×
जिस पर देशकरता है भरोसा

पश्चिम बंगाल में ममता की 'रेड पॉलिटिक्स'... फिर से सहानुभूति को वोट जुटाने का 'हथियार' बनाने की जुगत में

ममता बनर्जी वर्षों से ईडी व सीबीआई की कार्रवाइयों को केंद्र का 'बदला' बताकर वोटबैंक जोड़ती रहीं. 2021 के विधानसभा चुनावों से पूर्व कोयला तस्करी, चिटफंड व नारदा स्टिंग मामलों में छापे हुए.

Author
21 Jan 2026
( Updated: 24 Jan 2026
08:03 AM )
पश्चिम बंगाल में ममता की 'रेड पॉलिटिक्स'... फिर से सहानुभूति को वोट जुटाने का 'हथियार' बनाने की जुगत में
Advertisement

पश्चिम बंगाल की राजनीतिक पटरी पर छापेमारियों का शोर फिर से गूंजा है. प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने राजनीतिक रणनीति कंपनी आई-पैक के प्रमुख प्रतीक जैन के घर और दफ्तर पर छापा मारा, तो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने खुद मौके पर पहुंचकर अधिकारियों को रोक दिया. उन्होंने दस्तावेज छीन लिए और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर एजेंसियों के मनमाने दुरुपयोग का आरोप लगाया. उनका कहना था कि केंद्र उनकी चुनावी रणनीति चुराना चाहता है, क्योंकि विधानसभा चुनाव सिर पर हैं. यह नाटकीय विरोध ममता की परीक्षित रणनीति का आईना है, केंद्रीय कार्रवाइयों को सहानुभूति का हथियार बनाकर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को लाभ पहुँचाना.

छापों से सहानुभूति की फसल

ममता बनर्जी वर्षों से ईडी व सीबीआई की कार्रवाइयों को केंद्र का 'बदला' बताकर वोटबैंक जोड़ती रहीं. 2021 के विधानसभा चुनावों से पूर्व कोयला तस्करी, चिटफंड व नारदा स्टिंग मामलों में छापे हुए. ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड की खदानों से अवैध कोयला चोरी के आरोप में आसनसोल, कोलकाता समेत कई स्थानों पर तलाशी चली. 2014 के नारदा स्टिंग में टीएमसी नेताओं को रिश्वत लेते दिखाया गया. मई 2021  में सीबीआई ने मंत्रियों फिरहाद हकीम, सुब्रत मुखर्जी, विधायक मदन मित्र व सोवन चटर्जी को गिरफ्तार किया. कोयला घोटाले में अभिषेक बनर्जी व उनकी पत्नी का नाम भी उभरा. नंदीग्राम दौरे पर कथित धक्के से चोटिल होकर ममता ने व्हीलचेयर व प्लास्टरबंद हाथों से प्रचार किया. 'माँ, माटी, मानुष' का नारा बुलंद कर उन्होंने मोदी लहर को चुनौती दी. टीएमसी को 213 सीटें मिलीं, भाजपा 77 पर सिमट गई.

आंकड़ों में उजागर दबदबा

Advertisement

शतरंज की बिसात पर ममता की चतुराई भरी चाल आंकड़ों में स्पष्ट है. पश्चिम बंगाल विधान सभा चुनाव- 2011 में टीएमसी को 184 सीटें, वामपंथी 62 पर ठहर गए. 2016 में 211 सीटें, भाजपा को 3, वाम को 32 सीटें मिली थीं. 2021 में 213 सीटें हासिल कीं. इसी तरह लोकसभा में भी मजबूती बरकरार रखी. 2019 में 42 में से टीएमसी को 22, भाजपा को 18, कांग्रेस को 2 सीटें मिली थीं. 2024 में टीएमसी 29 पर पहुँची, भाजपा 12 पर सिमटी, कांग्रेस को 1 सीट मिली. 11 दिसंबर 2019 के नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) को अल्पसंख्यक-विरोधी बताकर ममता ने एमजीएनआरईजीए, पीएमआवास जैसे फंड रोकने का मुद्दा गढ़ा. भाजपा को 'बाहरी' कहकर बंगाली अस्मिता जगाकर सत्ता में आई.

जड़ें सिंगूर-नंदीग्राम में

Advertisement

यह रणनीति पुरानी है. 2006-07 के सिंगूर-नंदीग्राम आंदोलनों में वाम सरकार के दमन ने ममता को स्थापित किया, जिसमें नंदीग्राम फायरिंग से 14 किसानों की मौत हुई थीं. पुलिस व सीपीआई(एम) कैडरों के हमलों का रोना रोकर 'माँ, माटी, मानुष' का नारा बुलंद किया. 2009-11 के चुनावों में वाम को सत्ता से उखाड़ फेंका. TMC ने भ्रष्टाचार के खिलफ जाँच एजेंसी द्वारा की गयी हर छापेमरी को बंगाल की संस्कृति पर प्रहार बताती हैं, यही नहीं केंद्र सरकार को बाहरी बताते हुए फंड रोकने का निरंतर आरोप लगायी, सीएए के खिलफ खुलकर बयानबजी कर अल्पसंख्यकों के पक्ष में उतर गईं और अब ईडी रेड से वोट की जुगाड़ में हैं. भाजपा को बाहरी सिद्ध कर अल्पसंख्यक-गरीब वोट एकत्रित करती हैं.

भविष्य की राह

एक बार फिर 'बाहरी बनाम बंगाली' का स्वर बुलंद है. ममता जाँच एजेंसी की छापेमारी को प्रतिशोध का मुद्दा बना रही हैं. सवाल उठत है क्या 2026 में यह जादू चलेगा?

Advertisement

यह भी पढ़ें

भ्रष्टाचार के सवाल लटके हैं, मगर सहानुभूति की राजनीति बंगाल की धमक बनी हुई है. वैसे लोकतंत्र में जनता का फैसला तय करेगा कि पश्चिम बंगाल का भविष्य किस ओर रुख करेगा.
लेखक: अखिलेश सिन्हा, वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक, आर्थिक एवं भू-राजनीतिक विश्लेषक

Tags

Advertisement
टिप्पणियाँ 0
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
शॉर्ट्स
वेब स्टोरीज़
होम वीडियो खोजें