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कहीं आप भी तो नहीं पाल रहे आस्तीन के सांप? Chanakya Niti के इन अचूक तरीके से पहचानें

आपको जीवन में भी कई ऐसे लोग होंगे जो आपसे मीठा तो बोलेंगे, लेकिन पीठ पीछे घात लगाने का कोई मौका नहीं छोड़ेंगे. इन्हें आस्तीन का सांप कहते हैं...आपके दुश्मन इनके दोस्त होंगे. आखिर इन्हें कैसे पहचानें?

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Chanakya Niti: कहते हैं इनसान दुनियाभर से लड़ सकता है, जीत भी जाता है, लेकिन वो अपने ही घर में हार जाता है. वो अपनों से नहीं लड़ सकता. इतना ही नहीं इसे दुनिया का सबसे अचूक और खतरनाक हथियार माना जाता है. इसे ही आस्तीन का सांप की संज्ञा दी गई है. ये ना सिर्फ आपको धीरे-धीरे कमजोर करते हैं बल्कि आपको असल मौके पर दगा दे जाते हैं. जिन्हें आप अपना समझ रहे होते हैं, वो दरअसल में आपके साथ रह रहा सांप होता है. इस बारे में आचार्य चाणक्य की चाणक्य नीति में बड़ी गहराई से बातें कही गई हैं. कलियुग में, मौजूदा समय में जब लोभ, प्रपंच, साजिश का बोलबाला है, रिश्ते कमजोर हो रहे हैं, हम की जगह मैं और हम दो-हमारे दो की भावना प्रबल हो रही हैं, वैसे में चाणक्य नीति हमें जीवन जीना सिखाती है. 

चाणक्य नीति कहती है कि युद्ध के मैदान में कैसा भी शत्रु हो, कितना भी बलशाली हो, उससे लड़ना आसान है, लेकिन अगर दुश्मन अपना ही हो, जिसने अपनी दुश्मनी के ऊपर रिश्तेदारी का चोला ओढा रखा है, मुखौटा पहनकर घर में बैठा हो, उससे बचना मुश्किल है. ये दुश्मन कोई भी हो सकता है, मसलन आपका भाई, चाचा, मामा या बचपन का मित्र. ऐसे में सवाल ये उठता है कि इन आस्तीन के सांपों को कैसे पहचानें? ये दिखते कैसे हैं? इनकी चाल और ढाल कैसी होती है और इनसे बचें कैसे?

वैसे तो चाणक्य नीति को युद्ध नीति, अर्थ नीति का सबसे मजबूत किताब माना जाता है, लेकिन इसकी बहुत सी बातें आम जीवन, परिवार, दोस्त, रिश्तेदारी आदि पर भी लागू होती है. इसी को लेकर आचार्य चाणक्य कहते हैं जो व्यक्ति हद से ज्यादा मीठी बातें करता हो, जिसकी जरूरतें आपसे जुड़ी हों, जिसका आपसे असंतोष, लेन-देन का कोई इतिहास रहा हो, अगर वो आपका अभिन्न मित्र बनता है, रिश्तेदारी का मुखौटा पहनता है तो चौंकन्ना हो जाने की जरूरत है क्योंकि इनके अंत: मन में घृणा छिपी होती है, ये बस मौके की ताक में रहते हैं. भले वो आपसे अफरात प्यार बरसा रहे हों, कहीं ना कहीं इनका मकसद खौफनाक होता है.

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मसलन ये आपके जीवन में भेदी का काम करते हैं, आपकी पारिवारिक, आर्थिक और सामाजिक कमजोरियों का राज जानना चाहते हैं. क्योंकि ये चीजें भले ही आपके लिए छोटी होंगी लेकिन उनके लिए ये वो चिंगारी होती है जिसमें आग लगाने भर की देरी होती है. ये आस्तीन के सांप इन्हीं का इस्तेमाल कर आपके दुश्मनों के जरिए, उनके कंधों पर बंदूक रखकर अपना हित साधते हैं.

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आचार्य चाणक्य के अनुसार इन 3 प्रकार के लोगों से सावधान रहने की जरूरत है.

मुंह में राम बगल में छुरी वाले चापलूसों से सावधान

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आपको बता दें कि जो लोग चौबीसों घंटे आपकी तारीफों के पुल बांधते हैं, उन पर तुरंत भरोसा करना सबसे बड़ी भूल है। चाणक्य के मुताबिक, ऐसे लोग कैमरे के सामने (या आपके सामने) तो बड़े शुभचिंतक बनते हैं, लेकिन बैकस्टेज यानी आपकी पीठ पीछे आपको गिराने की पूरी स्क्रिप्ट तैयार कर रहे होते हैं।

घर के भेदिया से रहें चौंकन्नें!

रामायण के विभीषण के पात्र का उदाहरण हम सबके सामने है। जो लोग आपके बहुत करीब होते हैं, उन्हें आपके परिवार के विवाद, कमजोरी और फाइनेंशियल स्टेटस (धन के राज) की पूरी 'इनसाइड स्टोरी' पता होती है। ऐसे लोग आपकी निजी जानकारी को ही आपके खिलाफ इस्तेमाल करते हैं, इंटरनल डेटा को हथियार के तौर पर इस्तेमाल करते हैं.

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दोस्त बन बैठे दुश्मनों से सावधान (जलन रखने वाले दोस्त और रिश्तेदार)

आपके सर्कल में शामिल कुछ ऐसे रिश्तेदार, भाई या दोस्त भी हो सकते हैं जो आपकी सफलता से अंदर ही अंदर जलते हैं। ये कभी आपके शुभचिंतक) हीं हो सकते। ये बस सही टाइमिंग और मौके के इंतजार में रहते हैं ताकि आपको जमीन पर ला सकें. इनके सबसे अच्छे दोस्त होंगे आपके दुश्मन या प्रतिद्वंदी; यानी कि दुश्मन का दुश्मन दोस्त.

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इनसे निपटने के लिए आचार्य चाणक्य कुछ तरीके बताते हैं. मसलन मौजूदा दौर में 'नो शेयरिंग' पॉलिसी को अपने जीवन में उतार लेना चाहिए. यानी कि अपनी लाइफ के बड़े प्लान्स और फाइनेंशियल सीक्रेट्स (पैसों से जुड़े राज) कभी भी किसी के साथ पूरी तरह शेयर न करें, चाहे रिश्ता कितना भी क्लोज क्यों न हो। इतना ही नहीं रिश्तेदारी में गंभीरता, कम बोलना, देखकर बोलना, नाप, तौल कर बोलना, कहां बोलना, कितना बोलना और कैसे बोलना है, इन सबका ध्यान रखने की जरूरत है.

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