झारखंड में एक छात्र को परीक्षा दिलाने के लिए पूरे सिस्टम के छूटे पसीने, करनी पड़ी CCTV, मजिस्ट्रेट, 18 निगरानी दल और पुलिस की 12 टीमों की तैनाती!
झारखंड के गढ़वा में सिर्फ एक छात्र को परीक्षा दिलाने में पूरे सिस्टम के पसीने छूट गए. इतना ही नहीं छात्र को नकल से रोकने के लिए CCTV, मजिस्ट्रेट, 18 निगरानी दल और पुलिस की 12 टीमों की तैनाती की गई. अब तस्वीर वायरल हो रही है.
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झारखंड एकेडमिक काउंसिल (जैक) की ओर से आयोजित मैट्रिक और वार्षिक परीक्षा राज्यभर में सफलतापूर्वक संपन्न हो गईं. करीब 15 दिनों तक हुई इस परीक्षा को लेकर तमाम तरह की खबरें सामने आईं. इसी बीच एक हैरान कर देने वाली खबर सामने आ रही है. दरअसल यहां एक छात्र की चोरी रोकने के लिए पूरे प्रशासन और सरकार के पसीने छूट गए हैं. पुलिस को भी काफी मशक्कत करनी पड़ रही है. पूरा एग्जाम हॉल खाली कर, सिर्फ उसे ही क्लास रूम में बैठाकर परीक्षा दिलाई जा रही है. अब ये तस्वीर काफी वायरल हो रही है.
वैसे तो पूरे झारखंड में इन दिनों मैट्रिक और इंटरमीडिएट की परीक्षा चल रही है, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा उत्क्रमित मध्य विद्यालय हरहे रमकांडा की हो रही है. वजह है भी अजब-गजब. दरअसल इस सेंटर पर एक दिन सिर्फ एक छात्र ने ही एग्जाम दिया. और तो और छात्र परीक्षा में चोरी ना कर पाए इसके लिए प्रशासन ही नहीं पूरे सिस्टम ने अपना पूरा दम लगा दिया. इस दौरान सेंटर पर एक मजिस्ट्रेट, 18 निगरानी दल, 12 फोर्स की टीमें लगाई गईं थीं. इतना ही वहीं परीक्षा केंद्र पर एक्स्ट्रा CCTV भी लगवाए गए. इसके अतिरिक्त निगरानी की भी व्यवस्था की गई.
चर्चा का विषय उत्क्रमित मध्य विद्यालय हरहे रमकांडा बना हुआ है. इस सेंटर पर एक दिन सिर्फ एक छात्र ने ही एग्जाम दिया. छात्र एग्जाम के दौरान नकल न करने पाए इसलिए पूरा सिस्टम लगा हुआ था और सेंटर पर एक मजिस्ट्रेट, 18 निगरानी दल, 12 फोर्स की टीमें लगाई गईं थीं. इसके अलावा सेंटर पर एक्स्ट्रा सीसीटीवी भी लगवाए गए.
क्या है पूरा मामला?
तो चलिए आपको असल मामला बताते हैं. बात कुछ ये है कि अकले परीक्षा दे रहे वायरल छात्र का नाम शंकर कुमार सिंह है. वो मैट्रिक का छात्र है. उसने संगीत विषय का चयन किया है. उसका सेंटर उत्क्रमित मध्य विद्यालय हरहे रमकांडा में पड़ा. उसकी परीक्षा के दौरान प्रशासन ने उतनी ही व्यवस्था की, सतर्कता बरती जितनी की अन्य विषयों के परीक्षा के दौरान, चाहे एक छात्र थे या 400 छात्र. ऐसे में इस तस्वीर की खूब चर्चा हो रही है. एक छात्र के लिए पूरे प्रशासन की सक्रियता की खूब चर्चा हो रही है.
केंद्रधीक्षक ने इस संबंध में क्या बताया?
