3 मार्च को दिखेगा पूर्ण चंद्र ग्रहण, इस दिन पड़ेगा राहु का घातक असर, बुरे प्रभाव से बचने के लिए करें ये काम

चंद्र ग्रहण पूर्णिमा के दिन होता है, जबकि सूर्य ग्रहण अमावस्या पर. चंद्र ग्रहण में पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है, जिससे चंद्रमा धुंधला या लाल दिखाई देता है. यह ग्रहण पृथ्वी के आधे हिस्से से दिखता है. ये घटनाएं प्रकृति की अनोखी प्रस्तुति हैं. साफ आसमान में बिना किसी उपकरण के देखा जा सकता है.

3 मार्च को दिखेगा पूर्ण चंद्र ग्रहण, इस दिन पड़ेगा राहु का घातक असर, बुरे प्रभाव से बचने के लिए करें ये काम

चंद्र ग्रहण एक खूबसूरत खगोलीय घटना है, जो साल में चार से सात बार होती है. इस दौरान पृथ्वी, चंद्रमा और सूर्य एक सीधी रेखा में आ जाते हैं. चंद्रमा की कक्षा पृथ्वी की कक्षा के मुकाबले थोड़ी झुकी हुई हैं, इसलिए हर पूर्णिमा पर ग्रहण नहीं होता, बल्कि कभी-कभी ही होता है.

चंद्र ग्रहण पूर्णिमा के दिन होता है, जबकि सूर्य ग्रहण अमावस्या पर. चंद्र ग्रहण में पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है, जिससे चंद्रमा धुंधला या लाल दिखाई देता है. यह ग्रहण पृथ्वी के आधे हिस्से से दिखता है. ये घटनाएं प्रकृति की अनोखी प्रस्तुति हैं. साफ आसमान में बिना किसी उपकरण के देखा जा सकता है. 

3 मार्च को पहला चंद्र ग्रहण

साल 2026 का पहला चंद्र ग्रहण 3 मार्च को है, जो पूर्ण चंद्र ग्रहण या ब्लड मून होगा. ब्लड मून पूर्ण चंद्र ग्रहण का ही एक नाम है.  सूर्य की रोशनी सफेद दिखती है, लेकिन इसमें कई रंग होते हैं. सूर्यास्त या सूर्योदय के समय लाल रोशनी ज्यादा पहुंचती है, क्योंकि नीली रोशनी बिखर जाती है. चंद्र ग्रहण में भी यही होता है. पृथ्वी के वायुमंडल से गुजरती रोशनी चंद्रमा पर पड़ती है, जैसे दुनिया के सभी सूर्योदय और सूर्यास्त एक साथ चंद्रमा पर प्रोजेक्ट हो रहे हों. यही वजह है कि चंद्रमा लाल दिखता है.

कब से कब तक रहेगा चंद्र ग्रहण 

भारत में सूतक काल सुबह 6 बजकर 20 मिनट पर प्रारंभ हो जाएगा. इस दौरान भूल से भी नया काम व पूजा न करें. चंद्र ग्रहण दोपहर 3 बजकर 20 मिनट से शाम 6 बजकर 47 मिनट तक रहने वाला है

चंद्र ग्रहण के साथ इसी दिन अंतिम होलाष्टक रहेगा

चंद्र ग्रहण के साथ साथ इसी दिन अंतिम होलाष्टक और होलिका दहन भी किया जाएगा. आपको बता दें कि होलाष्टक के आठ दिनों में अलग-अलग ग्रह उग्र अवस्था में रहते हैं और अंतिम होलाष्टक पर राहु उग्र होता है. 

चंद्र ग्रहण पर राहु के बुरे प्रभाव से बचने के लिए क्या करें

चंद्र ग्रहण के दिन भी राहु की शक्तियां बढ़ जाती हैं, क्योंकि राहु-केतु के कारण ही सूर्य और चंद्रग्रहण लगते हैं. इसलिए चंद्रग्रहण पर चंद्रमा की शक्ति भी क्षीण हो जाती है. ऐसे में 3 मार्च को राहु के बुरे असर से बचने के लिए आपको कुछ सावधानियां बरतनी चाहिए और उग्र राहु को शांत करने के लिए कुछ उपाय भी आजमाने चाहिए, आज हम आपको इसी के बारे में जानकारी देंगे. 

3 मार्च के दिन अंतिम होलाष्टक पर राहु बेहद उग्र रहेंगे इसलिए आपको यात्राएं करने से इस दिन बचना चाहिए. 

आग और लोहे से संबंधित काम करने से भी बचेंगे तो आपके के लिए अच्छा रहेगा.

राहु को शांत करने के लिए भगवान शिव की उपासना और शिव मंत्रों का जप अच्छा साबित होगा

इस दिन काले कुत्ते को रोटी खिलाएं, मछलियों को आटे की गोलियां खिलाएं तो राहु का बुरा असर आप पर नहीं पड़ेगा

इस दिन आप अपने पास एक चांदी का टुकड़ा रखें. ऐसा करने से राहु के बुरे प्रभावों से आप बच सकते हैं. 

इसके साथ ही चंद्रग्रहण और होलाष्टक के आखिरी दिन अगर आप सरसों के तेल, लोहे की वस्तु, काले कपड़े, काले तिल आदि का दान करते हैं तो नगेविटी आप पर हावी नहीं होती और राहु का बुरा प्रभाव भी दूर होता है. 

दूसरा चंद्र ग्रहण कब है?

बता दें कि दूसरा चंद्र ग्रहण 28 अगस्त को है. यह आंशिक चंद्र ग्रहण होगा. चंद्र ग्रहण के तीन मुख्य प्रकार होते हैं. इनमें पूर्ण चंद्र ग्रहण, आंशिक चंद्र ग्रहण और पेनम्ब्रल चंद्र ग्रहण शामिल हैं. 

जानें पूर्ण चंद्र ग्रहण, आंशिक चंद्र ग्रहण और पेनम्ब्रल चंद्र 

पूर्ण चंद्र ग्रहण में चंद्रमा पूरी तरह पृथ्वी की गहरी छाया (उम्ब्रा) में चला जाता है. पृथ्वी के वायुमंडल से गुजरने वाली सूर्य की रोशनी चंद्रमा तक पहुंचती है. नीली और बैंगनी रोशनी ज्यादा बिखर जाती है, जबकि लाल और नारंगी सीधे पहुंचती है. इसलिए चंद्रमा लाल या नारंगी रंग का दिखता है, जिसे ब्लड मून कहते हैं. वायुमंडल में जितनी ज्यादा धूल या बादल, उतना गहरा लाल रंग दिखता है. यह ग्रहण कई घंटों तक रह सकता है. 

आंशिक चंद्र ग्रहण: चंद्रमा जब पृथ्वी की छाया के सिर्फ एक हिस्से से गुजरता है तो छाया बढ़ती है लेकिन चंद्रमा को पूरी तरह नहीं ढक पाती, फिर पीछे हट जाती है.

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पेनम्ब्रल चंद्र ग्रहण: वहीं जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा एक सीध में आ जाते हैं और चंद्रमा पृथ्वी की बाहरी हल्की छाया (पेनम्ब्रा) में चला जाता है, तब पेनम्ब्रल चंद्र ग्रहण होता है। इस दौरान चंद्रमा बहुत हल्का या धुंधला दिखता है और कई बार नजर नहीं आता.

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