भारत से पंगा लेकर तिल-तिल मर रहा पाकिस्तान! पुलवामा के बाद बैन से निकला दिवाला, लगा $40 अरब का फटका, 69% बढ़ा आयात
भारत से पंगा लेकर पाकिस्तान का धंधा साफ चौपट हो गया है. एक ओर जहां PAK का भारत से आयात बढ़ा है, 69% की उछाल आई है तो वहीं भारतीयों सामानों पर प्रतिबंध की वजह से पाकिस्तानी इंडस्ट्री को पुलवामा हमले के बाद से लगभग $40 अरब का नुकसान हुआ है.
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भारत से रिश्ते ख़राब कर पाकिस्तान तिल-तिल मर रहा है. उसे व्यापार से लेकर जान और माल का भारी नुकसान हो रहा है. अपने पड़ोसी भारत से लड़ाई, आतंकवाद का इस्तेमाल और ट्रेड बैन कर उसने खुद के पैर पर कुल्हाड़ी मार ली है. एक ओर जहां भारत से ट्रेड बैन होने के बावजूद पाकिस्तान का भारत से निर्यात (सेंकड रूट) में करीब 69% उछाल आई है, वहीं पाकिस्तान से भारत को निर्यात जीरो हुआ है. इसी बीच पाक पाक-भारत व्यापार परिषद ने एक बड़ा खुलासा किया है कि 2019 में पुलवामा आतंकी हमले और उसके बाद बढ़े तनाव के कारण भारत के साथ व्यापार निलंबित होने से पाकिस्तान को लगभग 40 अरब अमेरिकी डॉलर का आर्थिक नुकसान हुआ है.
भारत से पंगा लेकर पाकिस्तान को हुआ 40 अरब अमेरिकी डॉलर का नुकसान
इसी कारण पाक-भारत व्यापार परिषद के अध्यक्ष नूर मुहम्मद कसूरी ने दोनों पड़ोसी देशों से व्यापारिक संबंध बहाल करने का आग्रह किया. उन्होंने कहा कि इससे दोनों तरफ के व्यवसायों को फायदा होगा और निवेश, पर्यटन तथा क्षेत्रीय सहयोग के अवसर पैदा होंगे. उन्होंने आगे कहा कि व्यापार निलंबन के कारण पाकिस्तानी व्यवसायों को जरूरी कच्चा माल और अन्य सामान दूर-दराज के बाजारों से मंगाना पड़ा, जिससे परिवहन और माल ढुलाई की लागत बढ़ गई और डिलीवरी में भी अधिक समय लगने लगा. आपको बता दें कि पाकिस्तान को नजदीक के पड़ोसी भारत को छोड़कर रॉ मैटेरियल चीन से लेकर यूरोपीय देशों से मंगानी पड़ रही है, जो काफी महंगी पड़ रही है.
दवा-मेडिकल सेक्टर को 3 अरब अमेरिकी डॉलर का नुकसान!
कसूरी के मुताबिक बताया कि पाकिस्तान का फार्मास्युटिकल उद्योग (दवा-मेडिकल सेक्टर) भारत में उपलब्ध कच्चे माल पर निर्भर था. उन्होंने कहा कि अगर पड़ोसी देश भारत से आयात फिर से शुरू हो जाए, तो सालाना 2 से 3 अरब अमेरिकी डॉलर की बचत हो सकती है. यानी कि पाकिस्तानी फॉर्मा सेक्टर को अकेले 3 अरब के करीब का नुकसान हो रहा है. इतना ही नहीं दवाईयां भी काफी महंगी हो गई हैं और लाइफ सेविंग ड्रग्स की उपलब्धता भी कम हो गई है, जिसके लिए वो पहले भारत पर ही निर्भर था.
कपड़ा उद्योग को हो रहा 5 अरब अमेरिकी डॉलर का अतिरिक्त खर्चा
वहीं, घरेलू स्तर पर कपास का उत्पादन घटने से टेक्सटाइल (कपड़ा) उद्योग को अतिरिक्त लागत का सामना करना पड़ रहा है. उन्होंने बताया कि टेक्सटाइल मिलों को ब्राजील, मिस्र, चीन और अमेरिका से कपास मंगाना पड़ रहा है, जिससे लगभग 5 अरब अमेरिकी डॉलर का अतिरिक्त खर्च आ रहा है.
कसूरी ने आगे कहा कि भारत में इन क्षेत्रों में उत्पादन की भारी क्षमता होने के बावजूद, पाकिस्तान दूर-दराज के बाजारों से चीनी, खाद, सीमेंट, पेट्रोलियम उत्पाद, लोहा और स्टील, सब्जियां और भारी मशीनरी आयात कर रहा है. उन्होंने कहा कि द्विपक्षीय व्यापार फिर से शुरू होने से परिवहन लागत कम हो सकती है और समय पर आपूर्ति सुनिश्चित हो सकती है.
