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भारत की बेटी सौम्या मिश्रा ने सात समंदर पार रच दिया इतिहास, कनाडा में 7 सालों से लगातार करा रहीं 'सबसे बड़ी रामलीला'

इस साल टोरंटो में आयोजित भव्य रामलीला महोत्सव का प्रदर्शन श्रिंगेरी मंदिर और कनाडा की राजधानी ऑटोवा के वाल्टर बेकर पार्क में, रेडियो ढिशुम द्वारा आयोजित इस रामलीला ने न केवल भारतीय मूल के प्रवासी भारतीयों को बल्कि कनाडाई सहित अन्य विभिन्न संस्कृतियों के लोगों का भी मन मोह लिया.

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कनाडा के एटोबिको, ब्रैम्पटन, ओकविल, लंदन और रिचमंड हिल में अपार सफलता और दर्शकों का प्रेम पाने के बाद 'टीम ढिशुम' ने अब कनाडा की राजधानी ओटावा में रामलीला की भव्य प्रस्तुति दी. 

टोरंटो से ओटावा तक रामलीला की गूंज 

इस साल टोरंटो में आयोजित भव्य रामलीला महोत्सव का प्रदर्शन श्रिंगेरी मंदिर और कनाडा की राजधानी ऑटोवा के वाल्टर बेकर पार्क में, रेडियो ढिशुम द्वारा आयोजित इस रामलीला ने न केवल भारतीय मूल के प्रवासी भारतीयों को बल्कि कनाडाई सहित अन्य विभिन्न संस्कृतियों के लोगों का भी मन मोह लिया. पूरे कार्यक्रम में भगवान राम की जीवन गाथा को अद्वितीय नृत्य-नाटिका के रूप में प्रस्तुत किया गया, जिसने दर्शकों के दिलों को छू लिया.

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यूपी की बेटी सौम्या ने विदेशी धरती पर जीवंत की श्रीराम की गाथा

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रामलीला भारतीय संस्कृति का एक अभिन्न हिस्सा रही है, जो प्रेम, साहस और भक्ति की एक शाश्वत गाथा है. आज से सात साल पहले, लखनऊ की सौम्या मिश्रा ने इस महान संस्कृति को कनाडा की भूमि पर जीवंत करने का निर्णय लिया. इस साल पुनः टीम ढिशुम ने जून के अंत में अपनी रिहर्सल शुरू की, जिसमें युवा कैनेडियन बच्चों की व्यस्त स्कूल शेड्यूल को ध्यान में रखते हुए उन्हें ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान जोड़ने और प्रोत्साहित करने का प्रयास किया गया, ताकि  युवा वर्ग प्रभु राम के चरित्र को अपने रोजमर्रा के जीवन में आत्मसार कर सकें और समाज में राम राज्य की पुनः स्थापना के सकें. सबसे खास बात यह है कि सौम्या मिश्रा महज 135 मिनट में रामलीला के सभी कांड का अपनी टीम के साथ मंचन करती हैं, वो भी पूरी भव्यता और सुंदरता के साथ.

टीम ढिशुम में स्थानीय इंडो-कैनेडियन अभिनेता, फोटोग्राफर और स्वयंसेवक शामिल हैं, जिन्होंने इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए अनगिनत घंटे समर्पित किए हैं. टीम ढिशुम के बच्चों ने तैयारी की इस पूरी यात्रा के दौरान अद्भुत समर्पण और जिज्ञासा दिखाई. इस स्टेज शो का हिस्सा बनने वाले 35 से अधिक बच्चे और 60 वयस्क हैं. जिसमे 74 वर्षीय यशपाल शर्मा और 3 वर्ष का देव शामिल है.

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विदेश में भीरतीय कलाकारों की धूम

रामलीला की निर्देशक-डाइरेक्टर सौम्या मिश्रा इस अलौकिक कथा को पारंपरिक और नई नाट्य शैली के समिश्रण के साथ प्रस्तुत करती हैं. रामलीला का हर दृश्य ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे दर्शक किसी महाकाव्य फ़िल्म का आनंद ले रहे हों. भव्य सेट, आकर्षक लाइट - साउन्ड इफेक्ट्स,  ने इसे एक सिनेमाई अनुभव में बदल दिया. प्रस्तुत रामलीला में आधुनिक तकनीक और विशेष प्रभावों (VFX) का व्यापक उपयोग किया गया था. जिसने राम-रावण युद्ध, मेघनाथ का मायाजाल और हनुमान की लंका यात्रा जैसे दृश्यों को जीवंत और भव्य बना दिया. राम वनवास प्रस्थान,भरत - मिलाप, सीता हरण और लक्ष्मण मूर्छा के दृश्य ने लोगों को भावुक कर दिया और हनुमान और उनकी सेना की चपल क्रीड़ा सबके चेहरे पर एक मुस्कान ले आई. 

इस वर्ष भगवान राम की भूमिका में लखनऊ के विक्रम सिंह, लक्ष्मण के रूप में इवान, हनुमान बने यश पटेल, रावण थे सिवा, कुंभकर्ण बने सचिन रामपाल, पार्वती की भूमिका में लखनऊ की सौम्या मिश्रा और नन्हे राम व लघु हनुमान के रूप में लखनऊ के वीर आर्यन सिह तथा छोटी सीता के रूप में लखनऊ की वल्लरी मिश्रा और रानी सुनयना की भूमिका में अलीगढ़ की पूनम कासलीवाल नज़र आए. 

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बच्चों को सांस्कृतिक विरासत से जोड़े रखने का आकर्षक माध्यम

दर्शकों का कहना था कि, इस तरह के आयोजनों से बच्चों का मनोरंजन तो होता ही है, साथ ही वे अपनी सांस्कृतिक विरासत और नैतिक मूल्यों को भी सीखते हैं. विदेशी भूमि पर  व्यस्त दिनचर्या के साथ बच्चों को अपनी धरोहर और जड़ों से जोड़े रखना बेहद कठिन होता है.

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दर्शकों का यह मानना था कि टीम ढिशुम हमें अपनी विरासत के साथ जोड़ने की दिशा में अद्भुत काम कर रही है. पिछले सात वर्षों में रामलीला ने कनाडा में सात लाख से अधिक लोगों तक अपनी पहुंच बनाई है और इसे सभी वर्गों द्वारा इसे बेहद पसंद किया जा रहा है.

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