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अमेरिका में ट्रंप को बड़ा झटका... पोर्टलैंड में नेशनल गार्ड तैनाती के फैसले पर अदालत ने लगाई रोक, जानें पूरा मामला

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को झटका लगा है. ओरेगन के पोर्टलैंड में 200 नेशनल गार्ड सैनिकों की तैनाती के उनके आदेश पर संघीय अदालत ने 18 अक्टूबर तक रोक लगा दी है. अदालत ने कहा कि प्रदर्शन विद्रोह के स्तर तक नहीं पहुंचे हैं. ओरेगन सरकार ने इसे राज्य की स्वायत्तता पर हमला बताया और ट्रंप पर पुराने वीडियो के आधार पर फैसला लेने का आरोप लगाया.

अमेरिका में ट्रंप को बड़ा झटका... पोर्टलैंड में नेशनल गार्ड तैनाती के फैसले पर अदालत ने लगाई रोक, जानें पूरा मामला
Donald Trump (File Photo)
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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को उस समय बड़ा झटका लगा जब संघीय अदालत ने उनके हालिया फैसले पर रोक लगा दी, जिसमें उन्होंने ओरेगन के पोर्टलैंड शहर में 200 नेशनल गार्ड सैनिकों की तैनाती का आदेश दिया था. अदालत ने इस आदेश पर 18 अक्टूबर तक के लिए अस्थायी रोक लगा दी है. यह मामला अब अमेरिका में राजनीतिक बहस का नया केंद्र बन गया है.

विद्रोह का कोई सबूत नहीं

यह आदेश यूएस डिस्ट्रिक्ट जज करिन इम्मरगट ने जारी किया, जो खुद ट्रंप के पहले कार्यकाल में नियुक्त हुई थीं. उन्होंने अपने फैसले में कहा कि प्रशासन यह साबित करने में नाकाम रहा है कि पोर्टलैंड में चल रहे विरोध प्रदर्शन किसी विद्रोह या राष्ट्रीय सुरक्षा के खतरे के स्तर तक पहुंचे हों. अदालत ने स्पष्ट किया कि स्थानीय विरोध प्रदर्शन को लेकर संघीय बलों की तैनाती का औचित्य सिद्ध नहीं किया जा सका है.

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ओरेगन सरकार का आरोप

ओरेगन की अटॉर्नी जनरल डैन रेफील्ड ने ट्रंप प्रशासन के इस कदम को अदालत में चुनौती दी थी. उनका कहना था कि ट्रंप शांतिपूर्ण प्रदर्शनों को जानबूझकर अशांत बताकर नेशनल गार्ड की तैनाती का औचित्य साबित करना चाहते हैं. राज्य सरकार ने इसे संघीय कानून का उल्लंघन और राज्य की स्वायत्तता पर हमला बताया. अदालत में दायर याचिका में यह भी कहा गया कि ट्रंप ने यह निर्णय फॉक्स न्यूज पर दिखाए गए पुराने वीडियो देखकर लिया, जबकि इस बार के प्रदर्शन छोटे और शांतिपूर्ण थे. राज्य के वकीलों ने जानकारी दी कि पिछले तीन महीनों में किसी बड़े प्रदर्शन की कोई गिरफ्तारी नहीं हुई, जिससे स्पष्ट है कि स्थिति नियंत्रण में है.

ट्रंप प्रशासन का दावा

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वहीं ट्रंप प्रशासन का कहना है कि यह तैनाती घरेलू आतंकवाद से संघीय इमारतों की रक्षा के लिए आवश्यक थी. प्रशासन के प्रवक्ताओं के अनुसार, हाल के वर्षों में सरकारी परिसरों पर हमले बढ़े हैं, इसलिए किसी भी संभावित खतरे से पहले तैयार रहना जरूरी है. शनिवार शाम को भी दक्षिण पोर्टलैंड में ICE (इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट) मुख्यालय के बाहर प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी की, लेकिन पुलिस ने स्थिति को नियंत्रण में रखा.

अमेरिका में बढ़ा राजनीतिक टकराव

यह फैसला अमेरिकी राजनीति में एक नया विवाद खड़ा कर रहा है. डेमोक्रेटिक पार्टी ने ट्रंप पर राजनीतिक फायदा लेने के लिए सैन्य शक्ति का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है. वहीं, रिपब्लिकन समर्थक इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से सही ठहरा रहे हैं. व्हाइट हाउस ने संकेत दिया है कि वह अदालत के इस आदेश के खिलाफ अपील करेगा. जानकारों का मानना है कि यह मामला केवल कानून व्यवस्था तक सीमित नहीं, बल्कि संघीय और राज्य सरकारों के अधिकारों के बीच बढ़ते टकराव का उदाहरण है.

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बताते चलें कि अदालत की रोक ने न केवल ट्रंप प्रशासन के फैसले पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि अमेरिकी लोकतंत्र में सत्ता और अधिकारों के संतुलन की बहस को भी तेज कर दिया है. ओरेगन की यह कानूनी जंग आने वाले महीनों में अमेरिकी राजनीति की दिशा तय कर सकती है, जहां एक ओर कानून व्यवस्था की दलील है तो दूसरी ओर नागरिक स्वतंत्रता की आवाज बुलंद हो रही है.

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