महाराष्ट्र में बारिश से फसल तबाह, सरकार ने जारी की 128 करोड़ से ज्यादा की मदद
महाराष्ट्र में हाल के महीनों में हुई बेमौसम बारिश ने किसानों को भारी नुकसान पहुंचाया है. राज्य सरकार ने इस नुकसान की भरपाई के लिए राहत राशि जारी की है. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल बैठक में इस संबंध में विस्तृत जानकारी साझा की गई.
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महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में अक्टूबर से दिसंबर 2025 और जनवरी 2026 से अप्रैल 2026 के बीच हुई बेमौसम बारिश से प्रभावित किसानों को मदद दी है. मंत्रिमंडल की बैठक में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में किसानों को दी गई मदद की जानकारी दी गई.
बेमौसम बारिश से हुए नुकसान के लिए किसानों को 128 करोड़ की सहायता
महाराष्ट्र सरकार के मुताबिक, अक्टूबर से दिसंबर 2025 के दौरान हुई बेमौसम बारिश से लगभग 1,14,752 हेक्टेयर कृषि क्षेत्र प्रभावित हुआ और 1,80,574 किसानों की फसल और उत्पादन को नुकसान हुआ. इस नुकसान की भरपाई के लिए सरकार ने 128.65 करोड़ रुपए की सहायता प्रदान की. प्रभावित मुख्य जिले चंद्रपुर, धुले, गढ़चिरौली, जलगांव, नाशिक, रायगढ़ और सिंधुदुर्ग थे.
सरकार ने दी जानकारी
सरकार के अनुसार, जनवरी से मार्च 2026 तक हुई बारिश से 1,45,606 हेक्टेयर क्षेत्र प्रभावित हुआ और 2,33,890 किसानों को नुकसान हुआ. इस दौरान केला, प्याज, पपीता, आम, अंगूर, गेहूं, चना, ज्वार जैसी फसलें प्रभावित हुईं. लातूर, सोलापुर, नाशिक, सातारा, धुले, नंदुरबार, यवतमाल, अहिल्यानगर, पुणे, जालना, छत्रपति संभाजीनगर, बुलढाणा और बीड जिलों में अधिक नुकसान दर्ज किया गया. इस बेमौसम बारिश के कारण 5 लोगों की मृत्यु, 9 लोग घायल और 36 पशुओं की मौत हुई.
आगे बताया गया कि अप्रैल 2026 में हुई बारिश से भी प्रारंभिक अनुमान के अनुसार 1,94,329 किसानों की 1,22,993 हेक्टेयर भूमि प्रभावित हुई है. वर्तमान में जनवरी से हुए नुकसान के पंचनामे की प्रक्रिया जारी है.
इसके साथ ही, सिंचाई और जलसंपदा में सुधार के लिए सरकार ने जुलाई 2022 से अब तक 41 परियोजनाएं पूरी कर 105 टीएमसी जल भंडारण क्षमता तैयार की है, जिससे लगभग 2.95 लाख हेक्टेयर अतिरिक्त सिंचाई क्षमता विकसित हुई है.
225 परियोजनाओं को संशोधित और प्रशासनिक मंजूरी
इसके साथ ही 225 परियोजनाओं को संशोधित और प्रशासनिक मंजूरी दी गई है, जिनकी कुल लागत 4.35 लाख करोड़ रुपए है. इन सभी परियोजनाओं के पूर्ण होने पर राज्य में 33.45 लाख हेक्टेयर सिंचाई क्षमता विकसित होने की संभावना है.
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