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भारत के UPI पेमेंट सिस्टम का पूरी दुनिया में बजेगा डंका, सरकार ने बनाया तगड़ा प्लान, अमेरिकी वीजा-मास्टरकार्ड की उड़ी नींद

भारत अपने स्वदेशी डिजिटल भुगतान सिस्टम यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस ( UPI) को ज्यादा से ज्यादा देशों तक पहुंचाने के लिए काम कर रहा है. इसे अन्य देशों तक ले जाने की तैयारी है. पूर्वी एशिया पर भारत की खास नजर है. इसको लेकर मोदी सरकार का खास प्लान है. इसने अमेरिकी वीजा-मास्टरकार्ड की नींद उड़ा दी है.

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14 Jan 2026
( Updated: 14 Jan 2026
03:57 PM )
भारत के UPI पेमेंट सिस्टम का पूरी दुनिया में बजेगा डंका, सरकार ने बनाया तगड़ा प्लान, अमेरिकी वीजा-मास्टरकार्ड की उड़ी नींद
UPI Payment System

भारत का डिजिटल पेमेंट सिस्टम पूरी दुनिया में झंडे गाड़ रहा है. मास्टरकार्ड, VISA कार्ड और अमेरिकन एक्सप्रेस जैसे बड़े और दिग्गज पेमेंट गेटवे होने के बावजूद इसने अपनी नई मुकाम हासिल कर ली है और अब दुनियाभर के देशों के सामने पेमेंट अल्टरनेटिव के तौर पर उभर रहा है. आपको बताएं कि अब भारत के अलावा यूपीआई को अन्य देशों तक ले जाने की तैयारी है. भारत की खासकर पूर्वी एशिया पर खास नजर है जहां पर ये गेटवे के सामने असीम संभावनाएं हैं. यूपीआई सेफ, फिजिबल और इजीली अवलेबल गेटवे है, जिसके कारण काफी स्मूथ है और एक्सेस करना आसान है.

आपको बता दें कि फिलहाल भारत अपने स्वदेशी डिजिटल भुगतान सिस्टम यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) को ज्यादा से ज्यादा देशों तक पहुंचाने के लिए काम कर रहा है. वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस) के सचिव एम नागराजू ने जानकारी दी है कि इसको लेकर पूर्वी एशिया के देशों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. 

भारत में 50% भुगतान UPI से

राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित ग्लोबल इन्क्लूसिव फाइनेंस इंडिया समिट में बोलते हुए नागराजू ने कहा कि यूपीआई ने भारत में डिजिटल भुगतान को तेजी से बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है. आज देश में होने वाले कुल डिजिटल ट्रांजेक्शन का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा यूपीआई के माध्यम से होता है. 

अभी दुनिया के 8 देशों में UPI पेमेंट की सुविधा

बौकल DFS सरकार इस सफल प्रणाली को अब दूसरे देशों तक भी ले जाना चाहती है, ताकि भारत की डिजिटल भुगतान व्यवस्था दुनिया भर में पहचानी जा सके. वर्तमान में 8 देशों में यूपीआई के जरिए ट्रांजेक्शन किए जा रहे हैं. इनमें भूटान, सिंगापुर, कतर, मॉरीशस, नेपाल, संयुक्त अरब अमीरात, श्रीलंका और फ्रांस शामिल हैं.

पूर्वी एशिया के देशों में पर भारत की नजर

विदेश में यूपीआई की सुविधा होने से भारतीय पर्यटक बिना नकद पैसे या अंतरराष्ट्रीय कार्ड के ही डिजिटल भुगतान कर सकते हैं, जिससे उन्हें काफी सहूलियत मिलती है. एम नागराजू ने कहा कि भारत पहले ही कुछ देशों में यूपीआई शुरू कर चुका है और अब इसे और आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है. उन्होंने बताया कि इस समय सरकार का विशेष ध्यान पूर्वी एशिया के देशों पर है, ताकि यूपीआई को एक वैश्विक भुगतान प्लेटफॉर्म बनाया जा सके.

