बांग्लादेश में 15 दिन के अंदर होगा कुछ बड़ा! भारत ने लिया चौंकाने वाला फैसला, राजनयिकों की फैमिली को देश लौटने का आदेश
भारत ने बांग्लादेश में आम चुनाव से पहले एक बड़ा और सख्त फैसला लिया है. सरकार ने बांग्लादेश को नॉन-फैमिली स्टेशन घोषित कर दिया है. बांग्लादेश अब इराक, अफगानिस्तान, पाकिस्तान और दक्षिण सूडान जैसे देशों की सूची में शामिल हो गया है.
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बांग्लादेश में चुनाव को लेकर पूरी दुनिया में हलचल तेज हो गई है. देश में हिंसा और राजनीतिक उथल-पुथल के बीच चुनावी तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं. इसी बीच भारत के विदेश मंत्रालय ने एक बड़ा फैसला लिया है, जिसके बाद बांग्लादेश को सुरक्षा की दृष्टि से संवेदनशील देशों की श्रेणी में रखा गया है, जहां परिवारों की मौजूदगी को जोखिम भरा माना जाता है. बांग्लादेश को भारत ने नॉन फैमिली स्टेशन घोषित कर दिया है.
भारत ने राजनयिकों की फैमिली को देश लौटने का दिया आदेश
दरअसल, भारत सरकार ने बांग्लादेश में चुनावी माहौल और वहां की मौजूदा सुरक्षा स्थिति को देखते हुए वहां मौजूद भारतीय उच्चायोग, काउंसलेट और अन्य कार्यालयों में तैनात अधिकारियों के परिवारों को जल्द से जल्द भारत लौटने का निर्देश दिया है. कहा जा रहा है कि बांग्लादेश में संसदीय चुनाव से कुछ हफ्ते पहले भारत ने यह एहतियाती कदम उठाया है.
नॉन-फैमिली स्टेशन घोषित करने का क्या मतलब है?
भारत द्वारा बांग्लादेश को नॉन-फैमिली स्टेशन घोषित करने का मतलब यह है कि इस श्रेणी में शामिल देशों में तैनात भारतीय राजनयिकों और अधिकारियों को अब अपने परिवार (पति-पत्नी या बच्चों) को साथ रखने की अनुमति नहीं होगी. यानी अगले आदेश तक राजनयिक न तो अपने परिवार को वहां ले जा सकेंगे और न ही उनके साथ वहां रह पाएंगे.
MEA सूत्रों ने की खबर की पुष्टि!
आधिकारिक सूत्रों ने बताया, “सुरक्षा स्थिति को देखते हुए एहतियात के तौर पर हमने उच्चायोग और अन्य पदों पर तैनात अपने अधिकारियों के आश्रितों को भारत लौटने की सलाह दी है.” हालांकि विदेश मंत्रालय की ओर से इस फैसले पर कोई औपचारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन एमईए के सूत्रों ने इसकी पुष्टि जरूर की है.
क्या है पूरी खबर?
सूत्रों के अनुसार, बांग्लादेश स्थित भारतीय उच्चायोग में सभी पदों पर अधिकारी कार्यरत हैं. ढाका स्थित उच्चायोग के अलावा चटगांव, खुलना, राजशाही और सिलहट में भी भारतीय राजनयिक तैनात हैं. सूत्रों का कहना है कि हर हाल में एक हफ्ते के भीतर डिप्लोमेट्स के परिवारों को भारत लौटना होगा. हालांकि यह भी बताया गया है कि परिवारों की वापसी की प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है. कई खेप भारत लौट चुकी हैं, जबकि कुछ की वापसी अभी बाकी है. जिन अधिकारियों के बच्चे स्कूलों में पढ़ रहे हैं, उन्हें अतिरिक्त एक हफ्ते का समय दिया गया है.
बांग्लादेश में मौजूदा सुरक्षा परिदृश्य को देखते हुए भारत ने मंगलवार को वहां तैनात भारतीय अधिकारियों के परिवारों को वापस बुलाने का फैसला किया. यह कदम बांग्लादेश में संसदीय चुनाव होने से कुछ सप्ताह पहले उठाया गया है. आधिकारिक सूत्रों ने दोहराया कि यह फैसला पूरी तरह एहतियाती और सुरक्षा आधारित है.
बांग्लादेश में खून-खराबा बढ़ने के आसार
सूत्रों की मानें तो आगामी चुनावों में तारिक रहमान की पार्टी बीएनपी को बढ़त मिलती दिखाई दे रही है, जबकि जमात-ए-इस्लामी बांग्लादेश और एनसीपी सत्ता की दौड़ में पिछड़ती नजर आ रही हैं. ये वही दल हैं, जिन्होंने शेख हसीना सरकार के खिलाफ आंदोलन और ढाका विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व किया था. कट्टरपंथी संगठनों को उम्मीद थी कि हसीना की विदाई के बाद उन्हें सत्ता मिलेगी, लेकिन मौजूदा हालात ऐसे संकेत नहीं दे रहे हैं.
चुनाव के बाद हिंसा की आशंका
ऐसे में चुनाव परिणाम आने के बाद बांग्लादेश में बड़े पैमाने पर हिंसा, अराजकता और राजनीतिक अस्थिरता की आशंका जताई जा रही है. कहा जा रहा है कि बीएनपी की संभावित जीत और अपनी हार के बाद कट्टरपंथी और जिहादी ताकतें किसी “विलेन” की तलाश में भारत को निशाना बना सकती हैं. सूत्रों का दावा है कि पाकिस्तान के इशारे पर भारतीय उच्चायोग और वहां तैनात कर्मचारियों को टार्गेट किए जाने का खतरा भी बढ़ सकता है.
भारत ने ब्लैकमेलिंग से बचने के लिए लिया सख्त फैसला
यही वजह मानी जा रही है कि भारत ने किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति, ब्लैकमेलिंग या सुरक्षा संकट से बचने के लिए बांग्लादेश को नॉन-फैमिली मिशन वाले देशों की सूची में शामिल कर दिया है, ताकि भारतीय राजनयिकों के परिवारों की सुरक्षा से कोई समझौता न हो.
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गौरतलब है कि अगस्त 2024 में शेख हसीना सरकार के पतन के बाद मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के सत्ता में आने से भारत और बांग्लादेश के संबंधों में तनाव देखा गया है. भारत लगातार बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों, विशेषकर हिंदुओं पर हो रहे हमलों को लेकर चिंता जाहिर करता रहा है.
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