×
जिस पर देशकरता है भरोसा
Advertisement

'चीन के साथ हो गया काम, अब भारत की बारी...', अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का ट्रेड डील को लेकर बड़ा ऐलान

बिग ब्यूटीफुल बिल को लेकर एक पब्लिक कार्यक्रम के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को लेकर एक महत्वपूर्ण बयान दिया है, जिससे दोनों देशों के बीच संभावित बड़े व्यापारिक समझौते की अटकलें तेज़ हो गई हैं.

'चीन के साथ हो गया काम, अब भारत की बारी...', अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का ट्रेड डील को लेकर बड़ा ऐलान

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर सुर्खियों में हैं. 'बिग ब्यूटीफुल बिल' को लेकर एक पब्लिक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने भारत को लेकर एक महत्वपूर्ण बयान दिया है, जिससे दोनों देशों के बीच संभावित बड़े व्यापारिक समझौते की अटकलें तेज़ हो गई हैं.

कार्यक्रम के दौरान अपने संबोधन में राष्ट्रपति ट्रंप ने चीन के साथ हुए हालिया समझौते का ज़िक्र करते हुए कहा, "हर कोई डील करना चाहता है और उसका हिस्सा बनना चाहता है. कुछ महीने पहले तक प्रेस कह रही थी कि क्या वाकई किसी को इन सौदों में दिलचस्पी है? खैर, हमने कल ही चीन के साथ एक बड़ा समझौता किया है. हम बेहतरीन डील्स कर रहे हैं और अब हम एक और बड़ा सौदा करने जा रहे हैं, शायद भारत के साथ." ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका ने हाल ही में चीन के साथ एक महत्वपूर्ण व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं. ऐसे में भारत के साथ प्रस्तावित डील की संभावना दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों में एक नए मोड़ की ओर इशारा कर रही है. हाल के वर्षों में अमेरिका और भारत के बीच व्यापार और रक्षा सहयोग में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है. हालांकि, कुछ मुद्दों पर मतभेद भी उभरते रहे हैं, जैसे टैरिफ को लेकर विवाद या अमेरिकी कंपनियों को भारत में बेहतर पहुंच की मांग. ट्रंप के इस संकेत को लेकर जानकारों का मानना है कि यदि यह डील आकार लेती है, तो यह न सिर्फ भारत-अमेरिका आर्थिक संबंधों को मजबूती देगी, बल्कि वैश्विक व्यापार समीकरणों को भी प्रभावित कर सकती है.

हर किसी से डील नहीं करेंगे: ट्रंप
'बिग ब्यूटीफुल बिल' कार्यक्रम के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका अब हर देश के साथ व्यापारिक समझौते नहीं करेगा, बल्कि चुनिंदा देशों के साथ ही डील होगी. ट्रंप ने जोर देते हुए कहा, "हर दूसरे देश के साथ सौदे नहीं किए जाएंगे. हम हर किसी के साथ डील करने नहीं जा रहे। कुछ लोगों को हम सिर्फ़ एक पत्र भेजकर बहुत-बहुत धन्यवाद कहेंगे. उन्हें 25, 35 या 45 प्रतिशत का भुगतान करना होगा। यह सबसे आसान तरीका है." अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए ट्रंप ने अपनी टीम की ओर भी इशारा किया और कहा, "मेरे लोग इसे इस तरह से नहीं करना चाहते, वे कुछ डील करना चाहते हैं लेकिन वे मुझसे ज़्यादा सौदे करना चाहते हैं." ट्रंप का यह बयान स्पष्ट करता है कि उनकी प्रशासनिक प्राथमिकता उन देशों के साथ मजबूत व्यापारिक समझौते करना है, जो अमेरिकी हितों के अनुरूप हैं. वहीं, उन देशों के लिए जो अमेरिका के साथ अनुकूल शर्तों पर समझौता नहीं करना चाहते, ट्रंप सरकार एक कड़ा रुख अपनाने की तैयारी में है.

ट्रंप ने की रेयर अर्थ पर डील की पुष्टि
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर वैश्विक व्यापार नीति को लेकर बड़ा संकेत देते हुए भारत और चीन के साथ संभावित बड़े समझौतों की बात कही है. उन्होंने कहा कि अमेरिका अब उन चीज़ों को संभव बना रहा है, जिन्हें कभी असंभव माना जाता था. ट्रंप ने यह भी कहा, “हम कुछ बेहतरीन सौदे कर रहे हैं। हम एक और सौदा करने जा रहे हैं, जहां हम भारत के लिए दरवाजे खोलने जा रहे हैं. वहीं, चीन के साथ सौदे में हम चीन के लिए दरवाजे खोलने जा रहे हैं. ऐसी चीजें जो यकीनन कभी नहीं हो सकती थीं.” उन्होंने आगे कहा, “हर देश के साथ हमारे संबंध बहुत अच्छे रहे हैं.” हालांकि, ट्रंप ने चीन के साथ हुए समझौते की विस्तृत जानकारी नहीं दी, लेकिन उन्होंने इसे एक ऐतिहासिक पहल करार दिया. बाद में व्हाइट हाउस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने साफतौर पर बताया कि चीन के साथ यह समझौता रेयर अर्थ शिपमेंट्स को लेकर था. यह समझौता चीन से अमेरिका में रेयर अर्थ मटेरियल्स की आपूर्ति में तेजी लाने पर केंद्रित है. जो इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा और हरित तकनीक में इस्तेमाल होने वाली महत्वपूर्ण धातुएं हैं.

यह भी पढ़ें

अमेरिका और चीन के बीच व्यापार संबंधों को लेकर हालिया घटनाक्रमों में एक और महत्वपूर्ण मोड़ आया है. रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, व्हाइट हाउस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने खुलासा किया है कि दोनों देशों ने जिनेवा समझौते को लागू करने के लिए एक अतिरिक्त रूपरेखा पर सहमति जताई है. अधिकारी ने बताया, "प्रशासन और चीन ने जिनेवा समझौते को लागू करने के लिए एक रूपरेखा के तहत एक अतिरिक्त समझौते पर सहमति व्यक्त की है." इस सहमति का प्रमुख उद्देश्य चीन द्वारा महत्वपूर्ण खनिजों और चुम्बकीय तत्वों (rare earths and magnets) पर लगाए गए प्रतिबंधों के कारण पैदा हुई आपूर्ति में देरी को सुलझाना है. यह संकट विशेष रूप से ऑटोमोटिव, रक्षा और प्रौद्योगिकी जैसे रणनीतिक क्षेत्रों को प्रभावित कर रहा था, जहां इन तत्वों का उपयोग अनिवार्य है.

टिप्पणियाँ 0
LIVE
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Close
ADVERTISEMENT
NewsNMF
NMF App
Download
शॉर्ट्स
वेब स्टोरीज़
होम वीडियो खोजें