वहीं इस संबंध में पूछने पर केंद्रधीक्षक हर्ष ज्योति शुक्ला ने बताया कि स्कूल में अन्य विषय के छात्रों का भी एग्जाम है. इस परीक्षा केंद्र में सोमवार को संस्कृत की परीक्षा आयोजित होने के साथ एग्जाम खत्म हो गया. यहां पर इससे पहले एक छात्र, जिसने संगीत विषय लिया था. उसने सेंटर पर अकेले एग्जाम दिया. क्योंकि इस विषय का कोई अन्य छात्र यहां नहीं था. हालांकि, इस स्कूल में कुल 406 छात्रों ने एग्जाम दिया. परीक्षा के दौरान सिर्फ 3 छात्र ही अनुपस्थित पाए गए.
जहां तक राज्यभर में परीक्षा की सुरक्षा और व्यवस्था का सवाल है जैक ने दावा किया कि परीक्षा शांतिपूर्ण, निष्पक्ष और पारदर्शी ढंग से संपन्न कराने के लिए आवश्यक इंतजाम किए गए. आपको बता दें कि इस वर्ष मैट्रिक परीक्षा 17 फरवरी तक, जबकि इंटरमीडिएट परीक्षा 23 फरवरी तक आयोजित की जाएगी. राज्यभर में कुल 7,58,182 छात्र-छात्राएं परीक्षा में शामिल हुए. इनमें मैट्रिक के 4,23,861 और इंटरमीडिएट के 3,34,321 परीक्षार्थी थे. परीक्षा के लिए मैट्रिक के 1232 और इंटरमीडिएट के 757 परीक्षा केंद्र बनाए गए.
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सभी केंद्रों पर निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए गए, ताकि कदाचार पर प्रभावी नियंत्रण रखा जा सके. परीक्षा दो पालियों में आयोजित की गई. पहली पाली में सुबह 9.45 बजे से दोपहर 12.35 बजे तक मैट्रिक और दूसरी पाली में दोपहर 2.00 बजे से शाम 5.15 बजे तक इंटरमीडिएट की परीक्षा हुई. परीक्षार्थियों को प्रश्नपत्र पढ़ने और मानसिक दबाव से उबरने के लिए अतिरिक्त 15 मिनट का समय भी दिया गया.
वहीं मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मैट्रिक और इंटरमीडिएट के परीक्षार्थियों के साथ-साथ अभिभावकों, शिक्षकों, परीक्षा कार्य में लगे कर्मियों और आम नागरिकों से परीक्षा के सुचारू संचालन में सहयोग की अपील की थी. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा में गुणात्मक सुधार और मानव संसाधन विकास के उद्देश्य से कदाचारमुक्त वातावरण में परीक्षा संपन्न कराने के लिए पूरी तरह कृतसंकल्प है. जैक ने सोशल मीडिया पर फर्जी या पुराने प्रश्नपत्र वायरल करने को लेकर सख्त चेतावनी जारी की थी.
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वहीं परिषद ने परीक्षा से पहले कहा था कि यूट्यूब, टेलीग्राम, व्हाट्सएप और अन्य प्लेटफॉर्म पर फर्जी प्रश्नपत्र बनाना, साझा करना या अफवाह फैलाना गंभीर अपराध है. ऐसे मामलों में दोषियों के खिलाफ आईटी एक्ट 2000 और भारतीय दंड संहिता के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी. जरूरत पड़ने पर संबंधित सोशल मीडिया ग्रुप या चैनल बंद कराए जाएंगे और दोषियों के नाम सार्वजनिक किए जाएंगे.
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जैक ने आम लोगों से अपील की है कि परीक्षा केंद्रों के आसपास शांतिपूर्ण वातावरण बनाए रखें, किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत प्रशासन को दें और केवल परिषद द्वारा जारी आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें. परीक्षार्थियों की सहायता के लिए परिषद की ओर से टोल-फ्री नंबर भी जारी किया गया था.
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