'अमेरिका-चीन पर निर्भरता नहीं चलेगी...', भारत पहुंचे फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों का दो टूक संदेश
इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि भारत और फ्रांस AI इनोवेशन को लेकर एक जैसा जुनून रखते हैं. दोनों देश अब अमेरिकी और चीनी मॉडलों पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना चाहते. उन्होंने स्पष्ट किया कि दोनों राष्ट्र संतुलित और संप्रभु AI मॉडल विकसित कर समाधान का हिस्सा बनना चाहते हैं.
Follow Us:
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों (Emmanuel Macron) भारत के दौरे पर हैं. इस दौरान मैक्रों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ लंबी द्विपक्षीय बातचीत भी की. इसके बाद उन्होंने ने भारत और फ्रांस के बीच तेजी से मजबूत हो रहे तकनीकी संबंधों पर जोर देते हुए साफ कहा कि दोनों देश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में अपनी अलग और संप्रभु पहचान बनाना चाहते हैं. उनका संदेश स्पष्ट था. अब समय आ गया है कि भारत और फ्रांस अमेरिकी और चीनी मॉडलों पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय अपना संतुलित और व्यापक मॉडल विकसित करें.
नई दिल्ली में आयोजित AI इम्पैक्ट समिट और अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में छात्रों से बातचीत के दौरान मैक्रों ने कहा कि भारत, फ्रांस और यूरोप में एक जैसा जुनून है. हम केवल दर्शक नहीं बनना चाहते. हम समाधान का हिस्सा बनना चाहते हैं. यह बयान केवल एक कूटनीतिक टिप्पणी नहीं था, बल्कि एक रणनीतिक दृष्टि का संकेत था.
मैक्रों ने किन बातों पर दिया जोर
मैक्रों ने माना कि वर्तमान में AI की वैश्विक दौड़ में अमेरिका और चीन आगे हैं. लेकिन उन्होंने यह भी दोहराया कि भारत और फ्रांस मजबूती से इस प्रतिस्पर्धा में बने हुए हैं. उनका मानना है कि यदि सही दिशा में निवेश किया जाए तो दोनों देश इस क्षेत्र में बड़ी छलांग लगा सकते हैं. उन्होंने AI पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए तीन अहम स्तंभ गिनाए.
1. कंप्यूटिंग क्षमता. यानी मजबूत डेटा सेंटर और हाई-परफॉरमेंस कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण.
2. टैलेंट. अपने ही देशों में वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और विशेषज्ञों को तैयार करना.
3. पूंजी. रिसर्च और स्टार्टअप्स को आगे बढ़ाने के लिए पर्याप्त वित्तीय निवेश.
फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने स्पष्ट संकेत है कि दोनों देश केवल तकनीक खरीदने के बजाय उसे खुद विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं.
स्वास्थ्य सेवा में ऐतिहासिक पहल
इस दौरे की सबसे बड़ी उपलब्धि रही ‘इंडो-फ्रेंच सेंटर फॉर एआई इन हेल्थ’ यानी IF-CAIH की शुरुआत. इसका उद्घाटन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा और राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने संयुक्त रूप से किया. यह केंद्र AIIMS दिल्ली, सोरबोन यूनिवर्सिटी और पेरिस ब्रेन इंस्टीट्यूट के बीच हुए समझौता ज्ञापन के तहत स्थापित किया गया है. इसमें आईआईटी दिल्ली का भी शैक्षणिक सहयोग शामिल है. इस केंद्र का उद्देश्य AI आधारित अनुसंधान, चिकित्सा शिक्षा और क्लिनिकल नवाचार के माध्यम से जटिल स्वास्थ्य समस्याओं का समाधान ढूंढना है. डिजिटल हेल्थ के क्षेत्र में यह पहल भारत-फ्रांस सहयोग का नया अध्याय मानी जा रही है.
ज़िम्मेदारियों पर देना होगा जोर
मैक्रों ने यह भी कहा कि AI का विकास मानवता की सेवा के लिए होना चाहिए. उन्होंने बच्चों की सुरक्षा, एल्गोरिद्म में पारदर्शिता और भाषाई व सांस्कृतिक विविधता को बनाए रखने पर विशेष जोर दिया. उनका मानना है कि तकनीक तभी सफल है जब वह समाज के हर वर्ग के लिए सुरक्षित और उपयोगी हो. इस अवसर पर ‘रेनकॉन्ट्रेस यूनिवर्सिटेयर्स ऐट साइंटिफिक्स डी हौट निव्यू’ यानी RUSH 2026 के तहत अकादमिक और वैज्ञानिक बैठकों की शृंखला भी आयोजित की गई. इसी कार्यक्रम के दौरान मैक्रों ने भारतीय युवा नवप्रवर्तकों प्रियंका दास राजकाकती और मनन सूरी के साथ ‘रश- कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर बातचीत’ नामक विशेष संवाद में भाग लिया.
युवाओं में भरा उत्साह
इस चर्चा ने युवाओं में AI को लेकर नई ऊर्जा और आत्मविश्वास भरा. आधिकारिक बयान के अनुसार, यह पहल डिजिटल स्वास्थ्य में भारत-फ्रांस सहयोग का अहम मील का पत्थर है. यह भारत के उस विजन को मजबूत करता है जिसमें वह समान, सुलभ और प्रौद्योगिकी आधारित स्वास्थ्य समाधानों में वैश्विक नेतृत्व की ओर बढ़ रहा है.
बताते चलें कि यह साझेदारी केवल दो देशों के बीच समझौता नहीं है. यह आत्मनिर्भरता, नवाचार और जिम्मेदार तकनीकी विकास की दिशा में एक बड़ा कदम है. अगर यह सहयोग इसी गति से आगे बढ़ता रहा तो आने वाले वर्षों में भारत और फ्रांस AI के वैश्विक मानचित्र पर एक नई और मजबूत पहचान बना सकते हैं.
Advertisement
यह भी पढ़ें
Advertisement