिनट तक रहेगी. इसके बाद नवमी तिथि शुरू हो जाएगी, हालांकि उदयातिथि के अनुसार पूरे दिन अष्टमी का ही मान होगा. नक्षत्र पूर्वाषाढ़ा सुबह 11 बजकर 8 मिनट तक रहेगा। इसके बाद उत्तराषाढ़ा नक्षत्र लगेगा. योग शिव शाम 6 बजकर 31 मिनट तक रहेगा.करण बालव सुबह 10 बजकर 21 मिनट तक और कौलव रात 11 बजकर 15 मिनट तक रहेगा.
कैसे करें काल भैरव को प्रसन्न?
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काल भैरव की कृपा पाने के लिए काल भैरव मंदिर में सरसों के तेल का दीपक जलाएं और उन्हें जलेबी व नारियल का भोग लगाएं.काले कुत्ते को मीठी रोटी खिलाना अत्यंत शुभ माना जाता है. साथ ही, काल भैरवाष्टक का पाठ और "ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं काल भैरवाय नमः" मंत्र का जाप करने से बाधाएं दूर होती हैं.
काल भैरव की पूजा करने से क्या लाभ मिलता है
काल भैरव की कृपा पाने से जीवन में भय, अकाल मृत्यु, शत्रुओं और नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है. भगवान शिव के इस रौद्र रूप की पूजा से कानूनी मामलों में जीत, करियर-व्यवसाय में सफलता, और आर्थिक संकट से मुक्ति मिलती है. यह नकारात्मक आदतों से छुटकारा दिलाकर सकारात्मक ऊर्जा और दीर्घायु प्रदान करते हैं.
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जानें क्या है शुभ मुहूर्त
शुक्रवार के शुभ मुहूर्त की बात करें तो ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 31 मिनट से 5 बजकर 16 मिनट तक रहेगा. अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11 बजकर 57 मिनट से 12 बजकर 48 मिनट तक और विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 30 मिनट से 3 बजकर 21 मिनट तक रहेगा. गोधूलि मुहूर्त शाम 6 बजकर 43 मिनट से 7 बजकर 5 मिनट तक होगा. अमृत काल सुबह 6 बजकर 8 मिनट से 7 बजकर 54 मिनट तक रहेगा.
जानें अशुभ समय
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अशुभ समय का विचार भी महत्वपूर्ण है. इस दिन राहुकाल सुबह 10 बजकर 47 मिनट से दोपहर 12 बजकर 23 मिनट तक रहेगा. यमगण्ड दोपहर 3 बजकर 33 मिनट से शाम 5 बजकर 9 मिनट तक होगा. गुलिक काल सुबह 7 बजकर 37 मिनट से 9 बजकर 12 मिनट तक और दुर्मुहूर्त सुबह 8 बजकर 34 मिनट से 9 बजकर 25 मिनट व दोपहर 12 बजकर 48 मिनट से 1 बजकर 39 मिनट तक रहेगा. आडल योग सुबह 6 बजकर 1 मिनट से 11 बजकर 28 मिनट तक रहेगा. वर्ज्य समय शाम 8 बजकर 12 मिनट से 9 बजकर 56 मिनट तक होगा.