सुपरजेट डील फाइनल! क्या भारत में एंट्री करेगा दुनिया का सबसे चर्चित फाइटर जेट Su-57? जानें पूरी तैयारी
HAL और रूस की UAC के बीच SJ-100 विमानों के भारत में उत्पादन का समझौता सिर्फ नागरिक उड्डयन तक सीमित नहीं है. इसे रक्षा क्षेत्र में भविष्य की बड़ी साझेदारी का संकेत माना जा रहा है. इस करार से ‘मेक इन इंडिया’ को मजबूती मिलेगी और एयरोस्पेस इकोसिस्टम मजबूत होगा.
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हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) और रूस की यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉर्पोरेशन (UAC) के बीच हाल ही में हुआ सुखोई सुपरजेट 100 (SJ-100) विमानों के भारत में उत्पादन का समझौता सिर्फ एक नागरिक विमानन करार नहीं माना जा रहा है. रक्षा और रणनीतिक गलियारों में इसे कहीं बड़े संकेत के तौर पर देखा जा रहा है. सवाल साफ है. क्या नागरिक विमानों के बाद अब रूस का सबसे खतरनाक लड़ाकू विमान Su-57 भी भारतीय वायुसेना के बेड़े में शामिल हो सकता है?
SJ-100 समझौता सिर्फ सिविल एक डील नहीं
भारत और रूस के बीच हुआ SJ-100 का यह करार ‘मेक इन इंडिया’ नीति को मजबूती देता है. SJ-100 एक क्षेत्रीय यात्री जेट विमान है, जिसका भारत में उत्पादन होने से देश के एयरोस्पेस सेक्टर को नई ऊर्जा मिलेगी. इससे न सिर्फ तकनीकी कौशल बढ़ेगा, बल्कि सप्लाई चेन, मेंटेनेंस और इंजीनियरिंग इकोसिस्टम भी मजबूत होगा. रक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि यह समझौता भविष्य के सैन्य विमान सौदों के लिए एक तरह का टेस्ट केस है, जिसमें दोनों देश एक-दूसरे की औद्योगिक क्षमताओं को परख रहे हैं.
रूसी अधिकारियों का बड़ा दावा
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे ज्यादा हलचल तब मची, जब रूस की एयरोस्पेस कंपनी के एक शीर्ष अधिकारी ने Su-57E लड़ाकू विमान को लेकर बयान दिया. यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉर्पोरेशन के सीईओ वादिम बदेखा ने हैदराबाद में विंग्स इंडिया एयर शो के दौरान रूसी मीडिया से कहा कि भारत और रूस पांचवीं पीढ़ी के Su-57E के भारत में संयुक्त उत्पादन की संभावनाओं पर तकनीकी स्तर पर चर्चा कर रहे हैं. उन्होंने यह भी दावा किया कि बातचीत उन्नत चरण में है और ऐसे समझौते दशकों तक दोनों देशों के सहयोग की दिशा तय कर सकते हैं. इस एयर शो में रूस ने अपने दो प्रमुख विमान. इल्यूशिन IL-114-300 और सुखोई SJ-100 को प्रदर्शित किया. बदेखा के मुताबिक, भारत में पहले से मौजूद Su-30MKI उत्पादन सुविधाओं का इस्तेमाल कर Su-57 के लाइसेंस प्राप्त निर्माण और भारतीय सिस्टम्स के अधिकतम उपयोग पर भी विचार हो रहा है. हालांकि, भारत सरकार या वायुसेना की ओर से इस बयान पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है.
Su-57 ‘Felon’ रूस का सबसे घातक फाइटर जेट
Su-57 रूस का पहला पांचवीं पीढ़ी का स्टेल्थ फाइटर जेट है. इसे पश्चिमी देशों में ‘Felon’ के नाम से जाना जाता है. इसकी सबसे बड़ी ताकत इसकी स्टेल्थ तकनीक है, जिससे यह दुश्मन के रडार से बच सकता है. इसके अलावा यह सुपरक्रूज क्षमता से लैस है, यानी बिना आफ्टरबर्नर के ही ध्वनि की गति से तेज उड़ान भर सकता है. Su-57 के इंटरनल वेपन बे में आधुनिक एयर-टू-एयर और एयर-टू-ग्राउंड मिसाइलें रखी जाती हैं. इससे विमान की स्टेल्थ प्रोफाइल बनी रहती है. अत्याधुनिक सेंसर, नेटवर्क-सेंट्रिक वारफेयर और हाई मैन्युवरेबिलिटी इसे बेहद खतरनाक बनाते हैं.
