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महाकुंभ का हिस्सा बनेगी Apple के फाउंडर स्टीव जॉब्स की पत्नी, 17 दिन तक जिएंगी साधु-संत की जिंदगी

Mahakumbh 2025: महाकुंभ का महत्व धार्मिक रूप से अत्यधिक है , और इसमें हर उम्र ,जाती और पंथ के लोग अपनी आस्था व्यक्त करने के लिए आते है। देश ही नहीं विदेश से भी बड़ी बड़ी हस्तिया महाकुंभ में शरीक होने आ रही है।

महाकुंभ का हिस्सा बनेगी Apple के फाउंडर स्टीव जॉब्स की पत्नी, 17 दिन तक जिएंगी साधु-संत की जिंदगी
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Mahakumbh 2025: महाकुंभ बस कुछ दिन मे शुरू होने वाला है।सबसे बड़ा धार्मिक समागम महाकुंभ 13 जनवरी से 26 जनवरी 2025 तक रहेगा।12 साल बाद प्रयागराज में इस विशाल आयोजन में दुनिया भर से लाखों भक्त , संत और साधक शामिल होंगे। महाकुंभ का महत्व धार्मिक रूप से अत्यधिक है , और इसमें हर उम्र ,जाती और पंथ के लोग अपनी आस्था व्यक्त करने के लिए आते है। देश ही नहीं विदेश से भी बड़ी बड़ी हस्तिया महाकुंभ में शरीक होने आ रही है।वहीं इन्ही में से एक है एप्पल कंपनी के को -फाउंडर स्टीव जॉब्स की पत्नी लॉरेन पावेल।जानिए इस खबर को विस्तार से ....

एप्पल के स्टीव जाब्स की पत्नी का महाकुंभ में 'कल्पवास'

स्टीव जॉब्स की तरह अब उनकी पत्नी लॉरेन का हिन्दू और बौद्ध धर्म से ख़ास लगाव है।अरबपति कारोबार लॉरेन महाकुंभ में 29 जनवरी तक रहेगी। पौष पूर्णिमा पर लॉरेन पावेल अन्य वीवीआईपी महिलाओ के साथ प्रथम आस्था की डुबकी लगाएगी और संगम की रेती पर कल्पवास भी करेगी।  रिपोर्टर्स के अनुसार ,निरंजनी आखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद के शिविर में लॉरेन पॉवेल के रहने की व्यवस्था की गई है। 

क्या होता है 'कल्पवास'

'कल्पवास' एक संस्कृत से उत्पन्न हुआ एक शब्द है।जहा 'कल्प' का मतलब ब्रह्मांडीय  युग और 'वास' का अर्थ प्रवास या वास।  संगम पर भक्तों के आगमन के साथ ही अनुष्ठान शुरू होता है। जहा पर वे सारी सुख सुविधा त्याग करके अपने स्थायी डेरे लगाते है। महाकुंभ के लिए इस साल कल्पवास के नियमो का पालन पौष महीने के 11 वे दिन से लेकर माघ महीने से 12 वें दिन तक करना होगा। कई लोग मकर सक्रांति के दिन से भी कल्पवास की शुरुआत करते है।  पूरे माघ महीने में संगम पर निवास कर तप , साधना ,पूजन , अनष्ठान को ही कल्पवास कहा जाता है।  

महाकुंभ में दुनिया चलाने वाली महिलाओं का प्रवास 

वहीं आपको बता दें, सुधा मूर्ति भी महाकुंभ में संगम में स्नानं करेगी , उनके ठहरने के लिए उल्टा किला के पास कॉटेज तैयार किया गया है।  वहीं सावित्री देवी जिंदल , स्वामी अवेधशानद व चितानंद मुनि के शिविरों में ठहरेंगी। वहीं हेमा मालिनी जूना आखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवेधशानंद गिरी महाराज के शिविर में ठहरेगी।

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