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अमेरिकी धोखे को दिल पर ले गया भारत! बना डाला स्वदेशी NavIC नेविगेशन सिस्टम, ISRO का NVS-03 भी सफलतापूर्वक लॉन्च

अमेरिका ने कारगिल जंग में धोखा क्या दिया, भारत ने अपना, मेड इन इंडिया NavIC नेविगेशन सिस्टम बना लिया. अमेरिकियों ने एक GPS डेटा क्या देने से मना किया, आज हमारे पास चार-चार नेविगेशन सैटेलाइट्स हैं. इसी कड़ी में NVS-03 की भी सफल लॉन्चिंग कर दी गई है.

Image Source- FB/ ISRO
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कारगिल जंग के वक्त पाकिस्तान के खिलाफ सटीक कार्रवाई के लिए भारत ने अमेरिका से GPS सैटेलाइट की मदद मांगी, लेकिन अमेरिका ने साफ इनकार कर दिया. अगर भारतीय सेनाओं के पास GPS डेटा होती तो पाकिस्तान के कब्जाधारी सेना, जो ऊपर पहाड़ियों पर थी उसके लोकेशन का पता चलता और उनके खिलाफ कार्रवाई आसान होती. भारतीय सेना के जवानों की जानों की रक्षा होती. इसके बाद ही भारत को अपना स्वदेशी सैटेलाइट की जरूरत महसूस हुई. एक वो दिन था और एक आज है, जब भारत के पास अपना 4 नेविगेशन सैटेलाइट है, जो दुश्मन के हर गतिविधि पर नज़र रखती है. जल्द ही तीन और लॉन्च कर भारत उन देशों में होगा जिसके पास नेविगेशन सैटेलाइट कॉन्स्टेलेशन यानी कि उपग्रह समूह होगा.

आपको बता दें कि ISRO ने बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए GSLV-F से NVS-03 को सफलतापूर्वक उसकी निर्धारित कक्षा में स्थापित कर दिया है. मिशन की सफलता पर इसरो के प्रमुख वी नारायणन ने खुशी जताई और कहा कि नेविगेशन सैटेलाइट एनवीएस-03 को बिल्कुल सटीक तरीके से उसकी निर्धारित कक्षा में पहुंचा दिया है. यह मिशन भारत की स्वदेशी सैटेलाइट नेविगेशन प्रणाली 'नाविक' को और मजबूत बनाने की दिशा में महत्त्वपूर्ण कदम है.

1500 किलोमीटर तक दुश्मन पर रखेगा 24 घंटे नज़र

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इसरो ने शुक्रवार रात 11.51 बजे श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से जीएसएलवी-एफ18 के जरिए एनवीएस-03 नेविगेशन उपग्रह का सफल प्रक्षेपण किया. जीएसएलवी-एफ18 यान ने उपग्रह को भू-तुल्यकालिक स्थानांतरण कक्षा में स्थापित किया. यह जीएसएलवी की 20वीं उड़ान थी.

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इसरो ने GSLV-F से NVS-03 को सफलतापूर्वक किया लॉन्च

उड़ान के करीब 18 मिनट बाद रॉकेट के तीनों चरण सफल रहे. इसके बाद 2,232 किलोग्राम वजनी यह सैटेलाइट रॉकेट से अलग होकर अपने तय ऑर्बिट में पहुंच गया. यह पूरे भारत और सीमा से 1,500 किलोमीटर दूर तक सटीक लोकेशन और नेविगेशन की सुविधा देगा.

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'भारत के पास अब 4 नेविगेशन सैटेलाइट

यह मिशन भारत की दूसरी पीढ़ी की नेविगेशन सैटेलाइट सीरीज के तीसरे उपग्रह एनवीएस-03 को जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट (जीटीओ) में स्थापित करेगा. इसरो के अनुसार, जीएसएलवी-एफ18 भारत के जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (जीएसएलवी) की ये 20वीं उड़ान थी.

क्या है NVS-03? क्या होगा इससे?

एनवीएस-03 को 'नेविगेशन विद इंडियन कॉन्स्टेलेशन' सैटेलाइट समूह को मजबूत करने और नेविगेशन सेवाओं की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए डिजाइन किया गया है. इस उपग्रह में स्वदेशी एटॉमिक क्लॉक के साथ-साथ खरीदी गई एटॉमिक क्लॉक भी लगी हैं. इसमें मौजूदा एल5 और एस सिग्नल के अलावा एल1 नेविगेशन सिग्नल भी शामिल किया गया है, जिससे सिस्टम की नेविगेशन क्षमता बढ़ेगी.

इसरो ने कहा, "इसमें मौजूदा एल5 / एस सिग्नल के अलावा एल1 सिग्नल भी शामिल है, जिसका कवरेज भारत और भारतीय भू-भाग से 1500 किमी तक के क्षेत्र में होगा." 'नेविगेशन विद इंडियन कॉन्स्टेलेशन' भारत की स्वतंत्र क्षेत्रीय नेविगेशन सैटेलाइट प्रणाली है, जिसे भारत और भारतीय भू-भाग से लगभग 1500 किमी आगे तक के क्षेत्र में उपयोगकर्ताओं को सटीक पोजिशन, वेलोसिटी और टाइमिंग (पीवीटी) सेवाएं प्रदान करने के लिए विकसित किया गया है.

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'नेविगेशन विद इंडियन कॉन्स्टेलेशन' दो तरह की सेवाएं देता है, जिनमें स्टैंडर्ड पोजिशनिंग सर्विस और रिस्ट्रिक्टेड सर्विस शामिल हैं. स्टैंडर्ड पोजिशनिंग सर्विस आम नागरिकों के लिए है, जबकि रिस्ट्रिक्टेड सर्विस अधिकृत उपयोगकर्ताओं के लिए एक एन्क्रिप्टेड सेवा है.

