'ईसाईयों के पास 135 देश, हमारे पास केवल हिंदुस्तान', उत्तराखंड में धर्मांतरण का खेल, बजरंग दल ने कुछ इस तरह रोका
उत्तराखंड में धर्मांतरण के खेल का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. वहीं जिस तरह बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने अपने तथ्यों, इतिहास, कानूनी प्रावधान से परिचय कराकर इस सभा को रोका, उसकी खूब चर्चा हो रही है.
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देवभूमि उत्तराखंड की एक सुनियोजित साजिश के तहत डेमोग्राफी और पहचान बदलने का प्रयास लंबे समय से चल रहा है. इस कार्य को बीजेपी और हिंदू संगठन लैंड जिहाद, लव जिहाद और जबरन धर्मांतरण की संज्ञा देते आए हैं. इसका एक और पहलू है जिसमें भोले-भाले आदिवासियों, हिंदुओं, पिछड़ों को प्रलोभन, सुनहरे ख्वाब और अंधविश्वास के जरिए बहलाया जाता है और धर्म बदलवा दिया जाता है. इस काम में मिशनरी वाले काफी सक्रिय है. इसको लेकर प्रदेश की धामी सरकार काफी सक्रिय है.
वहीं अन्य सामाजिक और धार्मिक संगठन भी इस को रोकने में लगे हुए हैं. इसी क्रम में बजरंग दल के कार्यकर्ताओं द्वारा खटीमा में एक कार्यक्रम में जाकर ऐसे ही एक धर्मांतरण की गतिविधि को रोकने और उन्हें समझाकर, पूरे मामले से अवगत कराने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.
अपने स्वभाव से विपरीत बजरंग दल के कार्यकर्ता ने जिस तरह लोगों को समझाया, कानूनी पहलू, सामाजिक परेशानी, इतिहास समझाया, उसकी खूब चर्चा हो रही है. वायरल वीडियो में उन्होंने सभा में शामिल बच्चों, महिलाओं, लोगों को भारत का इतिहास, ईसाईयों के देश आदि को लेकर वस्तुस्थिति से अवगत कराया.
बजरंग दल के कार्यकर्ता ने लोगों को दिलाई महाराणा प्रताप के संघर्ष की याद!
बजरंग दल के लोगों ने धर्मांतरण सभा में शामिल होने आए लोगों से कहा कि महाराणा प्रताप ने हिंदुत्व की रक्षा करने के लिए इतनी लड़ाई लड़ी, इतने युद्ध लड़े और आक्रांताओं को देश से भगाया. हमारे महाराणा प्रताप जो थे, उनका कितना गौरवशाली इतिहास है, क्या उसके बारे में आप लोगों को जानकारी है? उन लोगों ने उस कालखंड में जो इतने बड़े युद्ध लड़े और अपने प्राणों की आहुति देकर आप सबको और हम समाज को एक सुंदर माहौल दिया, तो क्या आप सब लोग स्वयं को उनका वंशज मानते हैं? यह जो क्रिश्चियन वाला काम है और जो आप यहां पर सभा कर रहे हैं; सबसे पहली बात तो यह है कि उत्तराखंड में इस तरह की सभा करना गैरकानूनी है.
‘ईसाई बनते हो तो नाम भी बदलने होंगे’
दूसरा यह कि सुप्रीम कोर्ट से एक जजमेंट आया हुआ है, उस जजमेंट में यह स्पष्ट रूप से लिखा गया है कि अगर आप ईसा मसीह को मानते हैं या क्रिश्चियन धर्म अपनाते हैं, तो आपका जो SC/ST वाला लाभ (बेनिफिट) है, वह खत्म हो जाएगा. आपके आधार कार्ड में आपका जो 'ईसू' वाला नाम है, आप उसी को लगाइए; आपका जो अपना वर्तमान नाम है, वह नहीं चलेगा. उत्तराखंड के अंदर जो यूसीसी (UCC) लागू हुआ है, आपको इस बात की जानकारी होगी ही. इस उत्तराखंड के अंदर यहाँ की सरकार ने इस सभा को अवैध बनाया हुआ है और इसमें दस साल की सजा का प्रावधान रखा गया है. तो अब आप बताइए कि यह जो सभा है, वह क्या है?
ईसाईयों के पास 135 देश, हिंदुओं के पास केवल हिंदुस्तान
इस दौरान बजरंग दल के एक कार्यकर्ता ने पूछा कि पहली बात तो यह कि अपने घर के अंदर इतने लोगों को इकट्ठा करने की क्या आपको अनुमति है? उन्होंने आगे कहा कि क्रिश्चियन धर्म के एक सौ पैंतीस देश हैं, पूरे विश्व में 135 देश हैं; 1947 में जब यहाँ से अंग्रेज चले गए, तो फिर यहाँ यह सब क्या चल रहा है? वहीं हिंदुओं के लिए केवल एक ही जगह है हिंदुस्तान. अगर कोई यहाँ से भगाया जाएगा तो कहाँ जाएगा? हमारे पास कहीं और जाने के लिए दूसरा कोई स्थान नहीं है.
Locals gathered at a Christian man's house chanting "Hallelujah" in Khatima, Uttarakhand.
— Team Hindu United (@TeamHinduUnited) April 3, 2026
Bajrang Dal activists reached the spot and gave a powerful reminder:
"Maharana Pratap ate grass rotis but never gave up his Dharma. Be proud of your Hindu identity!" pic.twitter.com/BKLxwZBUxT
बजरंगबली के नारे लगे लगाने!
इसलिए हम इस बात को लेकर बहुत गंभीर (सीरियस) हैं. जहां-जहां ये सेंटर चल रहे हैं, हम सब उन जगहों पर जा रहे हैं और सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं. इस दौरान संभवतः स्थानीय पुलिस भी आई और आयोजक से अनुमति को लेकर सवाल भी किया गया. इसके अलावा, कुछ लोग (जो धर्मांतरण में शामिल थे) बजरंगबली के नारे भी लगाने लगे, शायद मासूम बनने के लिए या पुलिस को दिखाने के लिए. इस पर कार्यकर्ताओं ने कहा कि दिखावे के लिए नारे मत लगाओ, तुम्हारे अलावा यहां और कोई नारा नहीं लगा रहा है.
उत्तराखंड में धर्मांतरण रोकने को लेकर गंभीर धामी सरकार
आपको बता दें कि राज्य में सरकार धर्मांतरण और जनसांख्यिकी परिवर्तन को रोकने के लिए काफी प्रयास कर रही है. ऑपरेशन कालनेमि चलाया गया, UCC कानून लागू किया गया. इस संबंध में सीएम पुष्कर सिंह धामी ने बीते महीने कहा था कि राज्य सरकार महिलाओं की सुरक्षा, सामाजिक समरसता और जनसंख्या संतुलन को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है. उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड देश का पहला राज्य बना है, जिसने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू कर एक ऐतिहासिक पहल की है, जो समाज में समानता और न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी.
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उन्होंने आगे कहा था कि राज्य में सख्त धर्मांतरण विरोधी कानून लागू किया गया है, जिससे अवैध और जबरन धर्मांतरण की घटनाओं पर प्रभावी रोक लगी है. उन्होंने स्पष्ट किया कि इस प्रकार के कानून समाज में पारदर्शिता, सुरक्षा और विश्वास को मजबूत करने का कार्य करते हैं. मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि सरकार का उद्देश्य किसी विशेष वर्ग के खिलाफ नहीं, बल्कि सभी नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करना है. उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे जागरूक रहें और समाज में सकारात्मक बदलाव के लिए अपनी भूमिका निभाएं.
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