Tax Holiday पर सरकार सख्त, 4 शर्तें पूरी करने पर ही विदेशी कंपनियों को मिलेगा टैक्स हॉलिडे का फायदा
Tax Holidays: यह कदम भारत में महत्वपूर्ण डिजिटल बुनियादी ढांचे के विकास और डेटा सेंटर सेक्टर में बड़े पैमाने पर निवेश को आकर्षित करने के उद्देश्य से उठाया गया है. इससे भारत को वैश्विक डेटा और क्लाउड हब के रूप में स्थापित करने में मदद मिलने की संभावना है.
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Foreign Companies Tax Holidays: केंद्रीय बजट में डेटा सेंटर और क्लाउड सेवाओं से जुड़ी कंपनियों को कर छूट (टैक्स हॉलिडे) देने की घोषणा के बाद वित्त मंत्रालय ने इससे जुड़ी अहम जानकारियाँ साझा की हैं. मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, यह टैक्स हॉलिडे उन विदेशी कंपनियों को दिया जाएगा जो भारत सहित वैश्विक स्तर पर क्लाउड सेवाएं प्रदान करती हैं. यह कर छूट कर वर्ष 2026-27 से शुरू होकर 2046-47 तक लागू रहेगी, जिससे इस क्षेत्र में दीर्घकालिक स्थिरता और निवेश को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.
विदेशी कंपनियों के लिए चार अनिवार्य शर्तें
हालांकि, इस टैक्स हॉलिडे का लाभ उठाने के लिए विदेशी कंपनियों को चार जरूरी शर्तें पूरी करनी होंगी. सबसे पहली शर्त यह है कि विदेशी कंपनी का भारत सरकार द्वारा औपचारिक रूप से अधिसूचित (नोटिफाइड) होना अनिवार्य है. दूसरी शर्त के अनुसार, जिस डेटा सेंटर कंपनी से सेवाएं ली जा रही हैं, वह भारतीय स्वामित्व वाली होनी चाहिए. तीसरी महत्वपूर्ण शर्त यह है कि संबंधित डेटा सेंटर को इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) द्वारा अधिसूचित किया गया होना चाहिए. चौथी और अंतिम शर्त के तहत, विदेशी कंपनी को भारतीय उपयोगकर्ताओं को दी जाने वाली क्लाउड सेवाएं केवल एक भारतीय पुनर्विक्रेता (रेजिडेंट रिसेलर) इकाई के माध्यम से ही उपलब्ध करानी होंगी.
विदेशी कंपनियों को कर संबंधी स्पष्टता और सुरक्षा
वित्त मंत्रालय के सूत्रों ने स्पष्ट किया कि इस कर छूट का मुख्य उद्देश्य विदेशी क्लाउड सेवा प्रदाताओं को कर संबंधी निश्चितता देना ह. यदि कोई विदेशी कंपनी भारत में स्थित डेटा सेंटर से सेवाएं प्राप्त करती है, तो उसे इस बात का कोई जोखिम नहीं होगा कि उसकी वैश्विक आय पर भारत में कर लगाया जाएगा. इससे विदेशी कंपनियों का भारत में डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर के उपयोग को लेकर भरोसा बढ़ेगा और वे बिना कर अनिश्चितता के यहां संचालन कर सकेंगी.
घरेलू गतिविधियों पर सामान्य कर व्यवस्था लागू
हालांकि, यह छूट केवल विदेशी कंपनियों की वैश्विक आय तक सीमित है. भारत के भीतर होने वाली आर्थिक गतिविधियों से अर्जित आय पर सामान्य कर नियम लागू रहेंगे. उदाहरण के तौर पर, यदि कोई भारतीय डेटा सेंटर वैश्विक क्लाउड इकाई को सेवाएं देता है या कोई भारतीय पुनर्विक्रेता भारतीय ग्राहकों को क्लाउड सेवाएं बेचता है, तो ऐसी आय पर उसी तरह कर लगेगा, जैसा किसी अन्य घरेलू कंपनी पर लगता है.
संबद्ध इकाइयों के लिए सुरक्षित कर मार्जिन
यदि भारतीय डेटा सेंटर किसी विदेशी कंपनी की संबद्ध इकाई के रूप में काम करता है, जिसे आमतौर पर ‘कॉस्ट प्लस सेंटर’ कहा जाता है, तो सरकार ने इसके लिए 15 प्रतिशत का सुरक्षित कर मार्जिन तय किया है. इससे ट्रांसफर प्राइसिंग और कर विवादों की संभावनाएं कम होंगी और कंपनियों को संचालन में सहूलियत मिलेगी.
समान अवसर और निवेश को बढ़ावा
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि विदेशी क्लाउड सेवा इकाई के साथ कर व्यवहार समान रहेगा, चाहे भारतीय डेटा सेंटर पूरी तरह भारतीय स्वामित्व वाला हो या वैश्विक कंपनी की सहायक इकाई. इससे सभी खिलाड़ियों को बराबरी का अवसर मिलेगा. इस नीति के चलते भारतीय डेटा सेंटर अब आत्मविश्वास के साथ वैश्विक क्लाउड कंपनियों को सेवाएं दे सकेंगे और विदेशी कंपनियों को भी भारत में डेटा सेंटर का उपयोग करने पर किसी प्रकार के कर जोखिम का सामना नहीं करना पड़ेगा.
बुनियादी ढांचे के विकास की दिशा में बड़ा कदम
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यह कदम भारत में महत्वपूर्ण डिजिटल बुनियादी ढांचे के विकास और डेटा सेंटर सेक्टर में बड़े पैमाने पर निवेश को आकर्षित करने के उद्देश्य से उठाया गया है. इससे भारत को वैश्विक डेटा और क्लाउड हब के रूप में स्थापित करने में मदद मिलने की संभावना है.
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