NavIC से भारत को किस तरह का फायदा होगा?

मोबाइल और नेविगेशन उपकरणों में बेहतर लोकेशन सुविधा.
टैक्सी, बस और ट्रक की ट्रैकिंग.
समुद्र में मछुआरों को दिशा और लोकेशन की जानकारी.
किसानों को सटीक लोकेशन आधारित खेती में मदद.
बाढ़ और चक्रवात जैसी आपदाओं में राहत-बचाव कार्यों में सहायता.
विमान और जहाजों के नेविगेशन में मदद.
दूरसंचार, बैंकिंग और बिजली ग्रिड जैसी सेवाओं को सटीक समय की जानकारी.

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एनवीएस-01 की लॉन्चिंग कब हुई थी?

इसरो ने मौजूदा 'नेविगेशन विद इंडियन कॉन्स्टेलेशन' समूह को बेहतर सुविधाओं के साथ बढ़ाने और सेवाओं की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए दूसरी पीढ़ी के पांच नेविगेशन सैटेलाइटों की योजना बनाई है.

इस सीरीज का पहला उपग्रह एनवीएस-01, जीएसएलवी-एफ12 मिशन के तहत 29 मई 2023 को लॉन्च किया गया था. यह पहली बार था जब किसी भारतीय नेविगेशन सैटेलाइट पर स्वदेशी एटॉमिक क्लॉक उड़ाई गई थी.

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एनवीएस-03 इस सीरीज का तीसरा उपग्रह है, जिसका उद्देश्य मौजूदा एल5 और एस सिग्नल के साथ एल1 सिग्नल को शामिल करके समूह की क्षमताओं को और मजबूत करना है.

भारत के पास जल्द होगा अपना नेविगेशन सैटेलाइट कॉन्स्टेलेशन (उपग्रह समूह)

बकौल इसरो प्रमुख वी. नारायणन, "बेहतर PNT (पोजीशनिंग, नेविगेशन और टाइमिंग) सेवाओं के लिए कम से कम चार उपग्रहों की जरूरत होती है और आज के लॉन्च के साथ हमारे पास कक्षा में चार उपग्रह हो जाएंगे. हालांकि, निरंतर सेवा और सटीक पोजीशनिंग सुनिश्चित करने के लिए, हमें कक्षा में कुल सात उपग्रह स्थापित करने होंगे. दो और उपग्रह अभी तैयार होने के अंतिम चरण में हैं, और एक उपग्रह को मंजूरी मिलने की प्रक्रिया चल रही है. इसके साथ ही, भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो जाएगा जिनके पास अपना खुद का नेविगेशन सैटेलाइट कॉन्स्टेलेशन (उपग्रह समूह) है."

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गगनयान मिशन को लेकर भी ISRO प्रमुख ने दिया अपडेट!

वहीं इसरो प्रमुख ने 'गगनयान' समेत वर्तमान वित्तीय वर्ष के आगामी मिशनों की जानकारी दी. उन्होंने कहा, "इस वित्तीय वर्ष में मारा लक्ष्य 5 और लॉन्च करने का है, जिसमें बिना क्रू वाला 'गनयान जी'मिशन भी शामिल है. इसके अलावा, हमारा लक्ष्य कम से कम दो पीएसएलवी और दो स्मॉल सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (एसएसएलवी) लॉन्च करना है. साथ ही, हम एक प्राइवेट लॉन्च की भी योजना बना रहे हैं. कुल मिलाकर हम 6 लॉन्च के बारे में सोच रहे हैं, लेकिन कम से कम 5 लॉन्च पूरे करने की हमारी योजना है."

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उन्होंने कहा, "'गगनयान' एक बहुत ही प्रतिष्ठित और महत्वपूर्ण, तकनीक-प्रधान कार्यक्रम है. इसका उद्देश्य हमारे अपने लॉन्च व्हीकल का उपयोग करके हमारे अपने अंतरिक्ष यात्रियों (गगन यात्रियों) को अंतरिक्ष में भेजना है. अब तक हम 8,000 से अधिक परीक्षण पूरे कर चुके हैं. वास्तविक मानव को अंतरिक्ष में भेजने से पहले, हमें तीन ऐसे मिशन पूरे करने हैं जिनमें कोई इंसान नहीं होगा."

वी. नारायणन ने कहा हमारे गगन यात्रियों की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है. इसलिए, हम सभी पहले 'अनक्रूड मिशन' पर काम कर रहे हैं. एलपीएस के डायरेक्टर ने कई सिस्टम तैयार किए हैं; URC के डायरेक्टर और अन्य टीमें कई सिमुलेशन टेस्ट कर रही हैं. IPRC और BSSE की टीमों ने पूरा लॉन्च व्हीकल तैयार किया है.

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एलपीएस के निदेशक और उनकी टीम ने कई सिस्टम तैयार किए हैं. यूआरसी के निदेशक के नेतृत्व में कई सिमुलेशन टेस्ट चल रहे हैं. आईपीआरसी और बीएसएसई की टीमों ने पूरा लॉन्च व्हीकल तैयार किया है. वे सर्विस मॉड्यूल और क्रू मॉड्यूल से जुड़े सॉफ्टवेयर बनाने में भी योगदान दे रहे हैं. काम बहुत अच्छी तरह से चल रहा है. भारत के प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में हमें पूरा विश्वास है कि हम बहुत जल्द इसे सफलतापूर्वक पूरा कर लेंगे.

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