दिसंबर में 21 अरब से ज्यादा ट्रांजेक्शन

उन्होंने बताया कि भारत में यूपीआई का इस्तेमाल बहुत तेजी से बढ़ा है. केवल दिसंबर 2025 में ही यूपीआई के जरिए 21 अरब से ज्यादा ट्रांजेक्शन हुए. नागराजू के अनुसार, डिजिटल भुगतान के तेजी से बढ़ने का एक बड़ा कारण प्रधानमंत्री जनधन योजना के तहत खुले बैंक खाते हैं. इन अकाउंट्स में लोगों द्वारा रखा जाने वाला औसत पैसा भी धीरे-धीरे बढ़ रहा है. यूपीआई का संचालन नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) करता है, जो देश की खुदरा भुगतान और निपटान प्रणालियों को संभालता है. एनपीसीआई भारतीय रिजर्व बैंक और भारतीय बैंक संघ द्वारा समर्थित एक पहल है.

डिजिटल भुगतान के अलावा, नागराजू ने देश के सूक्ष्म उद्यमों को आगे बढ़ाने की जरूरत पर भी जोर दिया. उन्होंने कहा कि देश में करोड़ों छोटे उद्यम हैं, लेकिन बहुत कम उद्यम ही मध्यम या बड़े स्तर तक पहुंच पाते हैं. उन्होंने आगे कहा कि जब सूक्ष्म उद्यमों को बाजार तक बेहतर पहुंच, उत्पादन बढ़ाने के साधन, तकनीक और आधुनिक मशीनें मिलेंगी, तभी वे आगे बढ़कर बड़े उद्यम बन सकेंगे.

यूपीआई ट्रांजैक्शन में हुई 29 प्रतिशत की तेज बढ़ोतरी

इतना ही नहीं पिछले साल दिसंबर में यूपीआई ट्रांजैक्शन में हुई 29 प्रतिशत की तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है. नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) द्वारा गुरुवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर में यूपीआई के जरिए 21.63 अरब ट्रांजैक्शन हुए, जो पिछले साल की तुलना में 29 प्रतिशत ज्यादा हैं. वहीं, ट्रांजैक्शन की कुल राशि भी 20 प्रतिशत बढ़कर 27.97 लाख करोड़ रुपए हो गई.

दिसंबर में रोजाना औसतन 90,217 करोड़ रुपए का ट्रांजैक्शन

महीने के हिसाब से भी यूपीआई ट्रांजैक्शन की संख्या और रकम में अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई. दिसंबर में रोजाना औसतन 90,217 करोड़ रुपए का ट्रांजैक्शन हुआ, जबकि नवंबर में यह आंकड़ा 87,721 करोड़ रुपए था. दिसंबर में रोजाना औसतन 698 मिलियन (करीब 69.8 करोड़) यूपीआई ट्रांजैक्शन हुए, जो नवंबर के 682 मिलियन से ज्यादा हैं.

नवंबर महीने में यूपीआई ट्रांजैक्शन की संख्या 20.47 अरब रही थी, जो सालाना आधार पर 32 प्रतिशत की बढ़त थी. उस महीने लेन-देन की कुल राशि 26.32 लाख करोड़ रुपए रही थी, जिसमें 22 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई थी.

किस माध्यम से कितना पेमेंट

इसी दौरान, इंस्टेंट मनी ट्रांसफर सिस्टम (आईएमपीएस) के जरिए दिसंबर में कुल 6.62 लाख करोड़ रुपए का लेन-देन हुआ. यह पिछले साल की तुलना में 10 प्रतिशत ज्यादा है और नवंबर के 6.15 लाख करोड़ रुपए से भी अधिक है.

आईएमपीएस के जरिए दिसंबर में 380 मिलियन ट्रांजैक्शन हुए, जबकि नवंबर में यह संख्या 369 मिलियन थी. वहीं रोजाना आईएमपीएस से होने वाला ट्रांजैक्शन 21,269 करोड़ रुपए रहा, जो नवंबर में 20,506 करोड़ रुपए था.

भारत में अब 70.9 करोड़ सक्रिय यूपीआई क्यूआर कोड

एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, भारत में अब 70.9 करोड़ सक्रिय यूपीआई क्यूआर कोड हैं, जो जुलाई 2024 के बाद से 21 प्रतिशत की बढ़ोतरी दिखाते हैं. किराना दुकानों, मेडिकल स्टोर, बस-अड्डों, रेलवे स्टेशनों और गांवों तक क्यूआर कोड की सुविधा पहुंच जाने से अब स्कैन करके भुगतान करना पूरे देश में आम हो गया है.

