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भारत- नेपाल के बीच मजबूत रक्षा सहयोग: इंडियन आर्मी ने नेपाली सेना को दिए 50 मिलिट्री यूटिलिटी वाहन

भारत-नेपाल के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और रणनीतिक संबंधों को बढ़ावा दिया जा रहा है. ट्रांसफर वाहनों में 7.5 टन क्षमता के 20 एएलएस (ALS) ट्रक और 2.5 टन क्षमता के 30 टाटा ट्रक शामिल हैं.

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भारत और नेपाल के बीच मजबूत रक्षा संबंध रहे हैं. भारतीय सेना ने इस रक्षा सहयोग को और ज्यादा मजबूती प्रदान करते हुए नेपाल की सेना को 50 सैन्य उपयोग वाले विशेष वाहन (मिलिट्री यूटिलिटी व्हीकल्स) सौंपे हैं. यह वाहन भारत-नेपाल सीमा पर नेपाल सेना को हस्तांतरित किए गए हैं.

भारतीय सेना ने इसे लेकर जानकारी दी. जिसमें बताया गया कि इन वाहनों को काठमांडू में आयोजित एक औपचारिक समारोह के दौरान प्रस्तुत किया जाएगा. नेपाल में भारत के राजदूत की ओर से औपचारिक रूप से यह पहल की जाएगी. भारतीय सेना का यह कदम दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे रक्षा सहयोग को और गहराई देता है. 

ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और रणनीतिक संबंधों को बढ़ावा 

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हस्तांतरित किए गए वाहनों में 7.5 टन क्षमता के 20 एएलएस (ALS) ट्रक और 2.5 टन क्षमता के 30 टाटा ट्रक शामिल हैं. इन सभी 50 वाहनों को विधिवत रूप से नेपाल सेना को सुपुर्द किया गया. यह कदम नेपाल सेना की क्षमता निर्माण (कैपेसिटी बिल्डिंग) को सशक्त बनाने की दिशा में भारतीय सेना की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है. साथ ही साथ यह दोनों सेनाओं के बीच मैत्री, आपसी विश्वास और घनिष्ठ सहयोग के मजबूत और स्थायी रिश्ते को भी रेखांकित करता है. 

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गौरतलब है कि भारत और नेपाल के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और रणनीतिक संबंध रहे हैं. रक्षा क्षेत्र में सहयोग इन द्विपक्षीय संबंधों का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है. सैन्य प्रशिक्षण, संयुक्त अभ्यास, उपकरण सहयोग और मानवीय सहायता जैसे क्षेत्रों में दोनों देश लगातार मिलकर काम कर रहे हैं. रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह पहल न केवल भारत-नेपाल के मजबूत द्विपक्षीय संबंधों को और सुदृढ़ करती है, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता और सुरक्षा के लिए दोनों देशों की साझा प्रतिबद्धता को भी स्पष्ट रूप से दर्शाती है.

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भारत-नेपाल ने किया था संयुक्त सैन्य अभ्यास 

पिछले साल दिसंबर महीने के दौरान ही भारत और नेपाल की सेना ने एक संयुक्त अभ्यास भी किया था. यहां बादलों के फटने, फ्लैश फ्लड, भूकंप से इमारतों के ढहने और नदी की तेज धारा में फंसे लोगों को निकालने की तकनीक का प्रशिक्षण दिया गया था. दोनों सेनाओं द्वारा अंजाम दिए गए संयुक्त सैन्य अभ्यास का नाम ‘सूर्य किरण’ था. इस मॉड्यूल में दोनों देशों की सेनाओं को उन्नत स्तर की आपदा प्रबंधन तकनीकों का प्रशिक्षण दिया गया था. 

NDRF ने दी थी ट्रेनिंग 

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NDRF के विशेषज्ञों ने अभ्यास के दौरान आपदा पर आधारित सटीक बचाव तकनीकों का प्रदर्शन किया था. इनमें बादलों के फटने या अचानक आने वाली फ्लैश फ्लड से बचाव के उपाय शामिल थे. साथ ही भूकंप से इमारतों के ढहने पर संरचनात्मक खोज और बचाव के तरीकों का प्रशिक्षण दिया गया. नदी-रेस्क्यू ऑपरेशन के तहत तेज धारा में फंसे लोगों को निकालने की तकनीक सिखाई गई. प्राकृतिक आपदाओं जैसी अन्य आपात स्थितियों में तुरंत मदद के तरीके बताए गए थे. 

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