भारत से नहीं आ पा रहा कच्चा माल, गन्ने की ओर शिफ्ट हो रहे कपास उगाने वाले किसान
उन्होंने बताया कि भारतीय तेल रिफाइनरियां भौगोलिक रूप से पाकिस्तान के काफी करीब हैं, जिससे वहां से पेट्रोलियम का आयात सस्ता और तेज हो सकता है. उन्होंने कहा कि भारतीय कृषि और औद्योगिक उत्पादों तक पहुंच मिलने से पाकिस्तानी व्यवसायों को अपनी उत्पादन लागत कम करने में मदद मिल सकती है. कपास की खेती के तहत आने वाले क्षेत्र में आ रही कमी पर चिंता जताते हुए, कसूरी ने कहा कि पारंपरिक रूप से कपास उगाने वाले इलाकों के किसान अब गन्ने की खेती की ओर रुख कर रहे हैं.
पर्यटन सेक्टर को भी भारी नुकसान
इसका बुरा असर देश के टेक्सटाइल उद्योग और पूरी अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है. उन्होंने घरेलू कपास उत्पादन को फिर से बढ़ाने के लिए बेहतर कृषि नीतियों की मांग की. उन्होंने कहा कि व्यापार बहाल होने से दोनों तरफ के व्यवसायों को फायदा होगा और निवेश, पर्यटन तथा क्षेत्रीय सहयोग के नए अवसर पैदा होंगे. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान और अधिक भारतीय पर्यटकों को आकर्षित कर सकता है, खासकर उन लोगों को जो धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों के साथ-साथ अपने पूर्वजों के घरों और गांवों को देखना चाहते हैं. क्षेत्रीय आर्थिक सहयोग का जिक्र करते हुए, कसूरी ने श्रीलंका के आर्थिक संकट के दौरान भारत द्वारा दी गई वित्तीय सहायता का उदाहरण दिया.
उन्होंने बताया कि कैसे पड़ोसी देश मुश्किल समय में एक-दूसरे की मदद कर सकते हैं. उन्होंने जोर देकर कहा कि राजनीतिक मतभेदों की वजह से दोनों देशों को आर्थिक अवसरों की तलाश करने से नहीं रुकना चाहिए, और कहा कि लंबित विवादों को बातचीत के जरिए सुलझाया जा सकता है. उन्होंने कहा, "पाकिस्तान और भारत के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और पारिवारिक संबंध हैं, जो बेहतर रिश्तों की नींव बन सकते हैं."
भारत से धड़ाधड़ माल मंगवा रहा पाक
आपको बता दें कि पाकिस्तान भारत से प्रतिबंधों और ट्रेड रिलेशन असमान्य होने के बावजूद पाकिस्तान ने धड़ाधड़ भारत से सामानों का आयात किया है. पाकिस्तानी अख़बार डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक़ सीमा पर तनाव के बावजूद पाकिस्तान भारत से जमकर खरीदारी कर रहा है.
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पाकिस्तान का भारत से आयात में 69% का उछाल
स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान की ओर से जारी किए गए ताज़ा आंकड़ों ने सबको चौंका दिया है. वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही यानी जुलाई से सितंबर के बीच, पाकिस्तान ने भारत से करीब 6.174 करोड़ डॉलर का सामान खरीदा है. अगर पिछले साल की इसी अवधि से इसकी तुलना करें तो यह लगभग 68.90 प्रतिशत ज्यादा है. पिछले वित्त वर्ष में इसी दौरान यह आंकड़ा 3.655 करोड़ डॉलर था. भारत-पाकिस्तानव्यापार संबंध
पाकिस्तान का भारत को निर्यात रहा जीरो
आकड़ों की मानें तो एक तरफ जहां पाकिस्तान भारत से अपनी जरूरत का सामान मंगवा रहा है, वहीं दूसरी तरफ भारत को उसका निर्यात नील बट्टे सन्नाटा यानी कि 'जीरो' (0) रहा. यानी कि पाकिस्तान से कोई भी सामान भारतीय बाजार में नहीं पहुंचा.
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ऐसे में सवाल उठता है कि जब दोनों देशों के बीच सीधे तौर पर कोई कूटनीतिक और व्यापारिक संबंध नहीं है, तो फिर यह सामान किस रास्ते से पाकिस्तान पहुंच रहा है? व्यापार जगत के जानकारों का मानना है कि पाकिस्तानी बाजार में भारतीय सामानों की बहुत डिमांड है. इसलिए, सीधे व्यापार बंद होने के बावजूद, पाकिस्तान किसी तीसरे देश (दुबई) के जरिए भारतीय माल आयात कर रहा है.