रिपोर्ट में बताया गया कि व्यक्ति से दुकानदार (पी2एम) वाले लेन-देन, व्यक्ति से व्यक्ति (पी2पी) लेन-देन से ज्यादा रहे. इसका मतलब है कि लोग रोजमर्रा की खरीदारी में यूपीआई का ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं.

पी2एम ट्रांजैक्शन 35 प्रतिशत बढ़कर अब 37.46 अरब हो गए, जबकि पी2पी ट्रांजैक्शन 29 प्रतिशत बढ़कर 21.65 अरब हो गए. औसतन हर ट्रांजैक्शन की राशि 1,262 रुपए हो गई, जो पहले 1,363 थी. इससे पता चलता है कि लोग अब छोटे-छोटे भुगतानों जैसे यात्रा, खाना, दवा और स्थानीय खरीदारी के लिए यूपीआई का ज्यादा उपयोग कर रहे हैं.
यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) अब दुनिया का टॉप रियल टाइम पेमेंट सिस्टम बन चुका है.

केंद्रीय मंत्री सिंधिया ने एक्स पर यूपीआई की इस उपलब्धि को एक इंफोग्राफिक के साथ दर्शाया है. उनके द्वारा साझा किए गए यूपीआई आंकड़ों के अनुसार, 650.26 मिलियन डेली ट्रांजैक्शन काउंट के साथ यूपीआई ने वीजा को भी पीछे छोड़ दिया है, जहां वीजा के लिए यह आंकड़ा 639 मिलियन दर्ज किया गया है.

वीजा को पीछे छोड़ यूपीआई दुनिया का टॉप रियल टाइम पेमेंट सिस्टम

आपको बता दें कि महज 9.5 वर्षों में वीजा को पीछे छोड़ यूपीआई दुनिया का टॉप रियल टाइम पेमेंट सिस्टम बन गया है. जुलाई 2025 के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक 650.26 मिलियन डेली ट्रांजैक्शन काउंट के साथ यूपीआई ने वीजा को भी पीछे छोड़ दिया है, जहां वीजा के लिए यह आंकड़ा 639 मिलियन दर्ज किया गया है. हर दिन बढ़ते ट्रांजैक्शन के साथ आंकड़ों में बदलाव संभव है.

यूपीआई का इस्तेमाल वर्तमान में 7 देशों में होता है, जिनमें सिंगापुर, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), फ्रांस, भूटान, नेपाल, श्रीलंका और मॉरीशस शामिल है. इसके अलावा, कुछ अन्य देश भी यूपीआई को अपनाने को लेकर साझेदारी आगे बढ़ाने पर विचार कर रहे हैं.

IMF ने भी की UPI की तारीफ

पिछले दिनों अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के एक नोट में भी इस बात पर जोर दिया गया था कि इंटीग्रेटेड पेमेंट इंटरफेस (यूपीआई) बेस्ड डिजिटल पेमेंट को व्यापक रूप से अपनाने के कारण भारत अब दुनिया के किसी भी अन्य देश की तुलना में तेज भुगतान करता है.

यूपीआई की शुरुआत 2016 में भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) द्वारा की गई थी, जिसके बाद से ही यूपीआई का तेजी से विकास हुआ है. 'ग्रॉइंग रिटेल डिजिटल पेमेंट्स : द वैल्यू ऑफ इंटरऑपरेबिलिटी' शीर्षक वाले नोट के अनुसार, यूपीआई अब प्रति माह 18 अरब से ज्यादा लेनदेन प्रोसेस करता है और भारत में दूसरे इलेक्ट्रॉनिक रिटेल पेमेंट सिस्टम पर भी हावी है.

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खास बात यह है कि भारत की डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (डीपीआई) ने लोगों को आसानी से डिजिटल सेवाओं से जोड़ने में बड़ी भूमिका निभाई है. इससे शहर और गांव के बीच की दूरी कम हुई है और भारत दुनिया में एक मजबूत डिजिटल देश बनकर उभरा है.

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