क्या है FGFA प्रोग्राम?
भारत पहले ही Su-57 से जुड़े FGFA यानी फिफ्थ जनरेशन फाइटर एयरक्राफ्ट प्रोग्राम का हिस्सा रह चुका है. यह प्रोजेक्ट भारत और रूस के संयुक्त विकास पर आधारित था. लेकिन 2018 में भारत ने इससे खुद को अलग कर लिया. इसके पीछे कई कारण थे. इंजन तकनीक को लेकर असंतोष था. स्टेल्थ फीचर्स को अमेरिकी मानकों के मुकाबले कमजोर माना गया. इसके अलावा लागत और तकनीक हस्तांतरण यानी ToT को लेकर भी भारत संतुष्ट नहीं था.
क्या अब पासा पलट रहा है?
SJ-100 समझौते के बाद Su-57 की चर्चा दोबारा शुरू होने के पीछे तीन बड़े कारण बताए जा रहे हैं. पहला, रूस ने Su-57 के लिए नया ‘स्टेज 2’ इंजन AL-51F1 विकसित कर लिया है, जो पहले की तकनीकी कमियों को काफी हद तक दूर करता है. दूसरा, यूक्रेन युद्ध में Su-57 के सीमित इस्तेमाल से इसके वास्तविक ऑपरेशनल डेटा सामने आए हैं. तीसरा और सबसे अहम कारण चीन है. चीन के पास J-20 जैसे पांचवीं पीढ़ी के विमानों की संख्या लगातार बढ़ रही है. ऐसे में भारतीय वायुसेना को भी जल्द एक भरोसेमंद स्टेल्थ फाइटर की जरूरत महसूस हो रही है.
आत्मनिर्भर भारत बनाम आयात
हालांकि तस्वीर इतनी सरल नहीं है. भारत अपना स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी का फाइटर AMCA विकसित कर रहा है. अगर Su-57 जैसे विदेशी विमान खरीदे जाते हैं, तो AMCA प्रोजेक्ट के बजट और प्राथमिकता पर असर पड़ सकता है. इसके अलावा रूस के साथ बड़े रक्षा सौदों पर अमेरिका के CAATSA प्रतिबंधों का खतरा भी बना रहता है. भारत की नीति अब सिर्फ हथियार खरीदने की नहीं है. देश पूर्ण तकनीक हस्तांतरण, स्वदेशी उत्पादन और दीर्घकालिक आत्मनिर्भरता पर जोर दे रहा है. इसी कड़ी में रोसोबोरोनएक्सपोर्ट के सीईओ अलेक्जेंडर मिखीव पहले ही कह चुके हैं कि रूस भारत को Su-57E की आपूर्ति के साथ-साथ भारत में उत्पादन और स्वदेशी AMCA प्रोग्राम में सहयोग देने को तैयार है.
बताते चलें कि SJ-100 समझौता साफ दिखाता है कि भारत और रूस के औद्योगिक और रणनीतिक रिश्ते अब भी मजबूत हैं. अगर रूस Su-57 के लिए पूर्ण तकनीक हस्तांतरण और AMCA में ठोस सहयोग का प्रस्ताव देता है, तो आने वाले वर्षों में ‘Felon’ भारतीय आसमान में गश्त करते नजर आ सकते हैं. फिलहाल वायुसेना का फोकस राफेल के अगले बैच और स्वदेशी विमानों पर है. लेकिन रक्षा रणनीति की दुनिया में, हर नई डील अपने साथ कई नए रास्ते खोलकर लाती है.
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